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वैश्विक व्यापार नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी? अमेरिका ने ‘मोस्ट-फेवर्ड नेशन’ पर उठाए गंभीर सवाल

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अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने WTO के 'मोस्ट-फेवर्ड नेशन' सिद्धांत को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसमें बड़े सुधार और वैश्विक व्यापार नियमों पर पुनर्विचार की मांग की है

Last Updated- March 24, 2026 | 10:58 PM IST
WTO
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) सुधार को लेकर दी गई एक रिपोर्ट में  अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने तर्क दिया है कि वैश्विक व्यापार नियम, विशेष रूप से मोस्ट-फेवर्ड नेशन (एमएफएन) सिद्धांत पर ‘पुनर्विचार’ करने की आवश्यकता है। यूएसटीआर का कहना है कि देश इनका पूरी तरह से व्यापार नियमों का पालन नहीं करते हैं जिसकी वजह से ये कमजोर हो रहे हैं। यह रिपोर्ट वैश्विक व्यापार निकाय के आगामी 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन से पहले आई है। 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 26 से 29 मार्च तक कैमरून में होने जा रहा है। 

वैश्विक व्यापार के नियमों के अनुसार एमएफएन सिद्धांत के पीछे मुख्य विचार गैर-भेदभाव या समान व्यवहार है। उदाहरण के लिए सभी व्यापारिक भागीदारों के लिए शुल्क कम रखकर समान  अवसर मुहैया कराया जाना इसमें शामिल है। इस सिद्धांत का अपवाद तब स्वीकार्य है जब द्विपक्षीय व्यापार समझौते या देशों के समूह के बीच व्यापार समझौते पर सहमति होती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हम दृढ़ता से सहमत हैं कि सुधार प्रक्रिया के तहत सदस्यों को इस पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है कि एमएफएन सिद्धांत अपने वर्तमान स्वरूप में कैसे कार्य करता है, और क्या यह वास्तव में खुलेपन और समान अवसर को बढ़ावा देता है या ‘यह एक ऐसी बेड़ी बन गया है जो यथास्थिति को मजबूत करती है और मुफ्त सवारी को सक्षम बनाती है’। हम इस बात पर भी दृढ़ता से सहमत हैं कि सदस्यों को एमएफएन और पारस्परिकता के बीच संबंध पर एक स्पष्ट बातचीत शुरू करने की आवश्यकता है।’ यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा और अनुचित व्यापार प्रथाओं का हवाला देते हुए तमाम देशों पर शुल्क लगा रहा है।  

इसमें कहा गया है कि अमेरिका ने दशकों से अपने शुल्क कम रखे और अर्थव्यवस्था खुली रखी, वहीं उसके व्यापारिक भागीदारों ने अमेरिकी निर्यात पर भारी शुल्क और गैर शुल्क बाधाएं लगाईं। नतीजतन, एमएफएन सिद्धांत लगातार भेदभावपूर्ण व्यापार प्रथाओं को रोकने और समान व्यवहार को बढ़ावा देने में विफल रहा है। 

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First Published - March 24, 2026 | 10:50 PM IST

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