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शिपबिल्डिंग और मरीन सेक्टर को तगड़ा बूस्ट, मोदी सरकार ने ₹69,725 करोड़ के पैकेज को दी मंजूरी

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भारत की समुद्री परंपरा बहुत पुरानी और समृद्ध है। सदियों से भारत समुद्र के रास्ते दुनिया से जुड़ा रहा है। आज भी समुद्री क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

Last Updated- September 24, 2025 | 4:44 PM IST
maritime development

केंद्र सरकार ने बुधवार (24 सितंबर) को भारत के शिपबिल्डिंग और समुद्री सेक्टर को नया जोश देने के लिए 69,725 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दे दी। सरकार का मानना है कि यह सेक्टर रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

बयान के मुताबिक, यह पैकेज चार स्तंभों पर आधारित है। घरेलू क्षमता मजबूत करना, लॉन्ग टर्म फाइनेंसिंग को बेहतर बनाना, ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड शिपयार्ड की ग्रोथ और टेक्निकाल स्किल एंड कानून, टैक्स और नीतिगत सुधारों को बढ़ावा देना।

इस पैकेज के तहत शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (SBFAS) को 31 मार्च 2036 तक बढ़ाया गया है। इसके लिए 24,736 करोड़ रुपये का फंड रखा गया है। इस योजना में शिपब्रेकिंग क्रेडिट नोट के लिए 4,001 करोड़ रुपये का अलग प्रावधान किया गया है। साथ ही, नेशनल शिपबिल्डिंग मिशन बनाया जाएगा जो सभी पहलों की निगरानी करेगा।

इसके अलावा, सरकार ने मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (MDF) को भी मंजूरी दे दी है। इसका कुल फंड 25,000 करोड़ रुपये होगा। इसमें से 20,000 रुपये करोड़ का मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड होगा। इसमें 49 फीसदी भागीदारी केंद्र सरकार की होगी। 5,000 करोड़ रुपये का इंटरेस्ट इंसेंटिव फंड भी बनाया जाएगा ताकि कर्ज की लागत घटे और प्रोजेक्ट्स की फाइनेंशियल स्थिति मजबूत हो।

शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम को भी मंजूरी

सरकार ने शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SbDS) को भी मंजूरी दी है। इसके लिए 19,989 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान रखा गया है। इसका लक्ष्य है घरेलू शिपबिल्डिंग क्षमता को हर साल 45 लाख ग्रॉस टनेज तक बढ़ाना।

यह योजना मेगा शिपबिल्डिंग क्लस्टर, इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार और इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के तहत इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर की स्थापना को भी समर्थन देगी। साथ ही, इसमें इंश्योरेंस और रिस्क कवरेज भी शामिल होगा।

सरकार ने क्या कहा

सरकार का कहना है कि इससे राष्ट्रीय, एनर्जी और खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी। यह सप्लाई चेन और समुद्री मार्गों को अधिक लचीला बनाएगा। यह कदम भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता और आत्मनिर्भ भरता के विजन को आगे बढ़ाएगा। साथ ही, भारत को वैश्विक शिपिंग और शिपबिल्डिंग का प्रतिस्पर्धी केंद्र बनाने में मदद करेगा।

सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए बड़े जहाजों को इन्फ्रास्ट्रक्चर की मास्टर लिस्ट में शामिल किया है। ऐसे कॉमर्शियल वेसल्स, जिनका ग्रॉस टनेज 10,000 या उससे अधिक है, अगर वे भारतीय स्वामित्व और भारतीय झंडे के अंतर्गत हैं, तो उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस मिलेगा। साथ ही, 1,500 टनेज या अधिक क्षमता वाले जहाज, जो भारत में बने हैं और भारतीय स्वामित्व में हैं, उन्हें भी यह दर्जा मिलेगा।

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समुद्री क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़

भारत की समुद्री परंपरा बहुत पुरानी और समृद्ध है। सदियों से भारत समुद्र के रास्ते दुनिया से जुड़ा रहा है। आज भी समुद्री क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह 95 फीसदी व्यापार (वॉल्यूम के अनुसार) और 70 प्रतिशत व्यापार (मूल्य के अनुसार) को सपोर्ट करता है।

इस सेक्टर के केंद्र में है शिपबिल्डिंग, जिसे ‘मदर ऑफ हेवी इंजीनियरिंग’ कहा जाता है। यह नौकरियां, निवेश, राष्ट्रीय सुरक्षा, और एनर्जी और व्यापार सप्लाई चेन की मजबूती में अहम भूमिका निभाता है।

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First Published - September 24, 2025 | 4:10 PM IST

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