facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

भारत-अमेरिका बॉन्ड यील्ड में फासला घटा, रुपये पर बढ़ा दबाव

Advertisement

पिछले एक साल के दौरान भारत और अमेरिका के 10 वर्षों की अवधि के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड में अंतर (यील्ड स्प्रेड) 70 आधार अंक होकर सोमवार को 1.92 फीसदी अंक रह गया।

Last Updated- June 24, 2025 | 11:19 PM IST
Rupee vs Dollar

हाल के वर्षों में भारत में ब्याज दरें नीचे रहने से रुपये की सेहत पर असर पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और भारत में ब्याज दरों में अंतर लगातार घटता गया जिसकी वजह से डॉलर की तुलना में रुपये में निरंतर गिरावट आई है। पिछले एक साल के दौरान भारत और अमेरिका के 10 वर्षों की अवधि के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड में अंतर (यील्ड स्प्रेड) 70 आधार अंक होकर सोमवार को 1.92 फीसदी अंक रह गया। पिछले साल जून के अंत में यील्ड स्प्रेड 2.61 फीसदी अंक था। इसी अवधि के दौरान डॉलर की तुलना में रुपया 83.73 के स्तर से 3 फीसदी कमजोर होकर सोमवार को 85.97 तक चला गया।

यील्ड स्प्रेड और रुपया-डॉलर विनिमय दर के बीच उल्टा संबंध कोई नई बात नहीं है। भारत के 10 वर्ष की अवधि बनाम अमेरिका के 10 वर्ष की अवधि के बॉन्ड और रुपया-डॉलर विनिमय दर में नकारात्मक संबंध रहा है।

पिछले 25 वर्षों के दौरान भारत और अमेरिका के बॉन्ड की यील्ड में अंतर जब भी कम हुआ है उस दौरान रुपये में कमजोरी दिखी है। इसके उलट यील्ड में अंतर बढ़ने के समय डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ है। उदाहरण के लिए पिछले 10 वर्ष की अवधि के दौरान भारत और अमेरिका के 10 वर्षों की अवधि के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड में अंतर जून 2015 में दर्ज 5.51 फीसदी अंक से लगभग 360 आधार अंक कम होकर अब 1.92 फीसदी अंक रह गया है। इसी अवधि के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 63.60 के स्तर से 27 फीसदी कमजोर होकर सोमवार को 86.86 पर चला गया था।

इसके उलट जब अमेरिका की तुलना में भारत में बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ी और यील्ड में अंतर अधिक हो गया तो रुपया वर्ष 2004 में मजबूत हो गया और यह सिलसिला 2008 तक कायम रहा। यील्ड स्प्रेड अक्टूबर 2003 के 0.8 फीसदी अंक के स्तर से बढ़ कर मार्च 2008 में लगभग 4.5 फीसदी अंक के स्तर पर पहुंच गया। इसी अवधि में रुपया डॉलर के मुकाबले 46 से मजबूत होकर 40 के स्तर पर पहुंच गया।

विशेषज्ञ इस परस्पर नकारात्मक संबंध के लिए पूंजीगत प्रवाह पर यील्ड स्प्रेड के असर को जिम्मेदार मानते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस कहते हैं, ‘भारत और अमेरिका के बॉन्ड बाजारों में यील्ड में तुलनात्मक रूप से कम अंतर के कारण भारतीय बाजार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए दमदार नहीं रह जाते हैं। इससे भारत के बॉन्ड बाजार में एफपीआई निवेश घट जाता है। यील्ड स्प्रेड अधिक रहने पर ठीक इसका उल्टा होता है। विदेशी पूंजी कम आने से रुपया दबाव में आ जाता है क्योंकि भारत लगातार चालू खाते के घाटे से जूझता रहता है।’

सबनवीस के अनुसार अमेरिकी डॉलर में हालिया कमजोरी से रुपया सुधरा था मगर पिछले दो महीने में यील्ड में अंतर कम होने से रुपया फिर कमजोर हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मुकाबले रिजर्व बैंक द्वारा दरों में तेजी से कमी करना भी यील्ड में अंतर घटने का एक बड़ा कारण है। फेडरल रिजर्व ने मुद्रास्फीति को देखते हुए नीतिगत दर स्थिर रखी है जबकि आरबीआई मौजूदा कैलेंडर वर्ष में अब तक रीपो दर में 100 आधार अंक की कटौती कर चुका है।

Advertisement
First Published - June 24, 2025 | 11:08 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement