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मुद्रास्फीति नियंत्रण में, खराब होने वाली वस्तुओं की कीमतों पर सरकार की नज़र: सीतारमण

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भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल-दिसंबर, 2022 में औसतन 6.8 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2023 की इसी अवधि में 5.5 प्रतिशत रह गई है।

Last Updated- February 06, 2024 | 8:15 PM IST
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि विशेषकर जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के चलते मुद्रास्फीति संतोषजनक सीमा के भीतर आ गई है।

राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) प्याज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए गामा किरणों के माध्यम से इसे नमीमुक्त करने पर सरकार के साथ काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार उन कठिनाइयों से अवगत है, जो खराब होने वाली वस्तुओं की कमी के कारण उत्पन्न होती हैं, जो भारत में नहीं उगाई जाती हैं। समिति समय-समय पर बैठती है और समीक्षा करती है, और प्रयासों से जमीन पर पता चला है कि मुद्रास्फीति अब सहनीय सीमा के भीतर है।’’

भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल-दिसंबर, 2022 में औसतन 6.8 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2023 की इसी अवधि में 5.5 प्रतिशत रह गई है। खुदरा मुद्रास्फीति अब स्थिर है और चार प्रतिशत (दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ) के संतोषजनक स्तर पर है। वित्त मंत्री ने कहा कि प्याज की कीमतों में अस्थिरता को रोकने के लिए सरकार ने इसके बफर आकार को वर्ष 2020-21 के एक लाख टन से बढ़ाकर वर्ष 2023-24 में सात लाख टन कर दिया है।

तीन फरवरी, 2024 तक कुल 6.32 लाख टन प्याज की खरीद की गई और 3.96 लाख टन ग्रेड-ए प्याज खुदरा बिक्री, ई-नाम नीलामी और थोक बिक्री के माध्यम से जारी किया गया। उन्होंने कहा, ”मौजूदा समय में कदम उठाए जा रहे हैं ताकि प्याज जैसी बहुत जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं के संरक्षण स्तर में सुधार किया जा सके।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने विशेष रूप से जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं की आपूर्ति में कमी को पूरा करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सीतारमण ने कहा कि भारत ने कैलेंडर वर्ष 2023 में 8.79 लाख टन तुअर दाल और 15.14 लाख टन मसूर दाल का आयात किया है।

इसी तरह, देश ने अन्य दालों का आयात किया और उन्हें बाजार में उतारा। सीतारमण ने कहा, ‘‘चूंकि हम देश में पर्याप्त दालें नहीं उगाते हैं और आपूर्ति में कमी के कारण, दालों की कीमतों में आम तौर पर उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिसके लिए फसल अनुमानों का विश्लेषण करके हम आयात के लिए समझौता करना शुरू करते हैं।’’ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति- दिसंबर 2023 में 5.69 प्रतिशत पर थी।

 

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First Published - February 6, 2024 | 8:15 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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