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Lok Sabha Election 2024: बुलेट ट्रेन पर सवार होगा भाजपा का चुनाव अभियान, घोषणा पत्र में हो सकते हैं कई वादे

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Bullet Train Projects: वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने संसद को बताया था कि देश भर में बुलेट ट्रेन के 7 कॉरिडोर शुरू करने पर विचार चल रहा है।

Last Updated- March 17, 2024 | 10:39 PM IST

Lok Sabha Election के लिए भाजपा का प्रचार अभियान बुलेट ट्रेन के साथ आगे बढ़ेगा। केंद्र में सत्ताधारी पार्टी अपने चुनावी घोषणा पत्र में मतदाताओं से अगले पांच वर्षों के दौरान देश में कई और बुलेट ट्रेन कॉरिडोर शुरू करने का वादा कर सकती है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘पिछले चुनाव में किए गए वादों पर काम जारी रखते हुए पार्टी अगले पांच वर्षों के लिए हाई स्पीड रेल की कई परियोजनाओं को अपने मुख्य मुद्दों में शामिल करने पर विचार कर रही है। ये परियोजनाएं चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा हो सकती हैं।’

वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा ने कहा था कि वह देश में हाई स्पीड ट्रेन का जाल फैलाएगी। यह बात उसके घोषणा पत्र में भी शामिल थी। इस संबंध में भाजपा प्रवक्ता को भेजे गए सवालों का जवाब खबर लिखे जाने तक नहीं मिला था।

पिछले आम चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा जारी किए गए घोषणा पत्र में कहा गया था, ‘हम अगले पांच वर्षों में हाई स्पीड रेल संपर्क का विस्तार करेंगे और देशभर में वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी नई ट्रेनें शुरू करेंगे।’

अपने घोषणा पत्र के अनुसार चुनावी वादों को अमलीजामा पहनाते हुए भाजपा सरकार ने प्रमुख मार्गों पर बुलेट ट्रेन के लिए व्यवहार्यता अध्ययन कराया और कई कॉरिडोर पर आकलन भी पूरा करा लिया है।

मौजूदा समय में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर तेजी से निर्माण कार्य चल रहा है, जिस पर गुजरात के सूरत और बिलिमोड़ा के बीच 2026 तक परिचालन शुरू होने की संभावना है। पूरे कॉरिडोर के 2028 तक शुरू हो जाने की संभावना है। मालूम हो कि इस परियोजना के चालू होने की तारीख 2022 रखी गई थी।

वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने संसद को बताया था कि देश भर में बुलेट ट्रेन के 7 कॉरिडोर शुरू करने पर विचार चल रहा है। इनमें दिल्ली-वाराणसी (813 किमी), दिल्ली-अहमदाबाद (878 किमी), मुंबई-नागपुर (765 किमी), मुंबई-हैदराबाद (671 किमी), चेन्नई-बेंगलूरु-मैसूर (435 किमी), दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर (459 किमी) और वाराणसी-हावड़ा (760 किमी) रूट शामिल हैं। इन सातों कॉरिडोर के लिए फिजिबिलिटी अध्ययन और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) जैसे शुरुआती तैयारी के काम तेजी से कराए गए। किसी भी परियोजना की लागत और रूट पर बुनियादी ढांचा वगैरह का आकलन करने के लिए ये प्राथमिक और सबसे जरूरी कार्य होते हैं।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए वास्तविक लागत पर आईआरआर (इंटरनल रेट ऑफ रिर्टन) लगभग 12 प्रतिशत आंका गया। हालांकि इसमें बदलाव हो सकता है, क्योंकि परियोजना पूरी होने की वास्तविक समयसीमा 2022 से छह साल की देरी होने के चलते इसकी लागत लगभग 60,000 करोड़ रुपये बढ़ गई है।

एक और सूत्र ने बताया कि सात कॉरिडोर में से इस बार के चुनावी घोषणा पत्र में 2 या 3 बुलेट ट्रेन परियोजनाओं को शामिल किया जा सकता है, क्योंकि इनकी फिजिबिलिटी और डीपीआर रिपोर्ट रेल मंत्रालय को सौंप दी गई है और मंत्रालय ने इनका आकलन भी किया है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने पिछले साल अक्टूबर में लिखा था कि जेवर में एयरपोर्ट तैयार होने के मद्देनजर अन्य शहरों तक आवाजाही आसान करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर की मांग की जा रही है।

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First Published - March 17, 2024 | 10:39 PM IST

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