Suzlon Energy Stock: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की बड़ी कंपनी सुजलॉन एनर्जी एक बार फिर बाजार के फोकस में आ गई है। चौथी तिमाही के नतीजों के बाद मंगलवार को कंपनी के शेयर में तेजी देखने को मिली। BSE पर सुबह कारोबार के दौरान शेयर करीब 2.5 प्रतिशत चढ़कर 55 रुपये के ऊपर पहुंच गया। मजबूत नतीजों, बड़ी ऑर्डर बुक और बेहतर कैश पोजिशन की वजह से निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। हालांकि इसके बावजूद ब्रोकरेज हाउसों की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं दिख रही। कुछ ब्रोकरेज को लगता है कि कंपनी अब मजबूत ग्रोथ फेज में पहुंच चुकी है और आने वाले सालों में विंड एनर्जी सेक्टर से बड़ा फायदा मिल सकता है। वहीं कुछ ब्रोकरेज आगे की ग्रोथ, ऑर्डर एक्सीक्यूशन और बढ़ते वर्किंग कैपिटल दबाव को लेकर थोड़ा सतर्क भी दिख रहे हैं।
Suzlon Energy ने जनवरी-मार्च तिमाही में मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ, बड़ी ऑर्डर बुक और बेहतर कैश पोजिशन दिखाई है। इसके बावजूद बाजार की चिंता अब इस बात को लेकर है कि क्या कंपनी आने वाले दो-तीन साल में इसी रफ्तार को बनाए रख पाएगी या नहीं। अलग-अलग ब्रोकरेज ने Suzlon Energy Stock के लिए 55 रुपये से लेकर 71 रुपये तक का टारगेट प्राइस दिया है।
Systematix Institutional Equities की रिपोर्ट के मुताबिक सुजलॉन का चौथी तिमाही का रेवेन्यू 54.9 अरब रुपये रहा। यह पिछले साल के मुकाबले 45 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं तिमाही आधार पर भी कंपनी की आय में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कंपनी की ऑपरेटिंग कमाई यानी EBITDA भी बढ़कर 9.64 अरब रुपये पहुंच गई। हालांकि यह ब्रोकरेज के अनुमान से थोड़ा कम रही क्योंकि कंपनी के खर्च बढ़े हैं। EBITDA मार्जिन 17.5 प्रतिशत रहा। सबसे बड़ी बात यह रही कि कंपनी ने इस तिमाही में 830 मेगावाट की डिलीवरी की, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा 573 मेगावाट था। यानी कंपनी ने प्रोजेक्ट एक्सीक्यूशन में अच्छी तेजी दिखाई है।
सुजलॉन की ऑर्डर बुक अब 5,892 मेगावाट तक पहुंच गई है। इसमें हाल ही में मिला Sunsure Energy का 195 मेगावाट का ऑर्डर भी शामिल है। FY26 के अंत तक कंपनी की ऑर्डर बुक 5,697 मेगावाट थी। कंपनी की बैलेंस शीट भी पहले से मजबूत दिख रही है। FY26 के आखिर में कंपनी के पास 23.84 अरब रुपये का नेट कैश था, जो पिछले साल 19.43 अरब रुपये था। इसका मतलब है कि कंपनी अब पहले के मुकाबले वित्तीय रूप से ज्यादा मजबूत स्थिति में है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने FY26 में करीब 5.77 अरब रुपये का कैपेक्स किया है और अगले दो साल तक इसी तरह निवेश जारी रखने की योजना है।
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Suzlon Energy अब सिर्फ विंड टरबाइन बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी अब EPC यानी Engineering, Procurement and Construction बिजनेस पर तेजी से फोकस बढ़ा रही है। EPC प्रोजेक्ट्स में कंपनी पूरा प्रोजेक्ट संभालती है, जिससे कमाई बढ़ने की संभावना रहती है। कंपनी का कहना है कि FY28 तक वह अपनी ऑर्डर बुक में EPC कारोबार की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक ले जाना चाहती है। अभी यह करीब 28 प्रतिशत है। इसके अलावा कंपनी ने स्पेन में ‘Blue Sky’ प्लेटफॉर्म लॉन्च करके यूरोप बाजार में भी दोबारा एंट्री की है। यहां कंपनी 5 मेगावाट और 6.3 मेगावाट क्षमता वाले नए विंड टरबाइन ऑफर कर रही है।
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक NTPC अब तेजी से टर्नकी EPC कॉन्ट्रैक्ट्स की तरफ बढ़ रही है और सुजलॉन को इसका फायदा मिल सकता है। कंपनी को आंध्र प्रदेश में पहले ही करीब 215 मेगावाट का काम मिल चुका है और आगे करीब 2.5 गीगावाट के और मौके दिख रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आंध्र प्रदेश में कंपनी की 2.1 गीगावाट डेवलपमेंट राइट्स वाली परियोजना अब आगे बढ़ रही है। इसमें से 775 मेगावाट के लिए PPA साइन हो चुका है और बाकी प्रोजेक्ट्स EPC कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए आगे बढ़ सकते हैं।
जहां कुछ ब्रोकरेज सुजलॉन को लेकर काफी उत्साहित हैं, वहीं नुवामा जैसी ब्रोकरेज थोड़ी सावधानी बरत रही है। नुवामा ने शेयर पर ‘HOLD’ रेटिंग दी है और 55 रुपये का टारगेट रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की तिमाही परफॉर्मेंस ठीक रही, लेकिन आगे की ग्रोथ को लेकर साफ तस्वीर अभी नहीं दिख रही। खासकर PSU प्रोजेक्ट्स में देरी और वर्किंग कैपिटल पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि EPC बिजनेस बढ़ने से कंपनी को ज्यादा वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ेगी। साथ ही कई प्रोजेक्ट्स की कमीशनिंग में देरी भी हो रही है। इसी वजह से नुवामा ने FY27 और FY28 के मुनाफे के अनुमान में कटौती की है।
सुजलॉन के नतीजों के बाद ब्रोकरेज हाउसों की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं दिख रही। कुछ ब्रोकरेज को लग रहा है कि कंपनी आने वाले समय में तेजी से बढ़ सकती है, जबकि कुछ का मानना है कि अभी आगे की तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।
Systematix Institutional Equities ने शेयर पर ‘BUY’ रेटिंग रखते हुए 71 रुपये का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी के पास इस समय मजबूत ऑर्डर बुक है, कैश पोजिशन अच्छी है और EPC बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है।
कंपनी के पास करीब 5,892 मेगावाट का ऑर्डर है, जो आने वाले समय में ग्रोथ को सपोर्ट कर सकता है। इसके अलावा कंपनी यूरोप में भी दोबारा एंट्री कर चुकी है, जिससे आगे नए मौके मिल सकते हैं। ब्रोकरेज को लगता है कि अगर कंपनी इसी तरह ऑर्डर और डिलीवरी बढ़ाती रही तो शेयर में अच्छी तेजी आ सकती है।
मोतीलाल ओसवाल ने भी शेयर पर भरोसा जताया है और 65 रुपये का टारगेट दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी ने FY26 के लिए जो ग्रोथ गाइडेंस दिया था, उसे पूरा कर लिया है। खास बात यह है कि अब कंपनी सिर्फ विंड टरबाइन बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरा EPC प्रोजेक्ट संभालने पर फोकस कर रही है। इससे कमाई बढ़ने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में NTPC से मिलने वाले बड़े ऑर्डर और आंध्र प्रदेश के प्रोजेक्ट्स को भी कंपनी के लिए बड़ा मौका बताया गया है। हालांकि ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि EPC कारोबार बढ़ने के साथ कंपनी पर वर्किंग कैपिटल का दबाव बढ़ सकता है, इसलिए इस पर नजर रखना जरूरी होगा।
वहीं नुवामा थोड़ा सतर्क नजर आया। ब्रोकरेज ने शेयर पर ‘HOLD’ रेटिंग दी है और 55 रुपये का टारगेट रखा है। नुवामा का कहना है कि कंपनी के नतीजे ठीक रहे, लेकिन आगे की ग्रोथ को लेकर मैनेजमेंट ने बहुत मजबूत भरोसा नहीं दिया।
खासकर PSU प्रोजेक्ट्स में देरी और पैसे फंसने की वजह से कंपनी पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने अगले दो साल की कमाई के अनुमान में भी थोड़ी कटौती की है। नुवामा का मानना है कि फिलहाल शेयर में बहुत बड़ा अपसाइड नहीं दिख रहा, इसलिए अभी इंतजार करना बेहतर हो सकता है।
ICICI सिक्योरिटीज ने सुजलॉन एनर्जी पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 65 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि FY26 कंपनी के लिए काफी मजबूत रहा, जहां विंड टरबाइन डिलीवरी करीब 2.5 गीगावाट तक पहुंच गई, जो सालाना आधार पर करीब 1.6 गुना ज्यादा है। कंपनी का रेवेन्यू 54 प्रतिशत बढ़कर 167 अरब रुपये और EBITDA 63 प्रतिशत बढ़कर करीब 30 अरब रुपये पहुंच गया।
ब्रोकरेज के मुताबिक 5.7 गीगावाट की मजबूत ऑर्डर बुक, EPC बिजनेस पर बढ़ता फोकस और आंध्र प्रदेश की 2.1 गीगावाट परियोजना कंपनी की आगे की ग्रोथ को सपोर्ट कर सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 971 मेगावाट के विंड टरबाइन पहले ही लगाए जा चुके हैं लेकिन उनकी कमीशनिंग बाकी है, ऐसे में FY27 में डिलीवरी और कमाई में और सुधार देखने को मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)