भारत के व्यापार अधिकारियों ने शुक्रवार को संकेत दिए कि ब्रिटेन द्वारा स्टील आयात पर रोक लगाने के निर्णय के कारण दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू करने में देरी हो सकती है।
भारत ब्रिटेन व्यापार समझौते को लागू किए जाने के बारे में पूछे जाने पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, ‘हम उसे (भारत-ब्रिटेन एफटीए) लागू करने के बहुत करीब हैं। कुछ अड़चनें हैं। ब्रिटेन ने हाल ही में स्टील संबंधी उपाय किए हैं, जिन्हें भारत-ब्रिटेन समझौते पर बातचीत करते समय ध्यान में नहीं रखा गया था। हम व्यापार उपाय के लिए एक समाधान खोजने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं ताकि हम भारत-ब्रिटेन सीएटीए को परिचालन में ला सकें।’
दोनों पक्षों ने पिछले साल जुलाई में व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले महीने विश्वास व्यक्त किया था कि भारत-ब्रिटेन व्यापार सौदा मई में प्रभावी होगा।
अग्रवाल ने कहा कि ब्रिटेन के हाल के इस्पात संरक्षण उपाय से उत्पन्न मुद्दों से निपटने के लिए भारत और ब्रिटेन ‘विशिष्ट एवं रचनात्मक समाधान’ तलाश रहे हैं ताकि प्रस्तावित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) को जल्द लागू किया जा सके। दोनों देशों ने 24 जुलाई 2025 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
ब्रिटेन एक जुलाई 2026 से शुल्क-मुक्त इस्पात आयात पर सीमा लागू करेगा जिससे कुल कोटा मात्रा इस्पात संरक्षण उपाय की तुलना में 60 प्रतिशत कम हो जाएगी। इन स्तरों से अधिक आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। यह उपाय उन इस्पात उत्पादों के आयात पर लागू होगा जिनका उत्पादन ब्रिटेन में भी किया जा सकता है।
2025-26 में, भारत से ब्रिटेन को होने वाले लोहे, इस्पात और उनसे बने उत्पादों का निर्यात 89.34 करोड़ डॉलर रहा, जो ब्रिटेन को होने वाले कुल 13.4 अरब डॉलर के माल निर्यात में एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
अग्रवाल ने कहा कि अमेरिकी दल के अगले महीने भारत आने की संभावना है। हालांकि अभी उनके आने की तारीख तय नहीं हुई है।
भारतीय दल अप्रैल में वॉशिंगटन गया था, जहां अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक कर अंतरिम समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने एवं व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के तहत वार्ताओं को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई थी।
सचिव ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिकी दल जल्द आएगा। इस महीने नहीं, शायद अगले महीने आएगा।’ उन्होंने कहा कि भारत, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है और इस पर उपयुक्त समय पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। साथ ही भारत धारा-301 के तहत जांच को लेकर भी अमेरिका से बातचीत कर रहा है।
भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को संयुक्त बयान जारी कर द्विपक्षीय रूप से लाभकारी व्यापार के लिए अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। बहरहाल अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में सभी जवाबी शुल्क को खारिज कर दिया, जिसे ट्रंप प्रशासन ने व्यापार समझौतों पर साझेदार देशों से बातचीत के लिए प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था।
उसके बाद अमेरिका ने इस साल 24 फरवरी को 150 दिन के लिए सभी आयातकों पर धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था। साथ ही उसने प्रमुख निर्यातकों के खिलाफ धारा 301 के तहत जांच भी शुरू कर दी थी, जो उनकी अतिरिक्त उत्पादन और श्रम मानकों को लेकर था। धारा 122 के तहत अधिकतम 150 दिन के लिए15 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है।
बीते वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अमेरिका को भारत का निर्यात 0.92 प्रतिशत बढ़कर 87.3 अरब डॉलर जबकि आयात 15.95 प्रतिशत की बढ़त के साथ 52.9 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। व्यापार अधिशेष 40.89 अरब डॉलर से घटकर 34.4 अरब डॉलर रहा।
भारत जल्द ही 25-27 मई को कोरिया के साथ बातचीत करेगा, ताकि 2010 में हुए व्यापार समझौते की समीक्षा की जा सके। दोनों देशों ने अप्रैल में ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ की समीक्षा और उसे बेहतर बनाने पर सहमति जताई थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। 2025 में दोनों पक्षों के बीच 27.18 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था, जिसमें भारत द्वारा किए गए 21.16 अरब डॉलर के आयात शामिल थे।
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