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Rupee Fall: रुपये पर बढ़ा दबाव, 100 प्रति डॉलर पहुंचने की चर्चा तेज

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हाल के दिनों में रुपये में गिरावट काफी तेज रही है। पहले रुपया 95 प्रति डॉलर के नीचे गया, फिर 96 के पार निकला और अब 97 के करीब पहुंच चुका है

Last Updated- May 20, 2026 | 3:41 PM IST
Indian Rupee

भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है और अब पहली बार ऐसी आशंका जताई जा रही है कि यह 100 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। दुनिया की कई बड़ी निवेश कंपनियों और बैंकों ने माना है कि अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव लंबा चला और कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं, तो रुपये पर दबाव और गहरा सकता है।

Gamma Asset Management के ग्लोबल मैक्रो पोर्टफोलियो मैनेजर राजीव डी मेलो का कहना है कि 100 प्रति डॉलर का स्तर अब निवेशकों के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक स्तर बनता जा रहा है। अगर तेल की कीमतों में एक और उछाल आता है, तो रुपया इस स्तर तक पहुंच सकता है।

महंगे तेल ने बढ़ाई भारत की मुश्किल

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ जाता है। तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं और इसी वजह से रुपये की कीमत कमजोर होने लगती है।

Aberdeen Investments के उभरते बाजार ऋण प्रमुख एडविन गुटिरेज का कहना है कि उनकी कंपनी पहले से मानकर चल रही थी कि ईरान संकट जल्दी खत्म नहीं होगा और इसी वजह से तेल लंबे समय तक महंगा बना रह सकता है। उनके मुताबिक यह स्थिति भारत के लिए नकारात्मक है क्योंकि महंगा तेल सीधे रुपये पर दबाव डालता है।

हाल के दिनों में रुपये में गिरावट काफी तेज रही है। पहले रुपया 95 प्रति डॉलर के नीचे गया, फिर 96 के पार निकला और अब 97 के करीब पहुंच चुका है। बुधवार को हालात ऐसे बन गए कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI को बाजार में दखल देना पड़ा ताकि रुपये की गिरावट को कुछ हद तक रोका जा सके।

ट्रेडर्स का कहना है कि अगर RBI बीच में नहीं आता तो रुपया और तेजी से टूट सकता था। इस साल अब तक भारतीय मुद्रा 7 फीसदी से ज्यादा कमजोर हो चुकी है, जबकि RBI आमतौर पर 3 से 4 फीसदी सालाना गिरावट को सामान्य मानता है।

Also Read: UN ने घटाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, फिर भी दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्थाओं में शामिल

विदेशी निवेशकों की बढ़ी चिंता

रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई है। अगर वे भारतीय शेयर बाजार या बॉन्ड मार्केट में निवेश करते हैं और बाद में रुपया तेजी से गिर जाता है, तो उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाता है। यही वजह है कि 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 23 अरब डॉलर निकाल लिए हैं।

MetLife Investment Management के पोर्टफोलियो मैनेजर एंडर्स फेर्गेमैन का कहना है कि अगर रुपया 100 के करीब पहुंचता है तो निवेशकों के लिए जोखिम और बढ़ जाएगा। उनके मुताबिक ऐसी स्थिति में निवेशकों को भारत में निवेश बनाए रखने के लिए ज्यादा रिटर्न की जरूरत होगी।

बड़े बैंक और फंड्स भी डरे

अब कई बड़े बैंक और ग्लोबल फंड्स ने रुपये को लेकर अपने अनुमान बदल दिए हैं। Kotak Mahindra Bank को लगता है कि रुपया 99 तक जा सकता है। Citigroup ने 98 का अनुमान दिया है, जबकि DBS Bank ने कहा है कि रुपया 100 तक भी पहुंच सकता है।

ANZ Bank ने भी साल के अंत तक रुपये के 97.5 तक कमजोर होने का अनुमान लगाया है। वहीं HSBC ने अपने पुराने अनुमान को घटाकर 95.5 कर दिया है।

Gamma Asset के राजीव डी मेलो का कहना है कि निवेशक अब लगातार इस बात पर नजर रख रहे हैं कि तेल की कीमतें कहां तक जाती हैं, क्योंकि यही सबसे बड़ा फैक्टर है जो रुपये की दिशा तय करेगा।

RBI क्या करेगा, इस पर टिकी नजर

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर रुपया 100 के करीब पहुंचता है तो RBI क्या करेगा। फिलहाल RBI लगातार बाजार पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा है। हालांकि RBI पहले ही साफ कर चुका है कि उसका मकसद किसी एक खास स्तर को बचाना नहीं, बल्कि बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकना है। लेकिन निवेशकों का मानना है कि अगर रुपया बहुत तेजी से गिरता है तो RBI को ज्यादा आक्रामक तरीके से दखल देना पड़ सकता है।

आम लोगों पर भी पड़ेगा असर

रुपये की कमजोरी का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। अगर रुपया और गिरता है तो विदेश से आने वाला सामान महंगा हो जाएगा। पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, मशीनरी और कई जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

महंगा तेल और कमजोर रुपया मिलकर महंगाई को और बढ़ा सकते हैं। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। यही वजह है कि सरकार और RBI दोनों के लिए आने वाले महीने काफी चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।

क्या 100 प्रति डॉलर सच में संभव है?

Amundi Investment Institute की ग्लोबल हेड ऑफ मैक्रोइकोनॉमिक्स एलेसिया बेरार्डी का मानना है कि एशियाई मुद्राएं काफी सस्ती हो चुकी हैं और आगे चलकर इनमें सुधार देखने को मिल सकता है। उनके मुताबिक रुपये में रिकवरी की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

लेकिन फिलहाल बाजार में डर ज्यादा है। अगर युद्ध लंबा चला, तेल महंगा बना रहा और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही, तो रुपया पहली बार 100 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। अब सबकी नजर इसी बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में तेल बाजार, डॉलर और RBI का अगला कदम क्या रहता है। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)

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First Published - May 20, 2026 | 3:33 PM IST

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