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पीएम मोदी ने सोना खरीदने से सावधान क्यों किया? रुपये, डॉलर और देश की अर्थव्यवस्था का पूरा गणित समझिए

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2026 तक 95 के करीब पहुंचा रुपया, रिकॉर्ड गोल्ड इंपोर्ट से बढ़ी चिंता; क्या अब बदलेगी सरकार की नीति?

Last Updated- May 11, 2026 | 3:25 PM IST
Gold and silver rate today

सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और भारत का इंपोर्ट बिल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोगों से ‘एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने’ की अपील अब सिर्फ एक सामान्य सलाह नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे देश की आर्थिक स्थिति और विदेशी मुद्रा बचाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, 2021 में जहां डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 74-75 के स्तर पर था, वहीं 2026 में यह 95 रुपये के करीब पहुंच गया है। यानी कुछ ही सालों में रुपये में करीब 27-28 प्रतिशत की कमजोरी आई है। इसी दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर के करीब पहुंचने के बाद फिर दबाव में आकर 690 अरब डॉलर के आसपास फिसल गया। केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट कहती है कि बढ़ते कच्चे तेल के दाम, पश्चिम एशिया तनाव और भारी आयात बिल ने भारत के बाहरी आर्थिक मोर्चे पर दबाव बढ़ा दिया है।

भारत का फॉरेक्स रिजर्व (अरब डॉलर में)

साल जनवरी जून सितंबर दिसंबर
2018 417.79 406.06 400.53 393.40
2019 396.68 427.68 433.59 471.30
2020 481.54 506.84 542.02 580.84
2021 590.19 609.00 638.65 633.61
2022 634.29 593.32 532.66 562.81
2023 573.73 595.05 586.91 623.28
2024 616.73 652.00 704.89 640.28
2025 630.61 702.78 700.24 696.61
2026 723.77 690.69

सोर्स: RBI

आखिर सरकार को सोने की चिंता क्यों?

अजय केडिया कहते हैं कि भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्ट करने वाले देशों में शामिल है। देश हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है। 2021 में भारत ने 1,067 टन से ज्यादा सोना आयात किया था। लंबे समय का औसत देखें तो भारत हर साल करीब 800 टन सोना बाहर से खरीदता है।

समस्या यह है कि सोना डॉलर देकर खरीदा जाता है। यानी जितना ज्यादा सोना आयात होगा, उतने ज्यादा डॉलर देश से बाहर जाएंगे। ऐसे समय में जब तेल का इंपोर्ट बिल पहले से बढ़ रहा हो, तब सोने पर खर्च होने वाले डॉलर सरकार के लिए चिंता का विषय बन जाते हैं।

भारत का गोल्ड इंपोर्ट (टन में)

साल जनवरी मई सितंबर दिसंबर
2018 41.62 103.26 81.71 72.99
2019 69.51 133.58 26.84 62.65
2020 36.27 1.37 12.16 84.52
2021 70.52 12.95 98.49 95.13
2022 45.23 110.68 81.74 25.49
2023 11.69 63.30 70.81 54.66
2024 35.69 40.62 61.90 60.24
2025 36.56 30.56 102.25 47.46
2026 99.39

सोर्स: RBI

FY26 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट बिल रिकॉर्ड 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दिलचस्प बात यह है कि सोने की मांग टन के हिसाब से करीब 5 प्रतिशत घटी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतें इतनी बढ़ गईं कि कुल डॉलर बिल और ज्यादा हो गया।

पीएम मोदी का संदेश क्या है?

अजय केडिया के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी का संदेश ‘सोने के खिलाफ’ नहीं है। सरकार लोगों से सिर्फ यह कह रही है कि मौजूदा संकट के दौर में गैर-जरूरी गोल्ड खरीद को कुछ समय के लिए टाल दिया जाए ताकि डॉलर की बचत हो सके।

कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च प्रमुख अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक यह अपील एक बड़े ‘फॉरेक्स बचाओ अभियान’ का हिस्सा है। सरकार पहले ही वर्क फ्रॉम होम, विदेशी छुट्टियां कम करने, पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने और फर्टिलाइजर आयात कम करने जैसे संदेश दे चुकी है।

उनका कहना है कि अभी सबसे बड़ा दबाव तेल और ऊर्जा आयात से आ रहा है। ऐसे में सोना वह हिस्सा है जिसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।

क्या सरकार गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकती है?

बाजार में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सरकार गोल्ड इंपोर्ट कम करने के लिए आयात शुल्क बढ़ा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर ड्यूटी बढ़ती है तो गोल्ड इंपोर्ट में 10-12 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि सरकार फिलहाल सीधे प्रतिबंध लगाने या भारी टैक्स बढ़ाने के बजाय लोगों की खरीदारी की आदत बदलने की कोशिश कर रही है। वजह यह है कि 2013 की तरह कड़े नियम लागू करने पर स्मगलिंग बढ़ने का खतरा रहता है।

पुराने गहनों का इस्तेमाल बढ़ रहा

दिलचस्प बात यह है कि अब भारत में ज्वेलरी की करीब 50 प्रतिशत मांग पुराने सोने के एक्सचेंज और रीसाइक्लिंग से पूरी होने लगी है। यानी लोग नया सोना खरीदने के बजाय पुराने गहने बदल रहे हैं। महंगे सोने की वजह से ज्वेलरी इंडस्ट्री भी अब हल्के वजन और कम कैरेट वाले गहनों पर ज्यादा फोकस कर रही है ताकि ग्राहकों के लिए कीमतें थोड़ी किफायती रहें।

गोल्ड इंपोर्ट का रुपये और CAD पर क्या असर पड़ता है?

अनिंद्य बनर्जी अनुसार गोल्ड इंपोर्ट का असर सीधे भारत के Current Account Deficit यानी CAD पर पड़ता है। FY25 में भारत का CAD करीब 23 अरब डॉलर था, जो FY26 में बढ़कर करीब 45 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसमें गोल्ड इंपोर्ट बिल का बड़ा योगदान है। जब ज्यादा डॉलर में सोना खरीदा जाता है, तो विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है। इससे रुपये पर दबाव आता है और वह कमजोर होता है।

Also Read | अब सिर्फ डॉलर नहीं, कई करेंसी पर चल सकती है ग्लोबल अर्थव्यवस्था

हालांकि रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि फॉरेक्स रिजर्व सीधे इंपोर्ट बिल से कम नहीं होते। रिजर्व में बदलाव काफी हद तक RBI के हस्तक्षेप और डॉलर, यूरो, गोल्ड जैसी संपत्तियों की वैल्यू पर निर्भर करता है।

क्या सरकार लोगों को गोल्ड से हटाकर शेयर बाजार में भेजना चाहती है?

अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक सरकार लंबे समय से चाहती है कि लोग अपनी बचत का ज्यादा हिस्सा फाइनेंशियल एसेट्स जैसे म्यूचुअल फंड और इक्विटी में लगाएं। इसके संकेत अब डेटा में भी दिख रहे हैं। FY2020 में घरेलू बचत का सिर्फ 4 प्रतिशत हिस्सा इक्विटी और म्यूचुअल फंड में जा रहा था, जो FY2025 तक बढ़कर करीब 15 प्रतिशत हो गया।

लेकिन एक्सपर्ट साफ कहते हैं कि सरकार गोल्ड खत्म नहीं करना चाहती। गोल्ड आज भी दुनिया में ऐसी संपत्ति मानी जाती है जो किसी केंद्रीय बैंक की ‘लायबिलिटी’ नहीं है और लंबे समय में महंगाई और करेंसी कमजोरी से बचाव देती है।

आगे सोने का आउटलुक क्या है?

अनिंद्य बनर्जी का मानना है कि लंबी अवधि में गोल्ड पर बुलिश नजरिया बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया धीरे-धीरे ‘डी-डॉलराइजेशन’ यानी डॉलर पर निर्भरता कम करने की तरफ बढ़ रही है और इसका सबसे बड़ा फायदा गोल्ड को मिल सकता है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि अगले 12-18 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। यानी सरकार फिलहाल सिर्फ इतना चाहती है कि लोग संकट के दौर में थोड़े समय के लिए नई खरीद टालें। लेकिन लंबी अवधि में सोना अब भी सुरक्षित निवेश और संपत्ति बचाने का मजबूत जरिया माना जा रहा है।

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First Published - May 11, 2026 | 2:46 PM IST

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