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तेल कीमतों और वैश्विक दबाव से रुपया टूटा, 97 प्रति डॉलर के करीब पहुंचा

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कच्चे तेल की महंगी कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता के बीच रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि आरबीआई को बाजार में दखल देना पड़ा।

Last Updated- May 21, 2026 | 8:41 AM IST
rupees

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में इजाफा और वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति से रुपये पर दबाव बना हुआ है और डॉलर के मुकाबले आज यह नए निचले स्तर पर आ गया। इस बीच महंगाई की चिंता के चलते 30 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 2007 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

डीलरों ने बताया कि रुपये के 96.96 प्रति डॉलर पर पहुंचने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाजिर बाजार में दखल दिया जिससे यह 97 के स्तर को पार नहीं कर पाया। बाजार बंद होने के बाद केंद्रीय बैंक ने 5 अरब डॉलर के डॉलर-रुपया स्वैप की घोषणा की। इस कदम का मकसद हाजिर बाजार में डॉलर की बिक्री के असर को कम करने के लिए रुपये की स्थायी तरलता को बढ़ाना था।

कारोबार की समाप्ति पर रुपया 96.83 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर बंद हुआ। मंगलवार को रुपया 96.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। फरवरी के आखिर में ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से रुपये में 6 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘जोखिम से बचने और सुरक्षित निवेश की तलाश में प्रमुख मुद्राओं और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की खरीदारी जारी रही। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया निचले स्तर पर बना रहा।’

2026 में अभी तक डॉलर के मुकाबले रुपये में 7.2 फीसदी की गिरावट आई है और सभी एशियाई मुद्राओं में इसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। इसके साथ ही रुपया चीनी युआन, ब्रिटिश पाउंड और यूरो जैसी मुद्राओं के मुकाबले भी कमजोर हुआ है। असल में रुपया युआन, यूएई दिरहम और सिंगापुर डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। हाल ही में ब्रिटिश पाउंड और यूरो के मुकाबले भी यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।

रुपये पर पड़ रहे दबाव का असर घरेलू ऋण बाजार पर भी दिख रहा है। साप्ताहिक नीलामी में एक साल के ट्रेजरी बिल की यील्ड बढ़कर 12 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि ट्रेडर अब इस संभावना को ध्यान में रखना शुरू कर रहे हैं कि यदि बाहरी दबाव बने रहते हैं, तो लिक्विडिटी की स्थिति और सख्त हो सकती है या ब्याज दरों में बदलाव किया जा सकता है।

दूसरी ओर डीलरों ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तकनीकी खरीदारी के चलते बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 3 आधार अंक नरम होकर 7.08 फीसदी रही।

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First Published - May 21, 2026 | 8:41 AM IST

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