पश्चिम एशिया में जारी संकट भुगतान संतुलन के लिए ‘वास्तविक दबाव परीक्षण’ है, जिसका मुद्रास्फीति, चालू खाते और विनिमय दर पर सीधा प्रभाव पड़ता है। वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने आज ये बातें कहीं। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में नागेश्वरन ने कहा, ‘विश्वसनीय रूप से चालू खाते का प्रबंधन करना, उसका वित्तपोषण करना और मुद्रा की विनिमय दर में गिरावट को रोकना वृहद आर्थिक मोर्चे पर वित्त वर्ष 2026-27 की आर्थिक अनिवार्यताएं हैं। भारत की मजबूत राजकोषीय नीति, बुनियादी ढांचा निवेश और सुधार के कदम संघर्ष के मौजूदा माहौल से निपटने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।’
अधिकतर अर्थशास्त्रियों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत के चालू खाते के घाटे का अपना अनुमान बढ़ा दिया है और इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.5 फीसदी से 2.4 फीसदी के दायरे में रहने का अनुमान लगाया है।
पश्चिम एशिया संकट के प्रति भारत की संवेदनशीलता को ‘ढांचागत’ बताते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि ये संकेत किसी ऐसे अस्थायी झटके के नहीं हैं जो स्थिति सामान्य होने पर अपने आप ठीक हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘ये दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा और जिंस कॉरिडोर में से लगातार आ रही रुकावट के शुरुआती नतीजे हैं। पश्चिम एशिया संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है।’
एक अलग सत्र में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, ‘मैं यह नहीं कह रहा कि ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ेंगी लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी का कोई भी फैसला चुनावों से जुड़ा हुआ नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर दिन 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इस तिमाही तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी (लागत व बिक्री मूल्य का अंतर) बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है जबकि नुकसान बढ़कर 1 लख करोड़ रुपये हो सकता है। जिस रफ्तार से घाटा बढ़ रहा है, उससे लगता है कि एक तिमाही का नुकसान पिछले साल कमाए गए पूरे मुनाफे को खत्म कर सकता है।’
पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट के बावजूद भारत के पास ईंधन का पर्याप्त भंडार है। देश में 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की जरूरत का तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और 45 दिनों की जरूरत का तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) उपलब्ध है। भारत की रिफाइनरियों ने एलपीजी का उत्पादन बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया है जो संघर्ष से पहले के स्तर 35,000 टन प्रतिदिन से काफी अधिक है।
एक अन्य सत्र में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि वैश्विक स्थिति और भू-राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीवन के हर क्षेत्र में लोगों को जगाने और आगे आने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने हमें यह मार्गदर्शन देने की कोशिश की है कि अब कामकाज पहले की तरह सामान्य ढंग से नहीं चल सकता। भारत ने हमेशा मुश्किल समय में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।’
उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री ने विदेश यात्राओं पर रोक लगाने की बात कही थी तो उनका मतलब घूमने-फिरने वाली यात्राओं से था न कि कारोबारी यात्राओं से। उन्होंने कहा, ‘अपने कारोबार के लिए पूरी दुनिया में घूमें। ज्यादा पैसा कमाने के लिए खर्च करें। ज्यादा विदेशी मुद्रा लाएं। निवेशक लाएं। निर्यात ऑर्डर लाएं। हम अगले 8 या 9 महीनों में 500 प्रतिनिधिमंडलों को खास तौर पर मुक्त व्यापार करार वाले देशों में ले जाएंगे।’