भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार के हालिया कदमों का असर आने वाले महीनों में विदेशी निवेश पर दिख सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से देश में विदेशी पूंजी का फ्लो बढ़ेगा, जिससे भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) की स्थिति मजबूत हो सकती है और रुपये को भी सहारा मिल सकता है।
हाल ही में RBI ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा (FCNR-B) को बढ़ावा देने के लिए कुछ राहतें दी हैं। इसके तहत इन जमाओं पर हेजिंग लागत का बोझ खुद उठाने का फैसला किया गया है। साथ ही बैंकों को एनआरआई ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दरें देने की सुविधा भी दी गई है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को विदेशी बाजारों से कर्ज जुटाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।
सरकार ने विदेशी डेट निवेशकों के लिए बड़ा कदम उठाते हुए विदहोल्डिंग टैक्स को 20 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय डेट बाजार में निवेश करना पहले की तुलना में ज्यादा आकर्षक हो सकता है।
ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल का अनुमान है कि RBI और सरकार के इन कदमों से वित्त वर्ष 2027 में भारत में 75 से 80 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त विदेशी निवेश आ सकता है। अगर भारत को किसी वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में शामिल किया जाता है तो इसके अलावा 15 से 20 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त निवेश भी आ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो भारत का चालू खाता घाटा (CAD) करीब 87 अरब डॉलर या जीडीपी के 2.1 फीसदी के बराबर रह सकता है। हालांकि पूंजी खाते (Capital Account) में करीब 80 अरब डॉलर का अधिशेष आने का अनुमान है, जिससे चालू खाते के घाटे की भरपाई काफी हद तक हो सकती है।
रिपोर्ट का मानना है कि अगर ईरान से जुड़ा मौजूदा तनाव धीरे-धीरे कम हो जाता है तो अगले 3 से 4 महीनों में रुपये में मजबूती देखने को मिल सकती है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के स्तर तक पहुंच सकता है।
हालांकि अगले एक साल में भारत के चालू खाते और राजकोषीय घाटे को लेकर चिंताएं फिर उभर सकती हैं। इसके अलावा अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत बना रहता है तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में अगले 12 महीनों में रुपया 96 प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हो सकता है। हालांकि यह पहले के 98-99 प्रति डॉलर के अनुमान से बेहतर स्थिति मानी जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI और सरकार के हालिया फैसलों ने रुपये के लिए निकट अवधि का माहौल काफी सकारात्मक बना दिया है। विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना से भारत के बाहरी वित्तीय मोर्चे को मजबूती मिल सकती है और रुपये की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर रह सकती है।