Ambuja Cements Stock: Adani Group की कंपनी Ambuja Cements के शेयर मंगलवार को 2.5 प्रतिशत तक गिर गए, जबकि कंपनी ने मार्च तिमाही में मजबूत मुनाफा दिखाया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ बढ़कर 1,830 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 1,025 करोड़ रुपये था। यानी सालाना आधार पर करीब 78 प्रतिशत की बढ़त। इसके बावजूद बाजार ने इस नतीजे को सकारात्मक तरीके से नहीं लिया और शेयर दबाव में आ गया।
दरअसल, कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन ने निवेशकों को निराश किया। मार्च तिमाही में EBITDA करीब 22 प्रतिशत गिरकर 1,460 करोड़ रुपये रह गया, जो बाजार के अनुमान से काफी कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह बढ़ती लागत रही। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ईंधन और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ गए, वहीं कुछ प्लांट्स के मेंटेनेंस शटडाउन और हाल में खरीदी गई इकाइयों से जुड़ी लागत ने भी मुनाफे पर असर डाला। प्रति टन लागत में बढ़ोतरी के चलते मार्जिन दबाव में रहे।
कंपनी की बिक्री मात्रा में जरूर बढ़ोतरी हुई, लेकिन यह भी उम्मीद से कम रही। सालाना आधार पर वॉल्यूम में करीब 8 से 10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन बाजार इससे ज्यादा की उम्मीद कर रहा था। वहीं सीमेंट की कीमतों में भी खास बढ़ोतरी नहीं हुई, जिससे कुल मिलाकर कमाई पर दबाव बना रहा।
कंपनी ने संकेत दिया है कि अब वह अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है। अब फोकस तेजी से क्षमता बढ़ाने की बजाय पहले से मौजूद और खरीदी गई इकाइयों के बेहतर इस्तेमाल पर रहेगा। कंपनी का लक्ष्य अब इन परिसंपत्तियों से ज्यादा उत्पादन और मुनाफा निकालने का है। साथ ही, कंपनी ज्यादा मुनाफे वाले क्षेत्रों में ग्राइंडिंग यूनिट्स पर निवेश बढ़ाने की योजना बना रही है।
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Ambuja Cements को लेकर ब्रोकरेज फर्मों की राय अलग-अलग बनी हुई है। कुछ ब्रोकरेज जैसे Antique Stock Broking और Nuvama Institutional Equities ने शेयर पर ‘BUY’ की सलाह बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस में कटौती की है। Antique ने टारगेट प्राइस घटाकर 510 रुपये कर दिया है, जबकि Nuvama ने इसे 541 रुपये तय किया है।
Emkay Global ने शेयर पर ‘ADD’ की रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस घटाकर 450 रुपये कर दिया है, जो पहले 475 रुपये था। वहीं ICICI Securities ने रेटिंग को ‘ADD’ से घटाकर ‘HOLD’ कर दिया है और टारगेट प्राइस भी काफी कम करके 431 रुपये कर दिया है, जो पहले 540 रुपये था। ब्रोकरेज का मानना है कि बढ़ती लागत, मांग में अनिश्चितता और प्रतिस्पर्धा के चलते आने वाले समय में कंपनी के प्रदर्शन पर दबाव बना रह सकता है।
रिपोर्ट्स के हिसाब से कंपनी के सामने अभी कई दिक्कतें बनी हुई हैं। सबसे बड़ी परेशानी है बढ़ती लागत। ईंधन और ढुलाई का खर्च अभी भी ज्यादा है। ऊपर से जो नई यूनिट्स कंपनी ने खरीदी हैं, उनसे अभी पूरी तरह फायदा नहीं मिल पा रहा है। बाजार में मुकाबला भी काफी बढ़ गया है, जिससे दबाव और बढ़ रहा है।
इसके अलावा मांग को लेकर भी पूरी तरह भरोसा नहीं है कि आगे कैसी रहेगी। यही वजह है कि कंपनी ने अपने प्लांट बढ़ाने के प्लान को थोड़ा आगे खिसका दिया है। साफ है कि अभी कंपनी तेजी से विस्तार करने की बजाय पहले अपने बिजनेस को संभालने और मुनाफा सुधारने पर ज्यादा ध्यान देना चाहती है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)