facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Trump Tariff: प्राकृतिक हीरा पॉलिशिंग उद्योग में हो सकती है 28-30% की गिरावट- CRISIL 

Advertisement

चालू वित्त वर्ष के पहले 4 महीनों में अमेरिका की हिस्सेदारी 35% से घटकर 24% रह गई है

Last Updated- August 28, 2025 | 7:27 PM IST
Diamond sector

अमेरिका द्वारा भारतीय हीरे के निर्यात पर 50% का भारी शुल्क लगाए जाने के बाद, भारत का प्राकृतिक हीरा पॉलिशिंग उद्योग चालू वित्त वर्ष (2025-26) में 28-30% की गिरावट के साथ केवल 12.5 अरब डॉलर के राजस्व तक सिमट सकता है। यह जानकारी क्रिसिल रेटिंग्स (CRISIL Ratings) की ताजा रिपोर्ट में दी गई है।

बुधवार से अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25% शुल्क लागू कर दिया है। यह कदम रूस से तेल खरीदने पर भारत को दंडित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे पहले अप्रैल 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25% जवाबी शुल्क लगाया था। यानी कुल मिलाकर अब 50% शुल्क प्रभावी हो गया है।

क्रिसिल के मुताबिक, यह झटका उस समय आया है जब पिछले तीन वित्त वर्षों में हीरे के मूल्य और बिक्री में गिरावट के चलते हीरा पॉलिशिंग उद्योग में पहले ही लगभग 40% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। अमेरिका, चीन में मांग में कमी और लेबोरेटरी में बने हीरों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा से भारतीय उद्योग पर पहले से ही दबाव बना हुआ था।

उद्योग के सामने प्रमुख चुनौतियाँ:

  • हीरा पॉलिशिंग उद्योग के मार्जिन पहले से ही कम हैं, जिससे अतिरिक्त शुल्क का बोझ सहन करना कठिन है।
  • मांग में कमी के चलते शुल्क का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना भी मुश्किल हो गया है।
  • इससे ऑपरेटिंग मार्जिन 50-100 बेसिस प्वाइंट तक घट सकता है, जो अब 3.5-4% तक रह सकता है।

अप्रैल 2025 में 10% शुल्क लगने के बाद ही अमेरिका में प्राकृतिक हीरे के निर्यात में गिरावट शुरू हो गई थी। चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में अमेरिका की हिस्सेदारी 35% से घटकर 24% रह गई है। हालांकि, त्योहारों की मांग को देखते हुए हीरा पॉलिशिंग कंपनियों ने जुलाई और अगस्त में उत्पादन बढ़ा दिया था, जिससे जुलाई में निर्यात में 18% की साल-दर-साल वृद्धि दर्ज हुई थी। लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है, क्योंकि लेब-ग्रो हीरे ने अमेरिका में 60% बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है। चीन की मांग भी कमजोर बनी हुई है।

Also Read | ट्रंप टैरिफ के बीच निर्यातकों को वित्त मंत्री का भरोसा, कहा- सरकार हर संभव मदद करेगी

रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही यूएई अब भारत का बड़ा निर्यात गंतव्य बनकर उभरा है (इसके हिस्से में अब 20% हिस्सेदारी है), लेकिन कुल राजस्व में गिरावट का जोखिम अभी भी अधिक है। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, उद्योग को इन तीन उपायों पर ध्यान देना होगा:

  1. घरेलू बाजार में बिक्री बढ़ाना 
  2. वैकल्पिक निर्यात बाजारों की तलाश
  3. व्यापारिक केंद्रों (जैसे यूएई) में पॉलिशिंग यूनिट लगाना, क्योंकि कम शुल्क वाले देशों के माध्यम से हीरों को दोबारा निर्यात करना व्यावहारिक विकल्प नहीं है।

क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, ऑपरेशन का स्केल घटने और मुनाफे पर दबाव से उद्योग की क्रेडिट प्रोफाइल पर असर पड़ेगा। हालांकि बाहरी कर्ज पर कम निर्भरता के चलते पूंजी संरचना स्थिर है, लेकिन फाइनेंशियल लीवरेज 0.7-0.8 गुना रहने का अनुमान है। इंटरेस्ट कवरेज रेशियो घटकर 2 हो सकता है, जो पिछले साल 2.3-2.5 के बीच था।

“भारत विश्व के 95% हीरों की पॉलिशिंग करता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां 2007 के बाद से सबसे कम राजस्व स्तर पर ला सकती हैं,” क्रिसिल के सीनियर डायरेक्टर राहुल गुहा ने कहा। भविष्य में प्राकृतिक हीरों की वैश्विक मांग, भू-राजनीतिक स्थितियां, और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में शुल्क नीति — ये सभी फैक्टर भारतीय हीरा उद्योग के लिए निर्णायक साबित होंगे।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

Advertisement
First Published - August 28, 2025 | 7:27 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement