देश में CNG गाड़ियों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। पेट्रोल और डीजल की तुलना में कम खर्च और बढ़ती पर्यावरण जागरूकता के कारण लोग तेजी से CNG वाहनों की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि, दूसरी तरफ गैस वितरण कंपनियों के लिए हालात इतने आसान नहीं दिख रहे। बढ़ती गैस लागत और सीमित कीमत बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में CNG रजिस्ट्रेशन में मार्च के मुकाबले कुछ नरमी देखने को मिली, लेकिन सालाना आधार पर मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। IGL, MGL और गुजरात गैस के CNG रजिस्ट्रेशन अप्रैल में क्रमशः 0.2 प्रतिशत, 16.4 प्रतिशत और 39.7 प्रतिशत घटे। हालांकि सालाना आधार पर इन कंपनियों की ग्रोथ क्रमशः 18.9 प्रतिशत, 6.3 प्रतिशत और 13.4 प्रतिशत रही। इनमें इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड यानी IGL का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। दिल्ली-NCR में कंपनी की ग्रोथ 25 प्रतिशत रही, जबकि दूसरे क्षेत्रों में यह करीब 6 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट में कहा गया है कि CNG वाहनों की बढ़ती संख्या का फायदा कंपनियों के मुनाफे में उतना नहीं दिख रहा है। इसकी बड़ी वजह पेट्रोल और डीजल पर सरकार की एक्साइज ड्यूटी कटौती है, जिससे पारंपरिक ईंधन की कीमतें अपेक्षाकृत कम बनी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर LNG और अन्य गैस स्रोतों की लागत लगातार बढ़ रही है। इससे कंपनियों के लिए CNG की कीमतें बढ़ाना मुश्किल हो रहा है और मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो CNG को फिर से बड़ा लागत लाभ मिल सकता है, लेकिन फिलहाल इसकी संभावना कम नजर आ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 से APM गैस सप्लाई में जो कटौती होने वाली थी, उसे फिलहाल टाल दिया गया है। इससे गैस कंपनियों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन आगे चलकर FY29 तक यह सस्ती APM गैस व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो सकती है, जो इस सेक्टर के लिए बड़ी चिंता मानी जा रही है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई की दिक्कतों की वजह से कच्चे तेल और LNG की कीमतें भी ऊंची बनी रह सकती हैं। यानी आने वाले समय में गैस कंपनियों की लागत कम होने के बजाय और बढ़ सकती है।
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ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि बड़े शहरों में अब ज्यादातर लोग CNG कारों को अपना चुके हैं, इसलिए यहां ग्रोथ पहले जैसी तेज नहीं रही। वहीं छोटे कमर्शियल वाहनों में CNG की मांग बढ़ाने के लिए अभी पेट्रोल-डीजल के मुकाबले ज्यादा बचत दिखनी जरूरी है। ऐसे में आने वाले समय में गैस कंपनियों की बिक्री ग्रोथ थोड़ी धीमी पड़ सकती है और मुनाफे पर भी दबाव बना रह सकता है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने IGL, MGL और गुजरात गैस पर ‘HOLD’ रेटिंग बनाए रखी है।