RBI MPC Meet: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार (8 अप्रैल) को मॉनेटरी पॉलिसी पर अपने फैसले का एलान कर दिया। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से प्रमुख नीतिगत दर रीपो रेट (Repo Rate) को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। समिति ने मिडिल ईस्ट में संघर्ष की परिस्थितियों पर गौर करते हुए स्टैंडिंग डिपॉज़िट फ़ैसिलिटी (SDF) दर को 5 प्रतिशत पर बनाए रखा गया। वहीं, मार्जिनल स्टैंडिंग फ़ैसिलिटी (MSF) दर और बैंक दर दोनों को 5.5 प्रतिशत पर रखा गया है। यह समिति की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मॉनेटरी पॉलिसी है। फरवरी में हुई इससे पिछली बैठक में भी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने 6 से 8 अप्रैल तक हुई बैठक में पॉलिसी स्टांस ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है। इसका मतलब है कि ब्याज दरें फिलहाल मौजूदा निचले स्तर पर बनी रह सकती हैं। पॉलिसी बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस फैसले की जानकारी दी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है। हालांकि, अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक हालात इसे चुनौती दे रहे हैं। दुनिया भर में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने का खतरा बना हुआ है, जिस पर तेल की बढ़ती कीमतों का असर साफ दिख रहा है।
उन्होंने कहा कि तेल बाजार पर जियोपॉलिटिकल तनाव का साया अब भी मंडरा रहा है। इससे कीमतों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतें हालात को और जटिल बना रही हैं। वहीं, वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी है और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई को लेकर चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही। ऐसे माहौल में, मजबूत घरेलू बुनियाद के बावजूद भारत को वैश्विक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना होगा।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति के बाद वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर कई अहम संकेत दिए। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में ऊर्जा कीमतों में आई तेजी महंगाई के लिए एक बड़ा जोखिम बनकर उभरी है। हालांकि निकट अवधि में खाद्य कीमतों का आउटलुक अभी भी सहज बना हुआ है।
गवर्नर ने चालू वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि प्रवासी भारतीयों से आने वाले रेमिटेंस में मजबूती बनी रहने से चालू खाता घाटा नियंत्रित और टिकाऊ स्तर पर रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच लगातार सतर्क रहने की जरूरत है। इसके बावजूद भारत निवेश के लिहाज से मजबूत स्थिति में है और ग्रीनफील्ड एफडीआई परियोजनाओं के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। गवर्नर के मुताबिक, देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में है, जो 3 अप्रैल तक 696.1 अरब डॉलर के स्वस्थ स्तर पर पहुंच चुका है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह 7.4 फीसदी था। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि दर के अनुमान को 6.9 प्रतिशत पर रखा गया है। यह पहके 7 प्रतिशत पर था। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 6.8 फीसदी और दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 6.7 फीसदी पर रखा गया है।
केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत रखा है। वहीं वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए महंगाई दर 4 प्रतिशत और दूसरी तिमाही के लिए 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान दिया है।
एमपीसी बैठक का नतीजा बिज़नेस स्टैंडर्ड के सर्वे के मुताबिक रहा। सर्वे 10 अर्थशास्त्रियों के बीच किया गया था। इसमें सभी प्रतिभागियों ने कहाथा कि मौद्रिक नीति समिति नीतिगत रीपो दर को 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रख सकती है क्योंकि वह युद्ध के वृद्धि और मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कर रही है।
आरबीएल बैंक को छोड़कर सर्वेक्षण में शामिल सभी प्रतिभागियों का कहना था कि मौद्रिक नीति पर तटस्थ रुख में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि न्यूट्रल रुख केंद्रीय बैंक को जरूरत के हिसाब से किसी भी दिशा में कदम उठाने की सहूलियत देता है।
रीपो रेट वह दर है, जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बैंकों को कर्ज देता है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। जब रेपो रेट बढ़ती है, तो बैंक भी लोन महंगे कर देते हैं, जिससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ जाती है।
इसके उलट, जब रीपो रेट घटती है तो लोन सस्ते हो जाते हैं और ईएमआई का बोझ कम हो सकता है। हालांकि, इस स्थिति में सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाला ब्याज भी कम हो सकता है।