facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

RBI MPC Meet: क्या RBI देगा 25bps की कटौती? आपके लोन और EMI पर होगा सीधा असर, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Advertisement

RBI MPC Meet: दिसंबर 2025 में RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रीपो रेट और आर्थिक संकेतकों पर फैसला लेने पर नजर होगी।

Last Updated- December 03, 2025 | 8:12 AM IST
RBI MPC Meeting
Representative Image

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) 3 से 5 दिसंबर 2025 तक बैठक करेगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब देश की आर्थिक वृद्धि छह तिमाहियों के उच्च स्तर पर है और महंगाई मासिक आधार पर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति इस बैठक में रीपो रेट, तरलता की स्थिति, मुद्रास्फीति के रुझान और आर्थिक विकास के अनुमान पर विचार करेगी। पिछली बैठक में समिति ने रीपो रेट को 5.50% पर स्थिर रखा था। गवर्नर ने बताया कि मुख्य मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जिससे MPC को मौजूदा दर बनाए रखने का आत्मविश्वास मिला।

क्या है एक्सपर्ट का अनुमान?

अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति बैठक में RBI के सामने दरें घटाने या यथास्थिति बनाए रखने का सवाल है। ICICI बैंक के अनुसार, इस साल खुदरा मुद्रास्फीति कम होने और निर्यात पर बाहरी चुनौतियां होने के कारण दरें घटाने का तर्क है, लेकिन मजबूत आर्थिक वृद्धि, कमजोर मुद्रा और उच्च क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात के कारण यथास्थिति बनाए रखना उचित माना जा रहा है। अदिती गुप्ता, अर्थशास्त्री, बैंक ऑफ बड़ौदा, बताती हैं कि Q2 FY26 में GDP वृद्धि 8.2% रही और शहरी व ग्रामीण खपत में सुधार हुआ है, जबकि CPI मुद्रास्फीति 0.25% तक कम हुई है। कोर मुद्रास्फीति 4% से ऊपर है, लेकिन इसका मुख्य कारण सोना और GST में कटौती है, जो मांग आधारित नहीं है। इसलिए दर में कटौती की गुंजाइश होने के बावजूद RBI फिलहाल सतर्क रहने की नीति अपनाएगा। वहीं, अशोक कपूर, चेयरमैन, कृष्णा ग्रुप और क्रिसुमी कॉर्पोरेशन, मानते हैं कि मुद्रास्फीति कम होने के कारण RBI 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है, जिससे हाउसिंग और उससे जुड़े सेक्टरों को लाभ मिलेगा और मौजूदा आर्थिक वृद्धि को और मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि फिलहाल दरें यथास्थिति पर रखकर आर्थिक संकेतकों और मुद्रास्फीति के विकास को और समझना बेहतर रहेगा, ताकि भविष्य में आवश्यकतानुसार कदम उठाए जा सकें।

Business Standard Poll

विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर की बैठक में मौद्रिक नीति समिति (MPC) अपने रुख को स्थिर रखते हुए तटस्थ (Neutral) नीति अपनाएगी और सावधानीपूर्ण ढंग से ढीला रुख (Dovish) अपना सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के सर्वेक्षण में शामिल 12 वित्तीय संस्थानों के अर्थशास्त्रियों ने भी यही अनुमान लगाया है।

अधिकांश अर्थशास्त्री मान रहे हैं कि दिसंबर बैठक में रीपो रेट स्थिर रह सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण मजबूत दूसरी तिमाही का GDP आंकड़ा और कम मुद्रास्फीति है। SBI के प्रमुख अर्थशास्त्री सौम्या कांति घोष ने कहा कि Q2 में मजबूत वृद्धि और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए इस बार दर में कटौती की संभावना कम है।

वहीं, IDFC FIRST बैंक की अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता के अनुसार, बैंकिंग प्रणाली की तरलता और क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात को देखते हुए तत्काल दर में कटौती करना कठिन होगा। भारतीय बैंकिंग प्रणाली में जमा का हिस्सा लगभग 78% है और क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात 80% के आसपास है। इस कारण से, यदि रीपो दर घटाई भी जाती है, तो इसका पूरा लाभ क्रेडिट पर नहीं पहुंचेगा।

अनुभूति सहाय, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की हेड ऑफ इंडिया इकॉनॉमिक्स ने कहा कि मौजूदा समय में नकदी की उपलब्धता बढ़ाना और मुद्रा स्थिरता बनाए रखना अधिक प्राथमिकता है, न कि दर में कटौती। विशेषज्ञों का अनुमान है कि MPC इस बार तटस्थ रुख अपनाएगी, लेकिन तरलता को पर्याप्त बनाए रखने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) जैसी योजनाओं का सहारा लिया जा सकता है।

Advertisement
First Published - December 2, 2025 | 11:43 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement