टोरेंट फार्मास्युटिकल्स ने मार्च तिमाही में ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों का ध्यान खींच लिया है। कंपनी ने न सिर्फ अपने घरेलू कारोबार में मजबूत ग्रोथ दिखाई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अच्छा प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि मोटापा और डायबिटीज की दवा सेमाग्लूटाइड में कंपनी ने बेहद कम समय में बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर ली है। इसके अलावा जेबी केमिकल्स एंड फार्मा के अधिग्रहण से मिलने वाले फायदे भी अब धीरे-धीरे कंपनी के नतीजों में दिखने लगे हैं।
यही वजह है कि तिमाही नतीजों के बाद कई ब्रोकरेज हाउस कंपनी के शेयर को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। बाजार को उम्मीद है कि आने वाले समय में सेमाग्लूटाइड, बायोसिमिलर दवाएं और ब्राजील जैसे बाजार कंपनी की ग्रोथ को और तेज कर सकते हैं। शेयर बाजार में भी इसका असर दिखा और टोरेंट फार्मा का शेयर करीब 2 प्रतिशत चढ़कर 4,580 रुपये के आसपास पहुंच गया।
कंपनी ने बताया कि अप्रैल 2026 तक भारत के सेमाग्लूटाइड बाजार में उसकी कुल हिस्सेदारी 38 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इंजेक्शन सेगमेंट में कंपनी की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत है, जबकि ओरल सेमाग्लूटाइड में कंपनी का लगभग पूरा दबदबा बना हुआ है।
सेमाग्लूटाइड को मोटापा और डायबिटीज के इलाज में भविष्य की बड़ी दवा माना जा रहा है। यही वजह है कि इस बाजार में तेजी से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। टोरेंट फार्मा का मानना है कि सिर्फ भारत में ही यह दवा पहले साल में 200 से 250 करोड़ रुपये तक की कमाई दे सकती है। कंपनी अब इस सेगमेंट में अपनी पकड़ और मजबूत करने की तैयारी में है।
मार्च तिमाही में कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 42 प्रतिशत बढ़कर करीब 4,200 करोड़ रुपये पहुंच गया। हालांकि इसमें जेबी केमिकल्स के अधिग्रहण का योगदान भी शामिल है, लेकिन अधिग्रहण के असर को हटाने के बाद भी कंपनी की ऑर्गेनिक ग्रोथ करीब 16 प्रतिशत रही।
कंपनी का एबिट्डा मार्जिन करीब 32 प्रतिशत के आसपास रहा। मार्जिन में हल्की गिरावट जरूर देखने को मिली, लेकिन मुनाफा बाजार के अनुमान से बेहतर रहा। मजबूत प्रोडक्ट मिक्स, नई लॉन्चिंग और बेहतर ऑपरेटिंग प्रदर्शन ने कंपनी की कमाई को सपोर्ट किया।
टोरेंट फार्मा के लिए भारत और ब्राजील सबसे बड़े ग्रोथ मार्केट बनकर उभरे हैं। भारत में कंपनी के ब्रांडेड कारोबार में मजबूत बढ़त देखने को मिली। घरेलू कारोबार में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि ऑर्गेनिक ग्रोथ करीब 15 प्रतिशत रही।
ब्राजील बाजार में भी कंपनी ने अच्छा प्रदर्शन किया। नई दवाओं की लॉन्चिंग और मजबूत मांग की वजह से वहां कारोबार करीब 30 प्रतिशत बढ़ा। कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में ब्राजील उसके लिए बड़ा अंतरराष्ट्रीय ग्रोथ इंजन बन सकता है।
जेनेरिक दवाओं के कारोबार में भी कंपनी को अच्छी बढ़त मिली। अमेरिका कारोबार में करीब 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि जर्मनी बाजार में भी अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला। कंपनी का मानना है कि जर्मनी में बायोसिमिलर दवाओं के लिए आसान हो रहे नियम आने वाले समय में उसके लिए नए अवसर खोल सकते हैं। यही वजह है कि कंपनी अब बायोसिमिलर पोर्टफोलियो पर भी तेजी से काम कर रही है।
टोरेंट फार्मा ने हाल ही में जेबी केमिकल्स एंड फार्मा का अधिग्रहण किया है और अब इसके फायदे दिखने शुरू हो गए हैं। कंपनी को उम्मीद है कि इस डील से लागत में बचत, मजबूत वितरण नेटवर्क और नए बाजारों तक पहुंच का फायदा मिलेगा। मैनेजमेंट ने लगभग 450 करोड़ रुपये के सिनर्जी बेनिफिट्स का अनुमान जताया है। कंपनी का कहना है कि रेवेन्यू सिनर्जी के फायदे अनुमान से पहले दिख सकते हैं।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 10 से 15 प्रतिशत रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान दिया है। मैनेजमेंट का फोकस अब सेमाग्लूटाइड, बायोसिमिलर दवाओं, ब्राजील विस्तार और नई स्पेशलिटी दवाओं पर रहेगा। इसके अलावा कंपनी ब्रेक्सपिप्राजोल और नैश बीमारी की दवा रेसमेटिरोम जैसे नए प्रोडक्ट्स पर भी काम कर रही है। बाजार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में ये दवाएं कंपनी की कमाई में बड़ा योगदान दे सकती हैं।
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तिमाही नतीजों के बाद कई ब्रोकरेज हाउस ने शेयर पर अपनी राय दी है। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने शेयर पर खरीदारी की सलाह बरकरार रखते हुए 5,230 रुपये का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि बेहतर मार्केट शेयर, नई लॉन्चिंग और जेबी केमिकल्स से मिलने वाली लागत बचत कंपनी के मार्जिन को मजबूत बनाएगी।
नुवामा ने भी शेयर पर खरीदारी की सलाह रखते हुए 5,170 रुपये का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि भारत में सेमाग्लूटाइड कारोबार और जेबी इंटीग्रेशन से कंपनी को लंबी अवधि में फायदा मिलेगा।
हालांकि मोतीलाल ओसवाल ने शेयर पर न्यूट्रल रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की ग्रोथ मजबूत जरूर है, लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन में काफी उम्मीदें पहले से शामिल हो चुकी हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)