facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

GST इनपुट क्रेडिट पर सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार

Advertisement

सर्वोच्च न्यायालय ने सनक्राफ्ट एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ जीएसटी विभाग की याचिका को खारिज कर दिया।

Last Updated- December 18, 2023 | 10:34 PM IST
Supreme Court

उच्चतम न्यायालय ने इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आदेश में कहा था कि उचित जांच के बगैर खरीदार को इस आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट देने से इनकार नहीं किया जा सकता है कि विक्रेता ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कर का भुगतान नहीं किया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ प्राधिकारियों ने शीर्ष न्यायालय में अपील की थी।

विशेषज्ञ इस मामले पर बंटे हुए हैं कि ऐसे ही अन्य मामलों के लिए शीर्ष न्यायालय का फैसला मिसाल होगा। दरअसल सर्वोच्च न्यायालय ने कर की राशि कम होने के कारण इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, ‘इस मामले के तथ्यों और स्थितियों के मद्देनजर मांग कम है और हम इन मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं।’ सर्वोच्च न्यायालय ने सनक्राफ्ट एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ जीएसटी विभाग की याचिका को खारिज कर दिया।

इस मामले में ब्याज और दंड के साथ 6,50,511 रुपये की कर राशि शामिल थी। विभाग का तर्क यह था कि आपूर्तिकर्ता का जीएसटी अदा करना संबंधित फार्म में उजागर नहीं हुआ। लिहाजा आपूर्तिकर्ता और कंपनी के आईटीसी दावे के फार्म में विसंगतियां थीं।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आदेश में कहा था कि जीएसटी विभाग कंपनी को इस आधार पर आईटीसी देने से इनकार नहीं कर सकता है कि उसके आपूर्तिकर्ता ने कर का भुगतान नहीं किया है जब तक कि ऐसी स्थिति न हो कि विभाग आपूर्तिकर्ता से कर एकत्र नहीं कर सके जैसे कि उसका पता नहीं लगाया जा सके।

Advertisement
First Published - December 18, 2023 | 10:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement