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एसऐंडपी ने भारत की वृद्धि दर बढ़ाकर 7.1% की, लेकिन 2026 के मुकाबले रफ्तार धीमी रहने का अनुमान

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ऊर्जा की किल्लत और महंगाई की स्थिति में वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी वृद्धि 30 से 40 आधार अंक कम हो सकती है और साल के अंत तक यह 50 से 70 आधार अंक तक बढ़ सकती है।

Last Updated- March 26, 2026 | 9:21 AM IST
S&P India Growth Forecast

वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत का वृद्धि दर अनुमान 40 आधार अंक बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया। हालांकि एजेंसी ने कहा कि विकास की गति वित्त वर्ष 2026 की तुलना में थोड़ी धीमी पड़ सकती है।

‘2026 की दूसरी तिमाही में एशिया-प्रशांत का आर्थिक परिदृश्य’ रिपोर्ट में रेटिंग एजेंसी ने कहा कि स्थिर निजी उपभोग, निजी निवेश और निर्यात मुख्य रूप से वृद्धि को बढ़ावा देंगे। हालांकि वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026 की तुलना में 50 आधार अंक कम रहने की संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हमें वित्त वर्ष 2026 में 7.6 फीसदी की तुलना में मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान है।’ रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि दर अनुमान को 0.4 फीसदी बढ़ाकर 7.6 फीसदी कर दिया है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर अपनी नवीनतम तिमाही आर्थिक टिप्पणी में एसऐंडपी ने कहा कि नए भू-राजनीतिक तनाव और लगातार बने व्यापार संबंधी अनिश्चितता के जोखिम से भारत में महंगाई, व्यापार एवं पूंजी प्रवाह पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं ताकि सब्सिडी लागत को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि कीमतों का पूरा असर उपभोक्ताओं तक पहुंचने के आसार नहीं हैं।

ऊर्जा की किल्लत और महंगाई की स्थिति में वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी वृद्धि 30 से 40 आधार अंक कम हो सकती है और साल के अंत तक यह 50 से 70 आधार अंक तक बढ़ सकती है। इसमें कहा गया है कि ईंधन और पेट्रोलियम उत्पादों की कमी के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।

नवंबर 2025 में एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने अनुमान लगाया था कि मजबूत घरेलू उपभोग, कर कटौती तथा मौद्रिक नीति में नरमी जैसे सहायक नीतिगत उपायों से भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026 में 6.5 फीसदी और वित्त वर्ष 2027 में 6.7 फीसदी बढ़ेगी। हालांकि एजेंसी ने कहा था कि बाहरी बाधाएं, विशेष रूप से अमेरिकी शुल्क और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताएं निर्यात उन्मुख क्षेत्रों पर दबाव डाल सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में औसत उपभोक्ता मुद्रास्फीति लगभग 10 आधार अंक अधिक होगी।

यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो सरकार सब्सिडी के बोझ को सीमित करने के लिए ईंधन की कीमतों में वृद्धि की अनुमति दे सकते हैं। हालांकि ग्राहकों पर बढ़ी लागत का पूरा बोझ डाले जाने की संभावना नहीं है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि ईंधन की महंगाई के कारण मुद्रास्फीति बढ़ती है तो भारत का केंद्रीय बैंक साल की दूसरी छमाही में रीपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘वित्त वर्ष 2027 में मुद्रास्फीति बढ़कर 4.3 फीसदी होने का अनुमान है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें संभवतः व्यापार घाटे को बढ़ाएंगी लेकिन सेवाओं के व्यापार में बेहतर अधिशेष चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने में मदद करेगा।’

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First Published - March 26, 2026 | 9:21 AM IST

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