facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

अमेरिका-ईरान तनाव से तेल के 110 डॉलर तक उछलने की आशंका, एनालिस्ट ने बताई पूरी बात

Advertisement

तनाव बढ़ने पर तेल 95 से 110 डॉलर तक पहुंच सकता है, लेकिन समझौता हुआ तो कीमतें 60 डॉलर तक गिर सकती हैं

Last Updated- February 27, 2026 | 8:20 AM IST
Crude Oil Price Outlook

Oil Price Outlook: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने पर ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा स्तर से करीब 57 प्रतिशत ज्यादा होगा। विश्लेषकों का कहना है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो तेल बाजार में तेज उछाल आ सकता है। हालांकि, अगर दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है और दुनिया में तेल की सप्लाई ज्यादा बनी रहती है, तो कीमतों में बढ़ोतरी सीमित रह सकती है।

अमेरिका ने पश्चिम एशिया में सैन्य तैयारी बढ़ाई है। इसके बाद से कच्चे तेल की कीमतें करीब 10 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। कारोबारियों को डर है कि तनाव बढ़ा तो तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

इक्विरस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि अगर तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होरमज प्रभावित होता है, तो तेल में 20 से 40 डॉलर प्रति बैरल तक का अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम जुड़ सकता है। ऐसे में कीमतें 95 से 110 डॉलर या उससे ऊपर जा सकती हैं।

रैबोबैंक इंटरनेशनल के विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में डर का माहौल बना हुआ है। उनके मुताबिक, तनाव बढ़ने की आशंका ज्यादा है और कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। लेकिन अगर अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर हमला नहीं करता, तो ब्रेंट की कीमतें फिर से 60 डॉलर के निचले स्तर तक आ सकती हैं।

स्ट्रेट ऑफ होरमज पर नजर

फरवरी में तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। शुक्रवार को ब्रेंट करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले यह 72 डॉलर तक पहुंचा था।

स्ट्रेट ऑफ होरमज बहुत अहम रास्ता है। हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद यहां से गुजरते हैं। इसके अलावा दुनिया की करीब 20 प्रतिशत गैस की सप्लाई भी इसी रास्ते से होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यहां सप्लाई रुकती है तो कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की सप्लाई लंबे समय तक बंद रहना आसान नहीं है। ऐसा तभी हो सकता है जब ईरान इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह रोक दे।

यह भी पढ़ें | रूसी तेल पर कड़े प्रतिबंधों का असर: क्या सऊदी अरब फिर बनेगा भारत का नंबर वन सप्लायर?

Oil Price Outlook: अतिरिक्त सप्लाई से मिल सकता है सहारा

नोमुरा के विश्लेषकों का कहना है कि अगर तनाव बढ़ता है तो अगले कुछ दिनों में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव रह सकता है। ईरान रोज करीब 3.3 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है। इस उत्पादन पर असर पड़ा तो बाजार में घबराहट बढ़ेगी।

लेकिन उनका कहना है कि दुनिया में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मौजूद है, जिससे सप्लाई की कमी को पूरा किया जा सकता है। इसलिए लंबे समय में कीमतों पर ज्यादा दबाव नहीं रहेगा।

अगर आगे चलकर अमेरिका ईरान में स्थिर सरकार बनवाने में सफल होता है और उस पर लगे प्रतिबंध हटा दिए जाते हैं, तो ईरान ज्यादा तेल बेच सकेगा। अभी ईरान के पास रोजाना करीब 0.3 से 0.4 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल उत्पादन की क्षमता है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर ईरान का प्रतिबंधित तेल खुले बाजार में आने लगे, तो वैश्विक सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बन सकता है।

Advertisement
First Published - February 27, 2026 | 8:01 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement