BFSI Stocks Picks: वित्त वर्ष 2026 निवेशकों के लिए आसान नहीं रहा। निफ्टी और बैंकिंग इंडेक्स में खास तेजी नहीं दिखी, बल्कि कई बड़े बैंक शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली। लेकिन इस कमजोर माहौल के बीच भी BFSI सेक्टर ने चौंकाया है। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेक्टर के करीब 21 शेयरों ने 25% से ज्यादा रिटर्न दिया। यह दिखाता है कि पूरे सेक्टर की बजाय सही शेयर चुनना ज्यादा जरूरी हो गया है।
BFSI सेक्टर का कुल मार्केट कैप एक साल में करीब 18% बढ़कर 108 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पहले 91 लाख करोड़ रुपये था। इस तेजी के पीछे PSU बैंक, NBFC और फिनटेक कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है। खासतौर पर डिजिटल बदलाव और नई टेक्नोलॉजी ने इस सेक्टर को नई दिशा दी है।
| कंपनी का नाम | रिटर्न (%) |
|---|---|
| MCX | 122 |
| RBL Bank (RBK) | 69 |
| Anand Rathi | 59 |
| AU Small Finance Bank (AUSFB) | 59 |
| Aditya Birla Capital (ABCL) | 59 |
| Indian Bank (INBK) | 58 |
| L&T Finance Holdings (LTFH) | 57 |
| BSE | 49 |
| DCB Bank (DCBB) | 44 |
| Canara Bank (CNBK) | 42 |
| Nippon India AMC | 39 |
| Aditya Birla AMC | 37 |
| Federal Bank (FB) | 37 |
| Muthoot Finance | 35 |
| Union Bank (UNBK) | 34 |
| Shriram Finance | 33 |
| IIFL Finance | 33 |
| Max Financials | 31 |
| State Bank of India (SBIN) | 29 |
| Star Health | 26 |
| Paytm | 26 |
रिपोर्ट के मुताबिक, BFSI सेक्टर अब सिर्फ पारंपरिक बैंकों तक सीमित नहीं रहा। डिजिटलाइजेशन, रिटेल लोन की बढ़ती मांग और नए नियमों के चलते यह सेक्टर ज्यादा व्यापक और जटिल हो गया है। इसी वजह से ब्रोकरेज हाउस ने अपने कवरेज को बढ़ाकर 77 शेयरों तक कर दिया है।
हाल के महीनों में बैंकों की कमाई के अनुमान लगातार घटाए गए हैं। इसके पीछे मार्जिन पर दबाव, कमजोर लोन ग्रोथ और बढ़ती क्रेडिट लागत मुख्य कारण रहे हैं। प्राइवेट बैंकों के लिए FY26 और FY27 के अनुमान में 8% और 5% तक की कटौती की गई है, जबकि PSU बैंकों पर इसका असर कम रहा है। हालांकि, अब इन कटौतियों की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
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रिपोर्ट बताती है कि जिन बैंकों का ज्यादा फोकस अनसिक्योर्ड लोन पर है, वहां दबाव ज्यादा दिखा है। माइक्रोफाइनेंस और पर्सनल लोन से जुड़े जोखिम बढ़ने के कारण उनकी कमाई पर असर पड़ा है। लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति सुधरती दिख रही है। कलेक्शन बेहतर हो रहा है और डिफॉल्ट के संकेत कम हो रहे हैं।
सरकारी बैंकों को एक बड़ा फायदा CGTMSE योजना से मिला है, जिसके तहत छोटे कारोबारियों को दिए गए लोन पर सरकारी गारंटी मिलती है। इससे बैंकों का जोखिम कम होता है और MSME सेक्टर को बिना गारंटी के भी लोन देना आसान हो जाता है।
BFSI सेक्टर की कमाई की रफ्तार पहले काफी तेज थी, लेकिन अब यह धीमी होकर FY26 में करीब 5% रह गई है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक आगे सुधार के संकेत हैं। FY27 और FY28 में कमाई 16% से 17% की दर से बढ़ सकती है। प्राइवेट बैंकों के लिए यह ग्रोथ करीब 20% तक रहने का अनुमान है।
मिड-साइज प्राइवेट बैंकों में पिछले एक साल में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। लेकिन अब जैसे-जैसे जोखिम कम हो रहा है, इन बैंकों में तेज रिकवरी की उम्मीद है और कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
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मोतीलाल ओसवाल ने इस सेक्टर में तीन बड़े नामों को अपने टॉप पिक्स के तौर पर चुना है। प्राइवेट बैंकिंग स्पेस में ICICI Bank और HDFC Bank को मजबूत विकल्प माना गया है। वहीं PSU बैंकों में State Bank of India (SBI) को सबसे पसंदीदा शेयर बताया गया है। इन बैंकों को मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर एसेट क्वालिटी और आने वाले समय में ग्रोथ की क्षमता के आधार पर चुना गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लोन ग्रोथ में सुधार, बेहतर एसेट क्वालिटी और कम होती लागत आगे सेक्टर को सपोर्ट करेंगी। GST, टैक्स कटौती और सस्ते कर्ज जैसे फैक्टर भी ग्रोथ को बढ़ावा दे सकते हैं। पूरी तस्वीर देखें तो BFSI सेक्टर एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां चुनौतियां भी हैं और मौके भी। कमाई पर दबाव है, लेकिन सुधार के संकेत भी साफ दिख रहे हैं। यानी यह ऐसा सेक्टर है जहां आंख बंद करके निवेश नहीं, बल्कि समझदारी से चुने गए शेयर ही असली मुनाफा दे सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)