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फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेक्स की बढ़ती लागत के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत: सीतारमण

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा फॉरेक्स पर दबाव, ईंधन-उर्वरक बने बड़ी चिंता

Last Updated- May 25, 2026 | 2:43 PM IST
Nirmala Sitharaman
निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री (फाइल फोटो)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने सोमवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल, उर्वरक और सोने की ऊंची कीमतों से विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की विदेशी मुद्रा बचाने की अपील का बचाव करते हुए सीतारमण ने कहा कि इस बयान को वैश्विक कमोडिटी बाजारों में उतार-चढ़ाव और बढ़ती आयात लागत के संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से यह स्थिति बनी है और कच्चे तेल की कीमतें लगातार बदल रही हैं। पिछले करीब 90 दिनों से कीमतों में भारी अस्थिरता बनी हुई है। भारत अंतरराष्ट्रीय उर्वरक और सोने की कीमतों में अप्रत्या​शित बढ़ोतरी का भी सामना कर रहा है। इन तीनों चीजों के भुगतान विदेशी मुद्रा में करने पड़ते हैं। वहां रुपये में व्यापार नहीं होता

3Fs को समझना जरूरी: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “कृपया इन थ्री Fs (Fuel, Fertiliser और Foreign Exchange) के संदर्भ को समझिए। उनका इशारा आवश्यक आयात और सोने की खरीदारी से बाहरी खाते पर बढ़ते दबाव की ओर था। वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया संघर्ष के आर्थिक असर को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इसमें शिपिंग मार्गों पर जोखिम, माल ढुलाई की बढ़ती लागत और ऊर्जा बाजार में बाधाओं की आशंका शामिल है।

उन्होंने कहा कि यह संकट केवल कूटनीतिक नहीं है। व्यापार और आम लोगों के लिए इसका मतलब हो सकता है- ईंधन की बढ़ती लागत, माल की डिलीवरी में देरी, महंगी शिपिंग, कच्चे माल की कमी, कार्यशील पूंजी पर दबाव और निर्यात ऑर्डरों में अनिश्चितता।

वित्त मंत्री ने MSME सेक्टर पर पड़ रहे दबाव का भी जिक्र किया और कहा कि लंबे समय तक बनी अनिश्चितता से कारोबारी योजना बनाना मुश्किल हो रहा है। हालांकि इसके बावजूद सीतारमण ने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और उन्होंने डर फैलाने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “भारत डर फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता। हमें अपने शब्दों और अपने कामों से लोगों में भरोसा पैदा करना होगा।”

आर्थिक संकेतकों का दिया हवाला

सीतारमण ने कई आर्थिक संकेतकों का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि FY26 में सकल GST संग्रह 22 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.3 प्रतिशत अधिक है। वहीं अप्रैल के हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतकों ने मांग में व्यापक सुधार के संकेत दिए हैं। घरेलू थोक ट्रैक्टर बिक्री अप्रैल में 26 प्रतिशत बढ़ी, जबकि यात्री वाहन बिक्री में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री क्रमशः 28 प्रतिशत और 32 प्रतिशत बढ़ी। वहीं जीवन बीमा कंपनियों का नया बिजनेस प्रीमियम 39 प्रतिशत बढ़ा।

उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र भी मजबूत बना हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए FY26 में घटकर 1.93 प्रतिशत रह गया। खुदरा, कृषि और MSME सेक्टर को कर्ज वृद्धि क्रमशः 18.1 प्रतिशत, 15.5 प्रतिशत और 18.2 प्रतिशत रही।

सीतारमण ने कहा कि सरकार का पॉलिसी रिस्पांस बहुत संतुलित रहा है और इसका फोकस MSME, निर्यातकों और कार्यशील पूंजी दबाव झेल रहे क्षेत्रों को समर्थन देने पर है। साथ ही समग्र आर्थिक वृद्धि को बनाए रखना भी प्राथमिकता है। उन्होंने केंद्रीय बजट में आर्थिक स्थिरीकरण कोष (Economic Stabilisation Fund) के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रावधान का जिक्र करते हुए इसे बाहरी झटकों से बचाव के लिए एहतियाती कदम बताया।

उन्होंने कहा कि ESF एक आपातकालीन सुरक्षा कवच था, जिसे पश्चिम एशिया संकट के पूरे प्रभाव से पहले ही तैयार किया गया, ताकि भारत वैश्विक झटकों, सप्लाई चेन में रुकावट और किसी भी क्षेत्र में अचानक आने वाले दबाव का तेजी से जवाब दे सके।

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First Published - May 25, 2026 | 2:35 PM IST

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