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Rupee Record Low: रुपये में बड़ी गिरावट, डॉलर के मुकाबले पहली बार 96.89 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा

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रुपये पर सबसे ज्यादा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है

Last Updated- May 20, 2026 | 10:47 AM IST
Indian rupee

भारतीय रुपये में लगातार गिरावट जारी है। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपये ने पहली बार 96 के स्तर को पार किया और शुरुआती कारोबार में 96.89 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया। मंगलवार को रुपया 96.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जबकि बुधवार को इसकी शुरुआत 96.86 के स्तर पर हुई। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में रुपया करीब 1 रुपये तक कमजोर हो चुका है।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव

रुपये पर सबसे ज्यादा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव बढ़ जाता है।

स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज को लेकर बढ़ी चिंता

बाजार में सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज को लेकर बनी हुई है। यह दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता है, जहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। अगर इस रास्ते में किसी तरह की रुकावट आती है, तो दुनियाभर में तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी डर से तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है और वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ रही है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक तनाव का असर

रुपये की कमजोरी की दूसरी बड़ी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता है। निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ जा रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है। डॉलर मजबूत होने का सीधा असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ता है। भारतीय रुपया भी इसी दबाव का सामना कर रहा है।

पहले भी तेजी से बढ़ा था कच्चा तेल

इससे पहले 30 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। उस दिन तेल की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की तेजी देखी गई थी। वहीं 9 मार्च को भी पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 27 प्रतिशत तक उछलकर 119 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था।

महंगाई बढ़ने की चिंता

रुपये में कमजोरी और तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए महंगाई का खतरा बढ़ा सकती हैं। तेल महंगा होने से पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार और रिजर्व बैंक दोनों के सामने चुनौती बढ़ सकती है।

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First Published - May 20, 2026 | 10:27 AM IST

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