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RBI annual report: बैंकों, कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत, FY25 में GDP ग्रोथ रेट 7% रहने का अनुमान

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आरबीआई ने कहा, ‘‘ 2024-25 के लिए वास्तविक (सकल घरेलू उत्पाद) जीडीपी वृद्धि 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें जोखिम दोनों तरफ समान रूप से संतुलित होंगे।’’

Last Updated- May 30, 2024 | 12:49 PM IST
India GDP growth forecast
Representative Image

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय अर्थव्यवस्था के सात प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया है।

आरबीआई ने गुरुवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2023-24 (अप्रैल 2023 से मार्च 2024 वित्त वर्ष) में मजबूत गति से विस्तार किया, जिससे वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो गई। यह 2022-23 में 7.0 प्रतिशत थी। यह लगातार तीसरे वर्ष सात प्रतिशत या उससे अधिक रही।

यह भी पढ़ें: बैंकों, कंपनियों की स्वस्थ बैलेंस शीट के दम पर GDP ग्रोथ मजबूत: RBI

आरबीआई ने कहा, ‘‘ 2024-25 के लिए वास्तविक (सकल घरेलू उत्पाद) जीडीपी वृद्धि 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें जोखिम दोनों तरफ समान रूप से संतुलित होंगे।’’ इसमें कहा गया कि वित्त वर्ष 2023-24 में अर्थव्यवस्था ने लगातार चुनौतियों के बावजूद जुझारुपन दिखाया।

बैंकों, कंपनियों की स्वस्थ बैलेंस शीट के दम पर GDP ग्रोथ मजबूत: RBI

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने  कहा कि मजबूत निवेश मांग के दम पर भारत की जीडीपी वृद्धि मजबूत बनी है। इसे बैंकों तथा कॉरपोरेट जगत की स्वस्थ बैलेंस शीट, पूंजीगत व्यय पर सरकार के ध्यान देने और विवेकपूर्ण मौद्रिक, नियामक तथा राजकोषीय नीतियों से समर्थन मिला है।

रिजर्व बैंक की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था प्रतिकूल वैश्विक समष्टि आर्थिक और वित्तीय परिवेश से जूझ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था, व्यापक आर्थिक तथा वित्तीय स्थिरता के परिदृश्य में अगले दशक में वृद्धि की गति को तेज करने की अच्छी स्थिति में है।

इसमें कहा गया, ‘‘कुल (हेडलाइन) मुद्रास्फीति के निर्धारित स्तर की ओर बढ़ने से खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग मांग में तेजी आएगी। बाह्य क्षेत्र की मजबूती और विदेशी मुद्रा भंडार घरेलू आर्थिक गतिविधियों को वैश्विक प्रभावों से बचाएंगे।’’

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भू-राजनीतिक तनाव, भू-आर्थिक विखंडन, वैश्विक वित्तीय बाजार में अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चित मौसम संबंधी घटनाक्रम वृद्धि के कम होने और मुद्रास्फीति के बढ़ने का जोखिम उत्पन्न करती है।

आरबीआई ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को एआई/एमएल (कृत्रिम मेधा/मशीन लर्निंग) प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने के साथ-साथ बार-बार आने वाले जलवायु झटकों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करना होगा। वार्षिक रिपोर्ट आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की एक वैधानिक रिपोर्ट है। रिपोर्ट में अप्रैल 2023 से मार्च 2024 की अवधि के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के कामकाज और कार्यों को शामिल किया गया है।

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First Published - May 30, 2024 | 12:39 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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