कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर यानी फ्रिज, एसी, वॉशिंग मशीन जैसे सामान बनाने वाली कंपनियों का कारोबार काफी हद तक अर्थव्यवस्था, ब्याज दरों और लोगों की आय पर निर्भर करता है। भारत जैसे बाजार में कीमत भी बहुत अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि यहां ग्राहक खरीदारी करते समय दाम को लेकर काफी संवेदनशील होते हैं।
हालांकि इस सेक्टर में नए ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन कुछ वजहों से मांग पर असर पड़ा है। गर्मी शुरू होने से ठीक पहले बेमौसम बारिश हुई, जिससे समर प्रोडक्ट्स जैसे एसी और कूलर की बिक्री प्रभावित हुई। इसके अलावा वित्त वर्ष 2025 में जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिली थी, जहां एसी की मांग के चलते वॉल्यूम में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई थी। इस वजह से वित्त वर्ष 2026 में तुलना का आधार ऊंचा हो गया और ग्रोथ धीमी पड़ गई।
यस सिक्योरिटीज के अनुसार मार्च 2026 में समर प्रोडक्ट्स की मांग जनवरी और फरवरी के मुकाबले धीमी हो गई। डीलर्स ने भी सावधानी बरतते हुए पिछले साल के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत कम स्टॉक रखा है। कंस्ट्रक्शन सेक्टर से मांग भी थोड़ी कमजोर दिख रही है, क्योंकि लोग कीमतों में कमी की उम्मीद में खरीद टाल रहे हैं। पूछताछ तो हो रही है, लेकिन वह ऑर्डर में नहीं बदल रही, जिससे बिक्री पर असर पड़ा है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के सीनियर एनालिस्ट विन्सेंट के ए के अनुसार चौथी तिमाही में कंपनियों की कमाई 8 से 10 प्रतिशत तक ही बढ़ सकती है। मुनाफे पर दबाव बना हुआ है, क्योंकि कॉपर की कीमत साल दर साल 33 प्रतिशत बढ़ गई है। इसके अलावा बीईई के नए नियमों के चलते कंपनियों ने 5 से 10 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ाई हैं, जिससे मांग पर असर पड़ा है।
एसबीआई सिक्योरिटीज के सनी अग्रवाल के मुताबिक, कंपनियों ने पहले से ज्यादा स्टॉक जमा कर लिया था क्योंकि उन्हें तेज गर्मी की उम्मीद थी। लेकिन मौसम में बदलाव के कारण एसी जैसे प्रोडक्ट्स की बिक्री प्रभावित हुई। अनुमान है कि एसी सेगमेंट में वित्त वर्ष 2026 में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट आई है। साथ ही, कॉपर की कीमत 13,000 डॉलर प्रति टन तक पहुंचने से कंपनियों को कीमत बढ़ानी पड़ी, जिससे ग्राहकों की खरीदारी पर असर पड़ा।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण गैस की कमी हुई, जिससे कुछ समय के लिए इंडक्शन कुकटॉप की मांग बढ़ गई। इससे किचन एप्लायंसेज सेगमेंट में अस्थायी बदलाव देखने को मिला।
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विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 में इस सेक्टर में सुधार देखने को मिल सकता है और कंपनियों की कमाई दो अंकों में बढ़ सकती है। लंबे समय में यह सेक्टर मजबूत बना हुआ है, क्योंकि लोगों की आय बढ़ रही है, ज्यादा घरों में इन उत्पादों की पहुंच बढ़ रही है और स्मार्ट व ऊर्जा बचाने वाले उत्पादों की मांग बढ़ रही है। अनुमान है कि भारत 2027 तक दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार बन सकता है और 2029 तक यह इंडस्ट्री करीब 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
इस समय बीएसई कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स अपने औसत से करीब 15 प्रतिशत सस्ता ट्रेड कर रहा है, जो निवेशकों के लिए मौका हो सकता है। विन्सेंट के ए के अनुसार हैवेल्स, वोल्टास, एंबर एंटरप्राइजेज और पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट अच्छे विकल्प हैं। वहीं सनी अग्रवाल ने एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, एंबर एंटरप्राइजेज, वोल्टास, ब्लू स्टार और हैवेल्स को अपनी टॉप पसंद बताया है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)