केंद्र सरकार ने विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम, 2025 को आज अधिसूचित कर दिया है और इस योजना के लागू होने की तिथि से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्मा गांधी नरेगा), 2005 को निरस्त माना जाएगा। केंद्र सरकार ने वीबी-जी राम जी योजना को लेकर ‘अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)’ के जबाव जारी किए हैं। आईए जानते हैं वो कौन से प्रश्न हैं, जिनका जबाव लोग जानना चाहते हैं।
केंद्र सरकार ने विकसित भारत- रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) की गारंटी अधिनियम, 2025 की अधिसूचना आज जारी की है। इस अधिसूचना के मुताबिक यह योजना एक जुलाई से सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगी।
वीबी-जी राम जी योजना एक जुलाई से लागू होने के बाद मनरेगा निरस्त मानी जाएगी। हालांकि 30 जून तक मनरेगा के कार्य बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे। इन कार्यों को सुचारू रूप से स्थानांतरित किया जाएगा और यह सुनिश्चित करते हुए इन्हें पूरा करने की प्राथमिकता दी जाएगी कि सार्वजनिक परिसंपत्तियां अधूरी न रह जाएं और सामुदायिक लाभ जारी रहें।
वीबी-जी राम जी योजना को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद सभी राज्यों में एक साथ लागू किया जाएगा, यानी एक जुलाई से यह योजना सभी राज्यों में लागू होगी।
वीबी-जी राम जी योजना के तहत एक वित्त वर्ष में प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के रोजागार की गारंटी जाएगी। यह गारंटी उस ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य को दी जाएगी, जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं।
जी हां। राज्य सरकारों को इस अधिनियम के लागू होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप योजनाओं को अधिसूचित करना अनिवार्य है।
उभरती मांग के पैटर्न और जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों को पर्याप्त श्रम बजट उपलब्ध कराया गया है ताकि निर्बाध रोजगार के अवसर और समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
Also Read: VB-G RAM G: 1 जुलाई से देशभर में लागू होगा नया ग्रामीण रोजगार कानून, मनरेगा की लेगा जगह
जी हां। जहां चल रहे कार्य रोजगार की मांग को पूरा करने की दृष्टि से अपर्याप्त होंगे, वहां विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम की अनुसूची-I के अनुरूप कार्यों के संग्रह में से नए कार्य शुरू किए जा सकते हैं।
जी हां। जिन मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम जॉब कार्ड/श्रमिकों के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वे विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक वैध बने रहेंगे।
जिन ग्रामीण परिवारों के पास महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत जॉब कार्ड नहीं है, वे अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य के जरिए संबंधित ग्राम पंचायत को परिवार के सदस्यों के नाम, आयु और पते की जानकारी जमा करके ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करवाने के लिए पंजीकरण हेतु आवेदन कर सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के वयस्क सदस्य ग्राम पंचायत के जरिए रोजगार की मांग कर सकते हैं। आवेदन मौखिक रूप से, पूर्वोक्त प्रपत्र 6 के माध्यम से लिखित रूप में या डिजिटल माध्यमों से ग्राम पंचायत, कार्यक्रम अधिकारी या किसी भी अधिकृत व्यक्ति को किया जा सकता है।
आवेदन की तिथि से 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
आवेदन करने वाले पात्र को 15 दिन के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। रोजगार उपलब्ध न कराने पर मुबावजा दिया जाएगा। यह मुआवजा राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष के पहले तीस दिनों के लिए अधिसूचित मजदूरी दर के एक-चौथाई से कम नहीं और शेष अवधि के लिए अधिसूचित मजदूरी दर के आधे से कम नहीं का बेरोजगारी भत्ता देय होगा।
जी हां। इस अधिनियम की धारा 10 के प्रावधानों के अनुसार बढ़ी हुई मजदूरी दरें प्रदान की जाएंगी। इस अधिनियम के तहत नई मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी होने तक, महात्मा गांधी एनआरईजीए की मौजूदा मजदूरी दरें लागू रहेंगी।
मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या किसी भी स्थिति में हाजिरी सूची के बंद होने के बाद दो सप्ताह के भीतर किया जाएगा। मजदूरी का भुगतान बैंकों या डाकघरों में उनके व्यक्तिगत खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से किया जाता है।
यदि हाजिरी सूची के बंद होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है, तो मजदूरी चाहने वाले विलंब के लिए प्रति दिन बकाया मजदूरी के 0.05 प्रतिशत की दर से मुआवजे के हकदार होंगे।
Also Read: मजदूरों को समय पर भुगतान के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम, मनरेगा के लिए ₹17,744 करोड़ जारी
कार्यस्थलों पर उपस्थिति चेहरे की पहचान पर आधारित एक प्रणाली के माध्यम से दर्ज की जाएगी। हालांकि, सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, खराब या अनुपलब्ध नेटवर्क कनेक्टिविटी, तकनीकी समस्याएं, उपकरण संबंधी समस्याएं या अन्य असाधारण परिस्थितियों जैसे वास्तविक मामलों में अपवाद प्रबंधन प्रणाली भी उपलब्ध होगी।
जी हां। कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कार्यस्थल पर सुरक्षित पेयजल, बच्चों के लिए छाया एवं विश्राम के लिए स्थान और प्राथमिक चिकित्सा पेटी अवश्य होनी चाहिए।
बोआई और कटाई जैसे कृषि के पीक सीजन के दौरान पर्याप्त श्रम की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु राज्य सरकारें कृषि के पीक सीजन को कवर करने वाली एक अवधि को अधिसूचित करेंगी। इस अवधि के दौरान इस अधिनियम के तहत कोई कार्य नहीं किया जाएगा।
जहां तक संभव हो, आवेदक के गांव से 5 किलोमीटर के दायरे में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। यदि रोजगार इससे अधिक दूरी पर (लेकिन ब्लॉक के भीतर) उपलब्ध कराया जाता है, तो श्रमिकों को परिवहन और रहने-सहने के खर्चों के लिए मजदूरी दर का 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा।
जिला कलेक्टर या राज्य सरकार द्वारा नामित समकक्ष अधिकारी जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) के रूप में कार्य करेगा।
ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम अधिकारी के रूप में ब्लॉक विकास अधिकारी से नीचे दर्जे के अधिकारी की नियुक्ति नहीं की जाएगी।
इस योजना के कार्यान्वयन में ग्राम पंचायतों की केन्द्रीय भूमिका होगी, जिसमें परिवारों का पंजीकरण, रोजगार के लिए आवेदन प्राप्त करना, कार्यों का निष्पादन, योजना से संबंधित अभिलेखों का रखरखाव और विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (वीजीपीपी) की तैयारी आदि शामिल हैं।
जी नहीं, इस अधिनियम के तहत वित्तपोषित कार्यों के निष्पादन हेतु ठेकेदारों को नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
जी नहीं, सभी कार्य शारीरिक श्रम से किए जायेंगे और जहां तक संभव हो, श्रम को विस्थापित करने वाली मशीनों का उपयोग नहीं किया जाएगा।
निधि के बंटवारे का स्वरूप इस प्रकार है:
राज्यवार मानक आवंटन का निर्धारण केन्द्र सरकार द्वारा इस अधिनियम के तहत निर्धारित वस्तुनिष्ठ मापदंडों के आधार पर किया जाना प्रस्तावित है।
इस अधिनियम के तहत सामग्री घटक पर होने वाला व्यय जिला स्तर पर 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
प्रत्येक कार्यस्थल पर एक “जनता बोर्ड” प्रदर्शित किया जाना चाहिए जिसमें कार्य का विवरण, अनुमानित श्रम दिवस, सामग्री की मात्रा और मदवार लागत दर्शाई गई हो।
प्रमुख मापदंडों, हाजिरी सूचियों, भुगतानों और स्वीकृतियों के डिजिटल और भौतिक प्रदर्शन सहित साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण प्रणाली का प्रावधान है। ग्राम पंचायतों को साप्ताहिक आधार पर प्रकटीकरण बैठकें भी आयोजित करनी होंगी।
विकसित ग्राम पंचायत योजना समन्वय पर आधारित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार एक स्थानीय विकास योजना है, जिसे ग्राम पंचायतों द्वारा सहभागी एवं साक्ष्य-आधारित योजना के जरिए विकसित भारत @2047 के अनुरूप तैयार किया गया है। यह योजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अधिनियम के तहत सभी कार्य ग्राम पंचायत द्वारा तैयार और ग्राम सभा द्वारा सहभागी दृष्टिकोण के जरिए अनुमोदित वीजीपीपी से ही शुरू होने चाहिए ताकि आवश्यकता-आधारित, समन्वय-उन्मुख और संतृप्ति-केन्द्रित ग्रामीण विकास नियोजन सुनिश्चित हो सके।
यह अधिनियम सतत और सुदृढ़ ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चार प्रमुख विषयगत क्षेत्रों के अंतर्गत कार्यों के निष्पादन की अनुमति देता है:
जी हां। यह अधिनियम केन्द्र, राज्य और स्थानीय योजनाओं के समन्वय के जरिए “एकल योजना, बहु-वित्तपोषण” दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
जी हां, प्राकृतिक आपदाओं या असाधारण परिस्थितियों के दौरान राज्य सरकार की सिफारिश पर केन्द्र सरकार अनुमत कार्यों का विस्तार करने, वैतनिक रोजगार बढ़ाने और दस्तावेजीकरण संबंधी मानदंडों में ढील देने जैसी विशेष छूट दे सकती है।
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹95,692 करोड़ का आवंटन किया है। संभावित राज्य योगदान सहित कुल बजट अनुमान ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक है, जो ग्रामीण अवसंरचना और रोजगार सृजन में नई गति देगा।