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युद्ध लंबा चला तो प्रभावित होगा भारत का निर्यात, अर्थव्यवस्था और व्यापार पर सीधा असर: राजेश अग्रवाल

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अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से भारतीय निर्यात और ऊर्जा सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ रहा है। सरकार फार्मा और ट्रेड सेक्टर को बचाने के लिए वैकल्पिक रास्ते खोज रही है

Last Updated- April 04, 2026 | 8:02 PM IST
Rajesh Agarwal
केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण भारत के निर्यात पर असर पड़ रहा है। केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने शनिवार को कहा कि अगर यह संकट लंबा चला तो दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकता है।

अग्रवाल ने ‘चिंतन शिविर – फार्मा निर्यात को बढ़ाने के लिए’ कार्यक्रम के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए यह बात कही। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में भारतीय निर्यात पॉजिटिव दिशा में रहने की उम्मीद थी, लेकिन पिछले महीने संकट की वजह से आयात और निर्यात दोनों पर असर देखा गया।

ऊर्जा आयात पर सबसे ज्यादा असर

पश्चिम एशिया से भारत का बड़ा ऊर्जा आयात है। सचिव ने कहा कि इस क्षेत्र में संकट के चलते ऊर्जा की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण बाजार भी है। यहां भारत के कुल निर्यात का करीब 12-13 प्रतिशत जाता है। इसलिए इस क्षेत्र में सीधा असर पड़ रहा है।

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अग्रवाल ने स्पष्ट किया, “अगर संकट लंबा चला तो कुछ वैल्यू चेन वापस घूम सकती हैं, जिससे दूसरे देशों में भी हमारे निर्यात पर असर पड़ सकता है। हम इस बात से पूरी तरह वाकिफ हैं।”

उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि पश्चिम एशिया संकट का भारतीय निर्यात पर सही आंकड़ा कुछ हफ्तों में ही साफ हो जाएगा। सरकार इस बात की कोशिश कर रही है कि सप्लाई चेन पर कम से कम असर पड़े। हालांकि, निर्यात और आयात दोनों के कुछ आंकड़ों में गिरावट आने की तैयारी सरकार ने कर रखी है।

आयात और निर्यात दोनों प्रभावित

सचिव ने कहा कि संकट का असर सिर्फ निर्यात पर ही नहीं, बल्कि आयात पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा, “यह एक तरफा नहीं होगा। निर्यात घटेगा तो आयात में भी कुछ कमी आएगी।”

अग्रवाल ने यह भी बताया कि भले ही युद्ध खत्म हो जाए, लेकिन इसका असर अगले कुछ महीनों या सालों तक रह सकता है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन सी सप्लाई चेन या इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित हुआ है। उन्होंने माना कि इस वक्त लंबी अवधि का अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है।

फार्मा क्षेत्र पर भी असर की बात करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ जरूरी इंटरमीडिएट्स और सॉल्वेंट्स की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। सरकार के सभी विभाग इस बात पर लगे हैं कि सीमित एलपीजी सप्लाई को कैसे प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने बताया कि आयात को दूसरे स्रोतों से भी बढ़ाया जा रहा है ताकि समस्या को जितना हो सके हल किया जा सके।

फार्मा सेक्टर को प्राथमिकता देते हुए अग्रवाल ने कहा कि जैसे-जैसे कुल सप्लाई की स्थिति सुधरेगी, हर सेक्टर में दर्द को कम करने की कोशिश की जाएगी। फार्मा इसमें अहम जगह रखता है।

सरकार और उद्योग दोनों मिलकर इस बात पर विचार कर रहे हैं कि सप्लाई चेन को और मजबूत कैसे बनाया जाए। अग्रवाल का मानना है कि बाहरी चुनौतियां बार-बार आ सकती हैं, इसलिए उद्योग को आत्मनिर्भर बनना होगा।

(PTI के इनपुट के साथ)

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First Published - April 4, 2026 | 8:00 PM IST

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