पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद राज्य में औद्योगीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च और आर्थिक सुधारों पर सरकार का फोकस बढ़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे राज्य में निवेश का माहौल बेहतर होगा और बड़े स्तर पर पूंजीगत खर्च यानी कैपेक्स (capex) का नया दौर शुरू हो सकता है।
Elara Securities के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में जो रणनीति अपनाई जाएगी, उसे उत्तर प्रदेश, ओडिशा और असम जैसे उन राज्यों में भी लागू किया जा सकता है, जहां हाल ही में BJP सत्ता में आई है।
Elara Securities की गरिमा कपूर का कहना है कि अब पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कई राज्यों में BJP की मजबूत मौजूदगी है, जैसे ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश। ऐसे में इन इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है। इसका सीधा फायदा कंस्ट्रक्शन और कैपिटल गुड्स कंपनियों को मिल सकता है। इनमें Larsen & Toubro (L&T), KEC International, NCC और Dilip Buildcon जैसी कंपनियां शामिल हैं।
इसके अलावा पूर्वी भारत पर फोकस रखने वाली सीमेंट कंपनियां जैसे Star Cement, Nuvoco Vistas और Dalmia Bharat भी फायदा उठा सकती हैं। वहीं रेलवे और वैगन बनाने वाली कंपनियां जैसे Jupiter Wagons, Texmaco और Titagarh Rail Systems को भी इसका लाभ मिल सकता है। बैंकिंग सेक्टर में Bandhan Bank को भी फायदा मिल सकता है, क्योंकि औद्योगिक और MSME सेक्टर में ग्रोथ से उसके बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा।
इतिहास देखें तो पश्चिम बंगाल को लंबे समय से औद्योगीकरण में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हालांकि राज्य के पास पोर्ट, कच्चा माल और बाजार तक अच्छी पहुंच है, लेकिन पिछले वर्षों में शासन से जुड़ी चिंताओं के कारण निवेश उतना नहीं आ पाया। विश्लेषकों का मानना है कि अब नई सरकार के साथ यह स्थिति बदल सकती है।
Nomura के विश्लेषकों का कहना है कि BJP की जीत से राज्य में गवर्नेंस बेहतर होने, बिजनेस करना आसान होने और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा खर्च होने की उम्मीद बढ़ेगी। साथ ही केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल भी देखने को मिल सकता है। Nomura की अर्थशास्त्री सोनल वर्मा के मुताबिक, अगर राज्य में निजी निवेश बढ़ता है और लोगों की आय में इजाफा होता है, तो मध्यम अवधि में यह पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब अगले करीब 10 महीनों तक कोई बड़ा राज्य चुनाव नहीं है। अगला बड़ा चुनाव उत्तर प्रदेश में फरवरी 2027 में होने की संभावना है। इस बीच सरकार के पास नीतियों पर ध्यान देने और बड़े फैसले लेने का अच्छा मौका है।
इस बीच, Kotak Institutional Equities के विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले करीब 10 महीनों में सरकार का पूरा ध्यान देश की आर्थिक स्थिति को संभालने पर रहेगा। अभी कई चुनौतियां सामने हैं, जैसे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर मानसून का खतरा जिससे खाद्य महंगाई बढ़ सकती है, और चालू खाता घाटा बढ़ने की चिंता।
विश्लेषकों के अनुसार, सरकार इस दौरान कुछ अहम कदम उठा सकती है। इनमें ऊर्जा सब्सिडी को संतुलित करना, अलग-अलग देशों के साथ व्यापार बढ़ाना, भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना और जो सुधार धीरे चल रहे हैं, उन्हें तेज करना शामिल है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)