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भारत बनेगा ‘इलेक्ट्रिक स्टेट’? अमिताभ कांत ने 2030 तक 1500 GW स्वच्छ ऊर्जा का दिया बड़ा लक्ष्य

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अमिताभ कांत ने भारत से 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा क्षमता 1500 GW करने और पेट्रोल-डीजल वाहनों को चरणबद्ध खत्म करने की मांग की।

Last Updated- May 12, 2026 | 8:12 AM IST
Amitabh Kant
Former G20 Sherpa Amitabh Kant

जी20 के पूर्व शेरपा अमिताभ कांत ने सोमवार को कहाकि भारत को स्वच्छ ऊर्जा के मौजूदा लक्ष्य 500 गीगावाट से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 1,500 गीगावाट करना चाहिए। इससे भारत को ऊर्जा की स्वतंत्रता और वैश्विक हरित ऊर्जा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने में मदद मिलेगी।

उन्होंने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के परिचर्चा सत्र ‘भविष्य के ऊर्जा परिदृश्य को तैयार करना: ऊर्जा बदलाव पर यहां और अभी’ में कहा कि भारत का ऊर्जा बदलाव अब केवल जलवायु उद्देश्य नहीं रह गया है बल्कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और आपूर्ति व्यवधानों के बीच रणनीतिक व भू-राजनीतिक जरूरत बन गया है।

कांत ने कहा, ‘यह जलवायु आवश्यकता नहीं है। यह भारत के लिए भू-राजनीतिक और रणनीतिक जरूरत है।’ उन्होंने देश की 85 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन की आवश्यकता और लगभग 50 प्रतिशत गैस मांग के लिए आयात पर निर्भरता पर प्रकाश डाला। भारत के वर्तमान स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों में महत्त्वाकांक्षा की कमी है। देश को दीर्घकालिक आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए नवीकरणीय क्षमता, बैटरी भंडारण, ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर और विद्युतीकरण को तेजी से बढ़ाना चाहिए। उन्होंने पेट्रोल-डीजल के इंजन के वाहनों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए आक्रामक समयसीमा का भी प्रस्ताव दिया। उन्होंने सुझाव दिया गया कि भारत को 2027 के बाद पेट्रोल-डीजल से चलने वाले दोपहिया और तिपहिया वाहनों, 2030 के बाद बसों व ट्रकों और 2032 के बाद चारपहिया वाहनों का पंजीकरण बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘भारत को पेट्रोल राज्य से एक इलेक्ट्रिक राज्य बनने की ओर बढ़ना चाहिए।

कांत ने चेताया कि अपर्याप्त पारेषण इन्फ्रास्ट्रक्चर देश के ऊर्जा परिवर्तन में बड़ी बाधा बन रही । उन्होंने आशंका जताई कि ॅनिकासी संबंधी प्रतिबंधों के कारण लगभग 31 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वर्तमान में ठप पड़ी है। केंद्र सरकार को मांग में वृद्धि से पहले पारेषण लाइनें, ग्रिड और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए वितरण कंपनियों के साथ मिलकर काम
करना चाहिए।

नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर रेन्यू के संस्थापक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमंत सिन्हा ने परिचर्चा में कहा कि उद्योग सूर्य की रोशनी होने पर सौर ऊर्जा और हवा चलने पर पवन ऊर्जा बनाने से आगे बढ़ गया है। विकास का अगला चरण बैटरी भंडारण प्रणालियों द्वारा समर्थित चौबीसों घंटे की नवीकरणीय ऊर्जा पर केंद्रित है। सिन्हा ने कहा, ‘हम दिन के समय कीमतों में भारी गिरावट देख रहे हैं, जो शून्य के बहुत करीब पहुंच गई हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि बिजली कंपनियां और उद्योग अनियमित आपूर्ति के बजाय स्थिर और आपूर्ति योग्य नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों की मांग कर रहे हैं।

कांत ने बैटरी भंडारण प्रणालियों की तेजी से तैनाती पर भी बल दिया। उन्होंने तर्क दिया कि बड़े पैमाने पर भंडारण एकीकरण के बिना चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा संभव नहीं होगी। कांत ने परमाणु ऊर्जा के मुद्दे पर शांति विधेयक पारित होने के बाद सुधारों को तेजी से लागू करने का आह्वान किया।

उन्होंने सरकार से नियमों को शीघ्र अधिसूचित करने और लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम में संयुक्त अरब अमीरात के पूर्व राजदूत संजय सुधीर ने कहा कि हाल के भू-राजनीतिक कठिनाइयों ने भारत की ऊर्जा संबंधी असुरक्षा को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि देश के पास वर्तमान में केवल 9.5 दिनों का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है जबकि अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का मानक 90 दिन का है।

उन्होंने कहा, “हमें वास्तव में अपनी असुरक्षा का एहसास हो गया है।’ उन्होंने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाने और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूती के लिए अधिक निवेश करने का आह्वान किया।

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First Published - May 12, 2026 | 8:12 AM IST

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