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Repo Rate: क्या RBI फिर से करने वाला है रीपो रेट में इजाफा ? जानिए अर्थशास्त्रियों की राय

RBI ने महंगाई को काबू में करने के लिए मई, 2022 से नीतिगत दर रीपो में 2.5 फीसदी की वृद्धि की है।

Last Updated- March 29, 2023 | 7:37 PM IST
RBI Dividend: What is the reason for Reserve Bank of India giving huge dividend to the government? economists explained RBI Dividend: रिजर्व बैंक के सरकार को भारी लाभांश देने की क्या है वजह? अर्थशास्त्रियों ने समझाया
BS

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगले सप्ताह चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर रीपो में 0.25 फीसदी की और बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, 2023-24 की तीसरी तिमाही के अंत में दरों में कमी करने का निर्णय लिया जा सकता है। एक्सिस बैंक के अर्थशास्त्रियों ने बुधवार को यह कहा।

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक तीन से छह अप्रैल तक होगी। बैठक के नतीजों की घोषणा छह अप्रैल को होगी। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, RBI के अधिकारियों ने मंगलवार को अर्थशास्त्रियों से मुलाकात की जिन्होंने केंद्रीय बैंक को दरों में 0.25 फीसदी की वृद्धि करने का सुझाव दिया।

RBI ने महंगाई को काबू में करने के लिए मई, 2022 से नीतिगत दर रीपो में 2.5 फीसदी की वृद्धि की है। एक्सिस बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री सौगात भट्टाचार्य ने कहा कि दरों में वृद्धि करने से अड़ियल मूल महंगाई को काबू में लाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा, ‘मेरा अनुमान है कि दरें और 0.25 फीसदी तक बढ़ाई जा सकती हैं।’ भट्टाचार्य ने कहा कि वृद्धि में नरमी नजर आ रही है, इसके अलावा महंगाई के कुछ घटने से मौद्रिक नीति समिति (MPC) वित्त वर्ष 2023-24 की तीसरी तिमाही के अंत तक दरों में कटौती कर सकती है।

‘उदार रुख को छोड़ने’ के RBI के रुझान में परिवर्तन करना अभी जल्दबाजी होगा, यह कहते हुए उन्होंने अनुमान जताया कि केंद्रीय बैंक जून समीक्षा में अपने रूख को ‘तटस्थ’ कर सकता है। उन्होंने कहा कि वृद्धि में नरमी के संकेत मिल रहे हैं जिससे 2023-24 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि छह फीसदी रह सकती है जो रिजर्व बैंक के 6.4 फीसदी के अनुमान से कहीं कम है।

उन्होंने आगे कहा कि 2023-24 की तीसरी तिमाही के अंत में जब वृद्धि में नरमी और स्पष्ट हो जाएगी, महंगाई घटकर 5-5.50 फीसदी पर आ जाएगी तब RBI दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है। इसके नतीजतन 2023-24 के अंत में प्रमुख नीतिगत दर 6.50 फीसदी पर होगी, यह वही स्तर होगा जो वित्त वर्ष के आरंभ में था।

भट्टाचार्य ने कहा कि वैश्विक स्तर पर समूचे आर्थिक माहौल में अनिश्चितताएं बनी हुई हैं और अर्थव्यवस्था के इतिहास में इस तरह का दौर पहले कभी नहीं देखा गया। हालांकि अच्छी बात यह है कि अमेरिका और यूरोप में सभी प्रमुख आर्थिक संकेतकों में सुधार हो रहा है।

First Published - March 29, 2023 | 7:37 PM IST

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