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RBI MPC 2026: रुपये, विदेशी निवेश और फॉरेक्स रिजर्व पर आरबीआई के बड़े ऐलान

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RBI MPC 2026: रुपये पर नहीं है कोई लक्ष्य, विदेशी निवेश बढ़ाने और बाजार स्थिर रखने के लिए RBI के नए कदम

Last Updated- June 05, 2026 | 8:03 PM IST
RBI

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्व बैंक की विनिमय दर यानी एक्सचेंज रेट को लेकर नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। आरबीआई रुपये को किसी तय स्तर या दायरे में रखने की कोशिश नहीं करता। रुपये की कीमत बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती है।

रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव हुआ तो हस्तक्षेप करेगा आरबीआई

एमपीसी के फैसलों की घोषणा के दौरान गवर्नर ने कहा कि कई बार वैश्विक अनिश्चितताओं और सट्टेबाजी की वजह से रुपये में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। ऐसे हालात आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकते हैं। इसलिए अगर बाजार में अत्यधिक अस्थिरता आती है या अव्यवस्थित स्थिति बनती है, तो आरबीआई उसे नियंत्रित करने के लिए कदम उठाएगा।

विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में

एमपीसी बैठक के दौरान गवर्नर ने बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.2 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर है। यह करीब 11 महीने के आयात का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त है। साथ ही यह देश के बाहरी कर्ज का 89 फीसदी से ज्यादा हिस्सा कवर करता है, जिससे बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता मजबूत बनी हुई है।

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विदेशी पूंजी लाने के लिए नए उपाय

आरबीआई ने एमपीसी बैठक में विदेशी पूंजी फ्लो बढ़ाने के लिए कुछ नए कदमों का भी ऐलान किया। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को विदेश से कर्ज जुटाने के लिए 13 सितंबर 2026 तक रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा दी जाएगी। इससे उन्हें विदेशी बाजार से फंड जुटाने में आसानी होगी।

विदेशी निवेशकों के लिए बढ़ाया गया दायरा

गवर्नर ने बताया कि विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश के विकल्प बढ़ाए जा रहे हैं। अब 15 साल, 30 साल और 40 साल की अवधि वाले नए सरकारी बॉन्ड भी पूरी तरह सुलभ मार्ग (एफएआर) के तहत शामिल किए जाएंगे। इससे लंबी अवधि का विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत रहा बाहरी क्षेत्र

एमपीसी बैठक में गवर्नर ने कहा कि टैरिफ और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूती से आगे बढ़ा है। हालांकि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापारिक अनिश्चितताएं आगे भी चुनौती बनी रह सकती हैं। इसके बावजूद सेवा क्षेत्र से होने वाली कमाई और विदेशों से आने वाला पैसा देश के लिए राहत का काम करेगा।

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First Published - June 5, 2026 | 10:46 AM IST

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