केनरा बैंक के तिमाही नतीजों में एक दिलचस्प तस्वीर देखने को मिली। पहली नजर में मुनाफा घटा हुआ दिखता है। ट्रेजरी इनकम कमजोर रही और ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर भी दबाव नजर आया। लेकिन इसके बावजूद बैंक को लेकर एक्सपर्ट्स का भरोसा कमजोर नहीं पड़ा। दरअसल, कहानी सिर्फ मुनाफे की नहीं है। असली फोकस इस बात पर है कि बैंक की कोर बिजनेस ग्रोथ कैसी है, लोन बुक कितनी तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में कमाई की रफ्तार कैसी रह सकती है।
यही वजह है कि मिक्स्ड क्वार्टर के बावजूद कई ब्रोकरेज हाउस अब भी Canara Bank को लेकर बुलिश बने हुए हैं। बीते कारोबारी सत्र में बीएसई पर बैंक का शेयर 129.35 रुपये पर बंद हुआ था। मंगलवार को शेयर में हल्की तेजी देखने को मिली और यह करीब 131 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा।
मार्च तिमाही में केनरा बैंक का शुद्ध मुनाफा करीब 4,500 करोड़ रुपये रहा। सालाना आधार पर इसमें करीब 10 फीसदी की गिरावट आई।लेकिन यहां दिलचस्प बात यह रही कि बाजार को इससे भी कमजोर नंबरों की उम्मीद थी। बैंक ने कम प्रोविजन की वजह से अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया। बैंक की NII यानी नेट इंटरेस्ट इनकम करीब 4 फीसदी बढ़कर 9,800 करोड़ रुपये पहुंच गई। वहीं NIM यानी मार्जिन भी बेहतर हुआ। यानी बैंक अभी भी अपने कोर लेंडिंग बिजनेस से अच्छी कमाई कर रहा है।
अगर इस पूरे रिजल्ट में सबसे मजबूत चीज कोई रही, तो वह रही बैंक की लोन ग्रोथ। केनरा बैंक की लोन बुक करीब 16 फीसदी बढ़कर 12.2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। खासकर रिटेल और गोल्ड लोन में अच्छी तेजी देखने को मिली। यानी लोग अब भी बैंक से तेजी से कर्ज ले रहे हैं, और यही बैंक की फ्यूचर अर्निंग के लिए सबसे बड़ा पॉजिटिव माना जा रहा है। मैनेजमेंट ने FY27 के लिए 11-12 फीसदी लोन ग्रोथ गाइडेंस दी है। लेकिन बैंक को उम्मीद है कि वह इससे बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
सब कुछ अच्छा नहीं था। बैंक की दूसरी आय यानी अदर इनकम में कमजोरी देखने को मिली। इसकी सबसे बड़ी वजह ट्रेजरी लॉस रहा। पिछले तिमाही में जहां ट्रेजरी गेन मिले थे, वहीं इस बार बैंक को नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा रिकवरी भी थोड़ी कमजोर रही। इसी वजह से ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर दबाव दिखा।
तिमाही के दौरान नए बैड लोन यानी स्पिपेज जरूर बढ़े… लेकिन बैंक का कहना है कि चौथी तिमाही में ऐसा अक्सर देखने को मिलता है। अच्छी बात यह रही कि GNPA और NNPA ratio में सुधार हुआ। यानी पुराने बैड लोन पर बैंक की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है।
बैंक ने यह भी माना कि नए ECL यानी Expected Credit Loss फ्रेमवर्क का असर पड़ेगा। इसके लागू होने से करीब 10,000 करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि बैंक का दावा है कि इसके बावजूद वह अपनी प्रॉफिटिबिलिटी संभाल लेगा।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग और मोतीलाल ओसवाल दोनों ने बैंक पर BUY रेटिंग बरकरार रखी है। दोनों ब्रोकरेज हाउस ने शेयर के लिए 160 रुपये का टारगेट दिया है। मौजूदा स्तर से इसमें करीब 22 फीसदी तक तेजी की संभावना बनती है। ब्रोकरेज का मानना है कि मजबूत लोन ग्रोथ, बेहतर मार्जिंन और कंट्रोल्ड प्रोविजिनिंग आने वाले समय में बैंक की कमाई को सहारा दे सकते हैं। हालांकि NIM गाइडेंस में कटौती और ट्रेजरी इनकम की कमजोरी ऐसे फैक्टर्स हैं… जिन पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)