अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदों के कारण शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतें लगभग 4 प्रतिशत गिरकर 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं। जानकारों का मानना है कि अगर यह समझौता हो जाता है तो कच्चे तेल की कीमतें और नीचे आ सकती हैं। उदाहरण के लिए फिच रेटिंग्स ने 2026 के लिए औसतन 87 डॉलर प्रति बैरल कीमत का अनुमान लगाया है। इस कमी का आधार यह है कि पांच महीने बंद रहने के बाद होर्मुज स्ट्रेट जुलाई के आखिर तक फिर से खुल जाएगा।
फिच रेटिंग्स में प्रबंध निदेशक एंजेलीना वलाविना ने कहा, ‘तेल की कीमतों का रुख क्या रहता है, यह इस पर निर्भर करता है कि होर्मुज रास्ता दोबारा कब खुलता है। जुलाई के अंत तक इसके दोबारा खुलने पर हमारा अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही में बाजार में आपूर्ति अधिक हो जाएगी और तेल की कीमतें गिर जाएंगी। जोखिम द्विपक्षीय है।’
फिच रेटिंग्स के अनुमानों के अनुसार कच्चा तेल मई-जुलाई में औसतन 100-110 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना है। इसके बाद अगस्त में यह 80 डॉलर प्रति बैरल और सितंबर से लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल तक आ जाएगा।
फिच ने कहा कि ईरान के होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से प्रतिदिन 1.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल और प्रतिदिन 50 लाख बैरल तेल समतुल्य उत्पादों की आवाजाही रुक गई है, जो विश्व की तेल खपत का 20 प्रतिशत है।
पश्चिम एशिया युद्ध से पहले फरवरी 2026 में कच्चा तेल लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल पर था। लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें करीब 79 प्रतिशत बढ़कर 125 डॉलर तक पहुंच गईं। तब से इनमें उतार-चढ़ाव बना हुआ है। युद्ध खत्म होने की उम्मीदों से तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं।
मिरे ऐसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट मोहम्मद इमरान ने कहा कि इलाके में तनाव कम होने, निर्यात के अहम रास्तों के फिर से खुलने और खाड़ी देशों से आपूर्ति फिर से शुरू होने से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं कम हो रही हैं। हालांकि ईआईए ने जून-जुलाई के लिए कच्चे तेल की कीमत का अनुमान 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनाए रखा है, लेकिन इमरान का कहना है कि यह होर्मुज रास्ते से आपूर्ति में लगातार रुकावटों पर निर्भर करता है। इसके अलावा, 2027 तक इसकी कीमत का रुझान नीचे की ओर है और इसके लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल तक आ जाने का अनुमान है।
राबोबैंक इंटरनैशनल के विशेषज्ञों ने भी 2026 के लिए कच्चे तेल की कीमतों का पूर्वानुमान कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसका कारण चीन से मांग में गिरावट है।
उन्होंने कहा कि मई में चीन में समुद्री मार्ग से कच्चे तेल का आयात गिरकर 67 लाख बैरल प्रति दिन रह गया, जो एक दशक का सबसे निचला मासिक स्तर है और सालाना आधार पर 35 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट और पहली तिमाही 2026 के लगभग 1.11 करोड़ बैरल प्रतिदिन के औसत से 44 लाख बैरल प्रतिदिन कम है।
हाल में जारी एक नोट में कहा गया है कि चीन की सरकारी और प्राइवेट, दोनों तरह की रिफाइनरियों ने अपना कामकाज कम कर दिया है। इसकी वजह उत्पाद मार्जिन का कम, और कभी-कभी घाटा, होना, कच्चे तेल की उपलब्धता पर अनिश्चितता और ऊंची कीमतों के कारण उत्पादन लागत का बढ़ना है।