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Dharavi Project: धारावी परियोजना को पटरी से उतराने के लिए खड़ा होने लगा राजनीतिक गतिरोध

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कांग्रेस के बाद अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना इस परियोजना के विरोध में सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही है।

Last Updated- December 05, 2023 | 8:58 PM IST
Dharaavi

एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-बस्ती धारावी के पुनर्विकास (Dharavi Redevelopment Project) की गाड़ी में एक बार राजनीतिक गतिरोध आना शुरु हो गया है। कांग्रेस के बाद अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना इस परियोजना के विरोध में सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही है।

धारावी पुनर्विकास परियोजना में अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाकर उद्धव ठाकरे 16 दिसंबर को अदाणी समूह के मुंबई कार्यालय तक पैदल मार्च करके परियोजना को रद्द करने की मांग करेंगे।

सरकार पर भेदभाव का आरोप लगते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए अडाणी समूह को लाभ पहुंचाने के लिए कई संदिग्ध निर्णय लिए गए हैं। इसमें टीडीआर (हस्तांतरणीय विकास अधिकार) बिक्री प्रावधान भी शामिल है, जिससे अडाणी समूह को काफी फायदा होगा।

ठाकरे ने कहा कि धारावी क्षेत्र के निवासियों के हितों की रक्षा के लिए शिवसेना 16 दिसंबर को अदाणी समूह के कार्यालय तक मार्च करेगी। मैं शनिवार को रैली का नेतृत्व करूंगा।

ठाकरे ने सवाल किया कि क्या राज्य सरकार विशाल झुग्गी बस्ती धारावी के निवासियों की कीमत पर अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है। धारावी पुनर्विकास परियोजना के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध है, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि क्या सरकार धारावी निवासियों की कीमत पर अदाणी को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस भी इस मुद्दे पर एक विरोध रैली आयोजित कर चुकी है।

महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई में औपचारिक रूप से 259 हेक्टेयर की धारावी पुनर्विकास परियोजना को अदाणी समूह की कंपनी को सौंपा था। 20,000 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व वाली इस परियोजना को पूरा करने का ठेका पिछले साल नवंबर में प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से अडाणी प्रॉपर्टीज ने हासिल किया था। रियल्टी क्षेत्र की कंपनी डीएलएफ और नमन डेवलपर्स भी स्पर्धा में शामिल थी।

विवाद पैदा करने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण

अदाणी समूह द्वारा संचालित धारावी पुनर्विकास परियोजना (डीआरपी) ने विवाद पैदा करने के प्रयासों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इसमें दावा किया गया कि धारावी अधिसूचित क्षेत्र (डीएनए) के भीतर टीडीआर की अनुमति 2018 के सरकारी संकल्प (जीआर) के बाद से दी गई थी, जिसे 2022 के जीआर में संशोधित किया गया था।

बयान में कहा गया कि दोनों फैसले 2022 में पुनर्विकास के लिए निविदा जारी होने से पहले हुए थे। डीआरपी ने एक बयान में कहा कि निहित स्वार्थी तत्व 20,000 करोड़ रुपये की राजस्व क्षमता वाली इस परियोजना को पटरी से उतारने या इसमें देरी करने का प्रयास कर रहे हैं। डीआरपी में महाराष्ट्र सरकार भी हितधारक के रूप में है।

विपक्षी दल कांग्रेस ने लगाए आरोप

विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि भाजपा सरकार मुंबई में डीआरपी के लिए मानदंडों में ढील देकर अदाणी समूह को फायदा पहुंचा रही है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मूलरूप से नियमों में ढील देने के बारे में अपनी आपत्तियां व्यक्त करने वाले महाराष्ट्र शहरी विकास विभाग को धारावी के रियल एस्टेट हस्तांतरण विकास अधिकार (टीडीआर) में इंडेक्सेशन के प्रविधान को हटाने के लिए अधिसूचना जारी करने के लिए मजबूर किया गया। इसके चलते मुंबई के सभी बिल्डरों के लिए अपने टीडीआर का पहला 40 प्रतिशत हिस्सा अदाणी से खरीदना अनिवार्य हो गया है।

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First Published - December 5, 2023 | 8:58 PM IST

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