Banking Stocks Outlook: बैंकिंग शेयरों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं… और अगर हालात ऐसे ही रहे, तो निवेशकों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में बैंक शेयरों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। रिजर्व बैंक की सख्ती और बढ़ती ऊर्जा कीमतें बैंकों के मुनाफे पर असर डाल सकती हैं। इससे आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर की कमाई कमजोर पड़ सकती है।
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का अनुमान है कि करेंसी ट्रेड से बाहर निकलने के कारण बैंकों को करीब 5000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। यह नुकसान केंद्रीय बैंक के निर्देशों के चलते हो सकता है। गौर करने वाली बात है कि मार्च के पहले दो हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने वित्तीय कंपनियों के शेयरों से रिकॉर्ड 32700 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया है। साथ ही निफ्टी बैंक इंडेक्स की वैल्यू मार्च की शुरुआत से करीब 95 अरब डॉलर घट चुकी है। यह गिरावट इसे लगभग बेयर मार्केट के करीब ले आई है।
वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के एक्सपर्ट क्रांति बाथिनी का कहना है कि सख्त मौद्रिक नीति के चलते बैंक शेयरों पर शॉर्ट से मीडियम टर्म में दबाव बना रह सकता है। फिच रेटिंग्स के मुताबिक, मार्च 2027 तक बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 20 से 30 बेसिस प्वाइंट तक घट सकता है, जिससे उनकी कमाई प्रभावित होगी।
भारत का करीब 4.5 ट्रिलियन डॉलर का शेयर बाजार काफी हद तक बैंकिंग सेक्टर पर निर्भर है। बैंक शेयरों में कमजोरी पूरे बाजार को नीचे खींच सकती है, जो इस साल पहले ही करीब 13 प्रतिशत गिर चुका है।
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रिजर्व बैंक द्वारा रुपये को संभालने के लिए उठाए गए कदमों से बाजार में तरलता कम हो रही है। इसका असर बैंकिंग सेक्टर पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव भारत की अर्थव्यवस्था और कर्ज की मांग को प्रभावित कर सकता है, जिससे बैंकिंग सेक्टर पर और दबाव आ सकता है। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद बैंक शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक हो गए हैं। निफ्टी बैंक इंडेक्स फिलहाल 2020 के बाद सबसे सस्ते स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
सिटीबैंक ने सरकारी बैंकों के मुकाबले निजी बैंकों को बेहतर बताया है। उनका मानना है कि निजी बैंक मौजूदा आर्थिक दबाव को बेहतर तरीके से झेल सकते हैं।
सोसाइटी जेनरल के एक्सपर्ट रजत अग्रवाल का कहना है कि बैंकों के निवेश पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अब यह देखना होगा कि कर्ज की ग्रोथ पर मौजूदा हालात का कितना असर पड़ता है। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)