facebookmetapixel
Advertisement
M&M का EV प्लान! सिर्फ नई कार नहीं, पूरी फैक्ट्री बदल रही कंपनीराज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिका

विश्व को संरक्षणवाद से बचने की जरूरत: वाणिज्य सचिव सुनील बड़थ्वाल

Advertisement

सुनील बड़थ्वाल ने व्यापार बढ़ाने के लिए एमआरए पर जोर दिया, आयात-निर्यात संतुलन को दी अहमियत

Last Updated- December 12, 2024 | 10:48 PM IST
Commerce Secretary Sunil Barthwal

वाणिज्य सचिव सुनील बड़थ्वाल ने गुरुवार को कहा कि दुनिया को ऐसे किसी भी तरह के संरक्षणवाद से बचने की जरूरत है जिनसे व्यापार में बाधा डालने वाली ज्यादा रुकावटें खड़ी होती हों। उन्होंने व्यापार को बढ़ावा देने के लिेए पारस्परिक मान्यता समझौते (एमआरए) करने का आह्वान किया। उन्होंने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘मेरे विचार से दुनिया को ऐसे किसी भी तरीके से बचने की जरूरत है जो अधिक व्यापार बाधाएं, तकनीकी अवरोध और व्यापारिक रुकावटें खड़ी करते हों।’

बड़थ्वाल की टिप्पणी अमेरिका की व्यापार नीति के अधिक संरक्षणवादी होने के संदर्भ में आई है। इसके अलावा नए सिरे से व्यापार युद्ध का खतरा भी पैदा हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक भारत का निर्यात निरंतर बढ़ता रहता है तब तक भारत को आयात के बारे में ‘अत्यधिक चिंता’ नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को ‘व्यापारवादी दृष्टिकोण’ से बचना चाहिए। ‘व्यापारवादी दृष्टिकोण’ का अर्थ यह है कि व्यापार संतुलन और बढ़ते आयात के बारे में चिंता नहीं करना।

सचिव ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और ऐसे में यदि विश्व की अर्थव्यवस्था 3-3.5 प्रतिशत की देर से बढ़ रही है तो स्वाभाविक तौर पर भारत को अधिक आयात, अधिक खपत की जरूरत होगी। मैं आपको यह बात स्पष्ट रूप से बताना चाहता हूं कि निर्यात के लिए आयात भी काफी अहम है। उन्होंने कहा कि कच्चे माल और माध्यमिक उत्पादों का आयात जरूरी है।

Advertisement
First Published - December 12, 2024 | 10:48 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement