BFSI Stocks: अगर आपने पिछले एक साल में बैंकिंग शेयरों में निवेश किया है तो शायद आपका अनुभव बहुत शानदार नहीं रहा होगा। खासकर एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे बड़े प्राइवेट बैंक निवेशकों को ज्यादा कमाई नहीं करा पाए। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। कर्ज की मांग बढ़ रही है, बैंकों की कमाई सुधरने की उम्मीद है और बाजार का मूड भी पहले से बेहतर होता दिख रहा है। ऐसे में बैंकिंग शेयर एक बार फिर निवेशकों की पसंद बन सकते हैं।
मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर के लिए आने वाला समय बेहतर हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक कमाई में तेजी, बढ़ता लोन कारोबार और बेहतर वैल्यूएशन इस सेक्टर को आगे बढ़ाने का काम करेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि पिछले एक साल में बड़े बैंकों से ज्यादा मिड-साइज बैंकों ने निवेशकों को कमाई कराई। आरबीएल बैंक, फेडरल बैंक, साउथ इंडियन बैंक और करूर वैश्य बैंक जैसे शेयर 40 से 70 फीसदी तक चढ़े। वहीं दूसरी तरफ एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे बड़े बैंक दबाव में रहे। इसकी वजह रही विदेशी निवेशकों की बिकवाली, मार्जिन पर दबाव और वैश्विक अनिश्चितता। लेकिन अब विश्लेषकों का मानना है कि बड़े बैंक फिर से वापसी कर सकते हैं क्योंकि उनकी कमाई मजबूत है और वैल्यूएशन भी आकर्षक हो गया है।
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रिपोर्ट के मुताबिक देश में कर्ज लेने वालों की कमी नहीं है। कंपनियां, छोटे कारोबार और आम ग्राहक लगातार लोन ले रहे हैं। कॉरपोरेट लोन की मांग बढ़ रही है। रिटेल लोन और एमएसएमई सेक्टर में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिल रही है। अनुमान है कि अगले तीन साल में बैंकिंग सिस्टम का कुल कर्ज हर साल औसतन 14 फीसदी की रफ्तार से बढ़ सकता है। यानी बैंकों के पास कारोबार बढ़ाने का मौका अभी भी भरपूर है।
रिपोर्ट का मानना है कि अब बैंकों की कमाई भी तेजी से बढ़ सकती है। प्राइवेट बैंकों का मुनाफा अगले तीन साल में सालाना करीब 21 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है। वहीं सरकारी बैंकों की कमाई लगभग 8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ सकती है। एक बड़ी वजह यह भी है कि पर्सनल लोन और माइक्रोफाइनेंस जैसे क्षेत्रों में जो दबाव था, वह अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। इससे बैंकों को खराब कर्ज के लिए कम पैसा अलग रखना पड़ेगा और मुनाफा बढ़ेगा।
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा भरोसा आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक पर जताया गया है। इन बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत है, खराब कर्ज नियंत्रण में है और आने वाले समय में कमाई बढ़ने की अच्छी संभावना है।
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सिर्फ बैंक ही नहीं, कई NBFC कंपनियां भी अच्छा प्रदर्शन करती दिख रही हैं। गोल्ड लोन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि सोने के दाम रिकॉर्ड स्तर पर हैं। वाहन ऋण और माइक्रोफाइनेंस कारोबार में भी सुधार दिख रहा है। रिपोर्ट में श्रीराम फाइनेंस, एलएंडटी फाइनेंस, आदित्य बिड़ला कैपिटल, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस, पिरामल फाइनेंस और क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण को पसंदीदा शेयर बताया गया है।
बीमा क्षेत्र में एसबीआई लाइफ, कैनरा एचएसबीसी लाइफ और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड को मजबूत दावेदार माना गया है। वहीं शेयर बाजार से जुड़ी कंपनियों में ग्रो, नुवामा और एचडीएफसी एएमसी को पसंद किया गया है। बढ़ती निवेशक भागीदारी और SIP निवेश इन कंपनियों के कारोबार को मजबूती दे रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के BFSI मॉडल पोर्टफोलियो ने शुरुआत से अब तक करीब 25 फीसदी रिटर्न दिया है। यह निफ्टी-50 और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स दोनों से बेहतर प्रदर्शन है।
फिलहाल तस्वीर यही कहती है कि बैंकिंग सेक्टर का सबसे मुश्किल दौर शायद पीछे छूट चुका है। कर्ज की मांग बनी हुई है, कमाई सुधर रही है और निवेशकों का भरोसा भी लौट रहा है। ऐसे में अगर अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी रहती है तो बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर आने वाले समय में बाजार की अगली बड़ी थीम बन सकते हैं।
| मोतीलाल ओसवाल के पसंदीदा शेयर | सेक्टर |
|---|---|
| आईसीआईसीआई बैंक | प्राइवेट बैंक |
| एचडीएफसी बैंक | प्राइवेट बैंक |
| भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) | सरकारी बैंक |
| एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक | स्मॉल फाइनेंस बैंक |
| श्रीराम फाइनेंस | वाहन वित्त |
| पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस | हाउसिंग फाइनेंस |
| एलएंडटी फाइनेंस | विविध वित्तीय सेवाएं |
| आदित्य बिड़ला कैपिटल | विविध वित्तीय सेवाएं |
| पिरामल फाइनेंस | विविध वित्तीय सेवाएं |
| क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण | माइक्रोफाइनेंस |
| एसबीआई लाइफ | जीवन बीमा |
| कैनरा एचएसबीसी लाइफ | जीवन बीमा |
| आईसीआईसीआई लोम्बार्ड | सामान्य बीमा |
| ग्रो (बिलियनब्रेन्स गैरेज) | ब्रोकिंग और एक्सचेंज |
| एचडीएफसी एएमसी | एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) |
| नुवामा वेल्थ | वेल्थ मैनेजमेंट |
स्रोत: मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL)
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)