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रीपो रेट में क्यों नहीं हुआ बदलाव? RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने समझाया मौद्रिक नीति समिति का पूरा गणित

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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद 4 फीसदी महंगाई का लक्ष्य बरकरार है और नकदी की कमी नहीं होने दी जाएगी

Last Updated- June 06, 2026 | 9:14 AM IST
Sanjay Malhotra, Governor, RBI
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के रीपो दर को जस का तस रखने और तटस्थ रुख बनाए रखने के फैसले के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे, पूनम गुप्ता, शिरीष चंद्र मुर्मू और रोहित जैन के साथ मिलकर नीति की घोषणा और अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चिंताओं पर मीडिया से बातचीत की। मुख्य अंश:

एफसीएनआर (बी), ईसीबी और आज घोषित दूसरे उपायों से किस तरह की उम्मीद है? 

गवर्नर: हम किसी खास रकम का लक्ष्य नहीं रख रहे हैं। लेकिन हमें ईसीबी और आज घोषित अलग-अलग उपायों से अच्छी मात्रा में विदेशी मुद्रा की आने की उम्मीद है। ईसीबी और एफसीएनआर (बी) जमाओं के लिए हमने तीन-चार महीने का समय रखा है। हमें इस दौरान इक्विटी और सरकारी बॉन्डों से जुड़े दूसरे उपायों से भी अच्छी राशि मिलने की उम्मीद है।

पहले के उपायों जैसे कि आसान ईसीबी ढांचा और सरकारी पहलों, जिनमें व्यापार करार शामिल हैं, साथ रखकर देखें तो हमें पूरा भरोसा है कि इस साल भुगतान संतुलन पहले की तुलना में कहीं बेहतररहेगा।

आपने यह नहीं बताया कि महंगाई दर 4 फीसदी पर कब वापस आएगी, तो क्या हम यह मान लें कि आरबीआई ने फिलहाल 4 फीसदी के लक्ष्य को टाल दिया है और वह दायरे पर ध्यान दे रहा है? 

गवर्नर: नहीं, लक्ष्य को बिल्कुल भी टाला गया है। यह हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। यह वह लक्ष्य है, जो सरकार ने हमें दिया है। यह 4 फीसदी ही है और हमारी कोशिश भी यही है। लेकिन ध्यान रहे कि यह लक्ष्य अवधि के दौरान हासिल करना है। यह मध्यम अवधि का लक्ष्य है। लक्ष्य से हर उतार-चढ़ाव पर कार्रवाई करना न तो संभव है और न ही इसकी सलाह दी जाती है, खासकर तब जब महंगाई आपूर्ति में अचानक कमी या रुकावट के कारण बढ़ रही हो क्योंकि इससे वृद्धि पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। इसे समय के साथ हासिल करना है और हम आंकड़ों पर निर्भर रहेंगे। हमें देखना होगा कि क्या आपूर्ति की रुकावटें बनी रहती है या कम हो जाती हैं।

हम इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि क्या महंगाई हर चीज में फैल रही है। हम उसी के अनुसार कार्रवाई करेंगे। 2-6 फीसदी का दायरा  इसलिए है क्योंकि 4 फीसदी के लक्ष्य के आसपास घट-बढ़ हो सकती है। अगर महंगाई अपने आप कम हो रही है तो जरूरी नहीं कि हम ऐसे मौद्रिक नीति उपाय का इस्तेमाल करें, जिनके दूसरे बुरे नतीजे हो सकते हैं।

हाल में एक साक्षात्कार में आपके हवाले से कहा गया था कि रुपया अपनी सही कीमत से कम आंका गया है। रुपये की उचित कीमत क्या है? 

गवर्नर: मैंने कभी नहीं कहा कि रुपया अपनी उचित कीमत से कम आंका गया है। मैंने बस यह कहा था कि यह सोचना सही हो सकता है कि इसका अधिमूल्य नहीं है। कुछ लोग आरईईआर और दूसरे पैमानों को देखकर कहते हैं कि इसा मूल्य कम है। हमारे पास उचित कीमत का कोई लक्ष्य नहीं है। हमारी नीति हमेशा एक जैसी रही है।

इन उपायों से जो राशि आ सकती है, उसे देखते हुए आरबीआई सिस्टम में कितनी नकदी को सही मानता है? क्या आपको उम्मीद है कि हेजिंग की कम लागत का फायदा बैंक अपने ग्राहकों तक पहुंचाएंगे? 

गवर्नर: हां, मुझे उम्मीद है कि बैंक हेजिंग के समर्थन से मिलने वाले फायदे का कुछ हिस्सा ग्राहकों को देंगे और इससे अच्छी रकम आनी चाहिए। जहां तक तरलता यानी नकदी की बात है, हम इतनी नकदी उपलब्ध कराएंगे, जिससे अर्थव्यवस्था की उधारी जरूरतें पूरी हो सकें। हम नकदी के किसी खास स्तर को लक्षित नहीं करते हैं। पिछले दो महीनों में हमने लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये की नकदी सिस्टम में डाली है और जरूरत पड़ने पर हम आगे भी नकदी उपलब्ध कराते रहेंगे।

क्या आप देश से बाहर जाने वाली रकम (पूंजी की निकासी) कम करने के उपायों पर विचार कर रहे हैं, जैसे कि रेमिटेंस या विदेश में निवेश पर रोक? 

गवर्नर: फ़िलहाल ऐसे किसी उपाय पर विचार नहीं किया जा रहा है।

ईसीबी के लिए रियायती विदेशी मुद्रा विनिमय सुविधा को सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों तक ही सीमित क्यों रखा गया है और यह प्राइवेट कंपनियों को क्यों नहीं दी गई? 

गवर्नर: सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां एक खास श्रेणी में आती हैं। वे ऐसे क्षेत्रों में काम करती हैं, जहां अर्थव्यवस्था की जरूरतें ज्यादा होती हैं, खासकर इन्फ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक यूटिलिटी के क्षेत्र में। इसलिए, इसका फायदा समाज के एक बहुत बड़े हिस्से तक पहुंचता है। अगर यह सुविधा निजी कंपनियों को भी दी जाती तो इसका फायदा इतने बड़े पैमाने पर नहीं पहुंच पाता।

आरबी​आई ने महंगाई का अपना अनुमान 50 आधार अंक बढ़ा दिया है। क्या इससे ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना मजबूत होती है?

गवर्नर: महंगाई के हालात निश्चित रूप से पहले के मुकाबले ज्यादा प्रतिकूल हुए हैं। इस कारण ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना मजबूत होती है या नहीं, यह कई बातों पर निर्भर करेगी। अगर यह एक बार होने वाली बढ़ोतरी है तो इसे नजरअंदाज़ किया जा सकता है। लेकिन अगर महंगाई हर जगह हो जाती है, लंबे समय तक बनी रहती है तो फिर कदम उठाने का समय आ जाता है। फिलहाल, हमें इंतज़ार करना होगा और देखना होगा।

अब ये सभी उपाय लागू हैं। क्या आपको लगता है कि बैंकों पर 10 करोड़ डॉलर की नेट ओपन पोजीशन (एनओपी) की सीमा जारी रखी या खत्म की जा सकती है? 

गवर्नर: नहीं, कोई बदलाव नहिंसे है। जो है, वही रहेगा। हमने जो घोषणा की थी और जो लागू किया है, उसे खत्म करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

अभी आपकी कौन से एक जोखिम पर सबसे ज्यादा नजर है?

गवर्नर: कई वजहों से अनिश्चितता है – चल रहा युद्ध, कब तक चलेगा और आपूर्ति शृंखला को सामान्य होने में लगने वाला समय। मॉनसून और अल नीनो की संभावना को लेकर भी अनिश्चितता है। इन सभी बातों का महंगाई और वृद्धि दोनों पर असर पड़ता है और हम बारीकी से इस पर नजर रखेंगे कि हालात कैसे बदलते हैं और उनका क्या असर होता है।

इस समय, मुख्य चिंता यह अनिश्चितता है कि आपूर्ति में रुकावट कब तक रहेगी और कीमतों पर उनका क्या असर होगा। अभी सामान की उपलब्धता कोई बड़ी चिंता नहीं है। बड़ी समस्या कीमतों पर असर और यह दबाव कितने समय तक बना रहता है, इसकी है। इसके अलावा, हम मॉनसून, अल नीनो और दूसरी गतिविधियों पर भी बारीकी से नजर रखेंगे।

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First Published - June 6, 2026 | 9:14 AM IST

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