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शेयर बाजार में महा-तबाही! 2 दिन में डूबे 17 लाख करोड़, 95 के पार पहुंचा रुपया; अब क्या करें?

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महंगाई, राजकोषीय घाटा और विदेशी निवेश की लगातार निकासी के बढ़ते डर के बीच पिछले दो दिनों में शेयर बाजार के निवेशकों के 17 लाख करोड़ रुपये हुए डूबे

Last Updated- May 12, 2026 | 10:08 PM IST
Stock Market Crash
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

शेयर बाजारों में मंगलवार को भी तेज गिरावट हुई। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंताओं में इजाफा होना था। बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स 1.83 फीसदी गिरकर 23,380 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1,456 अंक यानी 1.92 फीसदी गिरकर 74,559 पर आ गया। ये दोनों इंडेक्स अप्रैल की शुरुआत के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुए।

मंगलवार की गिरावट से निवेशकों की लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई। इस तरह पिछले दो सत्रों में बाजार पूंजीकरण का कुल का नुकसान बढ़कर 17.44 लाख करोड़ रुपये हो गया। सेंसेक्स पिछले दो कारोबारी सत्रों में 3.6 फीसदी गिर चुका है, जो 30 मार्च के बाद से इसकी सबसे बड़ी दो दिवसीय गिरावट है।

बिकवाली का नया दौर तब आया जब अमेरिका-ईरान संघर्ष के जल्द सुलझने की उम्मीदें और भी धूमिल हो गईं। एक दिन पहले ही बाजार तब करीब 1.5 फीसदी गिर गए थे, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शांति वार्ता के लिए अमेरिका के प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को नामंजूर कर दिया था। इसके बाद ईरान ने लड़ाई खत्म करने के अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अपनी मांगों की सूची पेश की, जिसे ट्रंप ने कचरा बताया

ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहीं, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की मांग का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, मुद्रा में कमज़ोरी के रुझान और केंद्र सरकार के खर्च में कटौती के हाल के उपायों के आर्थिक असर को लेकर चिंता बढ़ी जिसने निवेशकों की मनोधारणा को चोट पहुंचाई।

लीमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक गौरव गर्ग ने कहा, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार दबाव में रहा। इससे कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें 100–105 डॉलर प्रति बैरल के दायरे से ऊपर चली गईं। लिहाजा, महंगाई और भारत के बढ़ते आयात बिल को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।

गर्ग ने कहा, आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं के कारण तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों के मनोबल पर बुरा असर डाला, खासकर भारत जैसी तेल-आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए। उन्होंने कहा कि रुपये का 95 प्रति डॉलर के स्तर की ओर गिरते जाना, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का बाजार से लगातार पैसा निकालना और बढ़ी हुई अस्थिरता ने बाजार में जोखिम से दूर रहने की भावना को और बढ़ावा दिया।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मंगलवार को 1,959 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 8,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। 2026 में एफपीआई की शुद्ध निकासी अब 2.1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। बिकवाली का दबाव व्यापक रहा और सभी 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।

व्यापक बाज़ार में भी बड़ी गिरावट आई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 3.2 फीसदी और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2.5 फीसदी गिर गया।  लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के. ने कहा कि मौजूदा गिरावट किसी सामान्य गिरावट के बजाय निवेशकों के भरोसे में आई गहरी कमी को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, मुनाफावसूली के आम दौर के उलट मौजूदा गिरावट की वजह बाजार के विश्वास का बड़ा झटका लगना है। हरिप्रसाद ने कहा, निवेशक हालिया नीतिगत संदेशों और बचत से जुड़ी दूसरी टिप्पणियों को इस बात का संकेत मान रहे हैं कि नीति-निर्माता शायद आगे आने वाले ज्यादा मुश्किल आर्थिक माहौल के लिए तैयारी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विवेकाधीन उपभोग में सुस्ती, आयात के कारण महंगाई में बढ़ोतरी और कमाई की कमजोर संभावनाओं की चिंता ने बिकवाली और तेज कर दी है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर होता रुपया और एफपीआई की लगातार बिकवाली ने भारतीय इक्विटी बाजार के लिए तिहरी आर्थिक चोट जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

अलग-अलग शेयरों की बात करें तो अपस्ट्रीम तेल उत्पादकों ने कमजोर रुझानों के बीच दम बनाए रखा। ओएनजीसी के शेयर 4.8 फीसदी चढ़ गए जबकि ऑयल इंडिया को 7.7 फीसदी का फायदा हुआ। यह तब हुआ जब ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने कहा कि कच्चे तेल और गैस उत्पादन पर रॉयल्टी में प्रस्तावित कटौती से इन कंपनियों को फायदा होगा।

(साथ में रॉयटर्स)

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First Published - May 12, 2026 | 9:48 PM IST

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