Corporate Earnings: देश की बड़ी कंपनियों के ताजा नतीजे यह संकेत दे रहे हैं कि कारोबारी माहौल में कुछ सुधार आया है। मार्च 2026 तिमाही में कंपनियों की बिक्री बढ़ी, मुनाफा भी बेहतर हुआ और कई सेक्टरों में मांग में सुधार देखने को मिला। हालांकि दूसरी तरफ निवेश की रफ्तार धीमी पड़ रही है, बैंकों पर दबाव बना हुआ है और वैश्विक हालात भी चिंता बढ़ा रहे हैं। ऐसे में आने वाला साल कंपनियों और निवेशकों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है।
ब्रोकरेज फर्म नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएसई 500 कंपनियों (तेल विपणन कंपनियों को छोड़कर) का शुद्ध लाभ (PAT) मार्च तिमाही में सालाना आधार पर 12% बढ़ा। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में मुनाफे की वृद्धि 9% रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 8% थी।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च तिमाही में कंपनियों की आय या टॉपलाइन 13% बढ़ी, जो पिछले तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर है। इसकी बड़ी वजह कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और टैक्स कटौती से मिला फायदा रही। हालांकि बिक्री बढ़ने के बावजूद कंपनियों का परिचालन लाभ (EBITDA) केवल 7% बढ़ा, जिससे साफ है कि लागत का दबाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। फिर भी मुनाफा 12% बढ़ने से यह संकेत मिला है कि कई कंपनियां कठिन माहौल में भी अपनी कमाई संभालने में सफल रही हैं।
पूरे FY26 में सबसे बेहतर प्रदर्शन मिडकैप कंपनियों का रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, मिडकैप कंपनियों का मुनाफा 21% बढ़ा, जबकि FY25 में यह बढ़ोतरी 15% थी। स्मॉलकैप कंपनियों का मुनाफा भी 2% से बढ़कर 11% पर पहुंच गया। इसके मुकाबले लार्जकैप कंपनियों का मुनाफा केवल 7% बढ़ा। इसका मतलब है कि बाजार में कमाई की असली तेजी छोटी और मझोली कंपनियों में देखने को मिली, जबकि बड़ी कंपनियों की ग्रोथ अपेक्षाकृत कमजोर रही।
नतीजों में एक बड़ा चिंता का विषय नकदी फ्लो रहा। कंपनियों के ऑपरेटिंग कैश फ्लो की वृद्धि FY25 के 11% से घटकर FY26 में सिर्फ 4% रह गई। खासतौर पर चक्रीय क्षेत्रों यानी ऐसे सेक्टर जो आर्थिक गतिविधियों पर ज्यादा निर्भर होते हैं, वहां नकदी फ्लो कमजोर पड़ा। इसके साथ ही कंपनियों ने नए प्रोजेक्ट और विस्तार पर खर्च करने की रफ्तार भी कम कर दी। FY26 में कैपेक्स ग्रोथ 10% रही, जबकि FY25 में यह 12% थी। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियां फिलहाल निवेश को लेकर सावधानी बरत रही हैं।
घरेलू खपत से जुड़े सेक्टरों में लंबे समय बाद कुछ राहत देखने को मिली। ऑटो कंपनियों और एफएमसीजी कंपनियों ने बिक्री में सुधार दर्ज किया। पेंट कंपनियों का प्रदर्शन भी बेहतर रहा। इससे संकेत मिलता है कि उपभोक्ता मांग धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। कमोडिटी सेक्टर में मेटल कंपनियां सबसे बड़ी विजेता रहीं। ऊंची धातु कीमतों की वजह से इन कंपनियों का मुनाफा मजबूत रहा। ऊर्जा क्षेत्र का प्रदर्शन हालांकि उतना अच्छा नहीं रहा और वहां कमाई दबाव में दिखी।
निर्यात आधारित सेक्टरों में तस्वीर मिली-जुली रही। आईटी कंपनियों की डॉलर आय उम्मीद से कमजोर रही, लेकिन रुपये की कमजोरी ने इस असर को काफी हद तक कम कर दिया। इससे उनकी कमाई स्थिर बनी रही। केमिकल कंपनियों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं फार्मा कंपनियों के नतीजे अपेक्षा से कमजोर रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर रुपया कमजोर बना रहता है तो आईटी और केमिकल कंपनियों को आगे भी इसका फायदा मिल सकता है।
बैंकिंग सेक्टर के नतीजे निवेशकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। कर्ज की मांग मजबूत रहने और खराब कर्ज का दबाव कम होने के बावजूद बैंकों का मुनाफा ज्यादा नहीं बढ़ पाया। इसकी मुख्य वजह ब्याज मार्जिन यानी एनआईएम (Net Interest Margin) पर बना दबाव है। विशेष रूप से सरकारी बैंकों के लिए एनआईएम अब सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर मार्जिन में सुधार नहीं हुआ तो बैंकिंग शेयरों में बड़ी तेजी आना मुश्किल होगा।
रिपोर्ट में सीमेंट सेक्टर को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि सीमेंट कंपनियां अब आक्रामक विस्तार की बजाय मुनाफा बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। कई कंपनियां कैपेक्स कम कर रही हैं और लाभप्रदता सुधारने की कोशिश कर रही हैं। अगर यह रणनीति सफल रहती है तो निवेशक इन कंपनियों को बेहतर वैल्यूएशन दे सकते हैं।
औद्योगिक कंपनियों की तस्वीर उतनी मजबूत नहीं दिखी। रिपोर्ट के मुताबिक, खासकर पावर सेक्टर से जुड़े ऑर्डर में कमी आई है। कई इंडस्ट्रियल कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत होने के बावजूद नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार धीमी पड़ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में इन कंपनियों ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है, लेकिन अब मार्जिन सामान्य स्तर पर लौट सकते हैं। इससे उनकी ऊंची वैल्यूएशन पर दबाव बन सकता है।
नुवामा ने FY27 के आय अनुमान में केवल 1% की कटौती की है, लेकिन उसका मानना है कि बाजार अभी भी कमाई को लेकर जरूरत से ज्यादा आशावादी है। बाजार को उम्मीद है कि FY26 से FY28 के बीच कंपनियों की कमाई सालाना औसतन 17% की दर से बढ़ेगी। जबकि पिछले दो वर्षों में यह वृद्धि केवल 9% रही है। ब्रोकरेज का कहना है कि कमजोर आय वृद्धि, सरकारी और निजी निवेश में सुस्ती तथा पश्चिम एशिया संकट से तेल कीमतों में संभावित उछाल जैसी चुनौतियां इन अनुमानों को प्रभावित कर सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची वैल्यूएशन, तेल कीमतों का जोखिम और कमजोर आय वृद्धि निकट भविष्य में बाजार को अस्थिर बनाए रख सकते हैं। इसी को देखते हुए नुवामा ने फार्मा, आईटी, इंटरनेट, सीमेंट और केमिकल्स सेक्टर पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है। वहीं इंडस्ट्रियल, ऑटो और पावर सेक्टर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)