Banking Sector: पिछले दो साल में सोने के बदले मिलने वाले कर्ज में बहुत तेज बढ़ोतरी हुई है। यह कर्ज 100 प्रतिशत से ज्यादा की रफ्तार से बढ़ा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि सोने की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं और कुछ नियमों में बदलाव भी हुआ है। इससे बैंकों की कर्ज देने की कुल रफ्तार ज्यादा मजबूत दिख रही है। अगर सोने के कर्ज को हटा दिया जाए, तो कई बैंकों की असली कर्ज बढ़त 100 से 400 आधार अंक तक कम हो जाती है।
सोने के कर्ज से बैंकों को अच्छा फायदा हुआ है। इससे उनकी कमाई बढ़ी है और सरकारी लक्ष्य वाले कर्ज (PSL) पूरे करने में भी मदद मिली है। साथ ही, बैड लोन बढ़ने का असर भी कम हुआ है। यानी सोने के कर्ज ने बैंकों को काफी हद तक सहारा दिया है।
करूर वैश्य बैंक, सिटी यूनियन बैंक, फेडरल बैंक और साउथ इंडियन बैंक जैसे बैंकों में सोने के कर्ज का हिस्सा काफी बड़ा है। इन बैंकों की कुल कर्ज बढ़त में अच्छा खासा हिस्सा सिर्फ सोने के कर्ज से आया है। ICICI सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में सिटी यूनियन बैंक के शेयर को अब खरीदने की सलाह दी गई है, क्योंकि हाल में शेयर गिरा है और अब सस्ता लग रहा है।
यह पढ़ें: Cement sector: सीमेंट सेक्टर में आने वाला है उछाल? ब्रोकरेज ने बताया कहां है कमाई का मौका
रिपोर्ट के मुताबिक, अभी सोने की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है, इसलिए सोने के कर्ज की मांग भी मजबूत है। लेकिन यही चीज आगे चलकर जोखिम बन सकती है। अगर सोने के दाम अचानक गिरते हैं, तो इसका सीधा असर बैंकों पर पड़ेगा। ऐसे में कर्ज की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और बैंकों के मुनाफे पर भी दबाव आ सकता है।
दूसरी तरफ, अभी कर्ज के मुकाबले सोने की वैल्यू यानी एलटीवी सुरक्षित दिख रही है, लेकिन इसमें एक छुपा हुआ खतरा भी है। खासकर हाल में दिए गए नए कर्ज में जोखिम ज्यादा हो सकता है, क्योंकि लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से असली स्थिति साफ नजर नहीं आ रही है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, जांच में यह बात सामने आई है कि सोने के कर्ज की कुल रकम तो तेजी से बढ़ी है, लेकिन न तो ग्राहकों की संख्या में उतनी बढ़ोतरी हुई है और न ही गिरवी रखे गए सोने की मात्रा में। साफ है कि इस बढ़त का बड़ा कारण सोने की कीमतों में तेजी है। कर्ज लेने की प्रक्रिया भी काफी आसान और तेज है, जहां आधे घंटे से कम समय में पैसा मिल जाता है। ज्यादातर ग्राहक पुराने ही हैं और वे एकमुश्त चुकाने वाले कर्ज को ज्यादा पसंद करते हैं। वहीं, कर्ज न चुका पाने के मामलों में नीलामी की घटनाएं भी बहुत कम देखने को मिली हैं।
कुल मिलाकर, सोने के कर्ज ने बैंकों की ग्रोथ और कमाई को मजबूत सहारा दिया है, लेकिन इसकी मजबूती काफी हद तक सोने की कीमतों पर निर्भर है। अगर कीमतों में गिरावट आती है, तो इसका असर कर्ज की रफ्तार और बैंकों की कमाई दोनों पर पड़ सकता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।