Defence Stocks: डिफेंस सेक्टर अब तेजी से बदल रहा है और यह बदलाव सिर्फ नए हथियारों का नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी का है। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, डिफेंस कॉन्क्लेव 2026 में यह साफ दिखा कि आने वाले समय में युद्ध का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। अब लड़ाई सिर्फ जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि साइबर, स्पेस और डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है।
आज के समय में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट निगरानी और लेजर जैसे हथियार (डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स) तेजी से अहम बन रहे हैं। इन नई तकनीकों का बाजार दुनिया भर में 440 अरब डॉलर से ज्यादा का हो सकता है। मतलब साफ है कि आने वाले समय में वही देश आगे रहेगा जिसके पास मजबूत टेक्नोलॉजी होगी।
पहले भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए काफी हद तक विदेशों पर निर्भर था। करीब 65-70 प्रतिशत सामान बाहर से आता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब लगभग 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण देश में ही बनने लगे हैं।
आकाश मिसाइल, ब्रह्मोस, स्वदेशी रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम जैसे प्रोजेक्ट इस बदलाव की मिसाल हैं। सरकार भी ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत डिफेंस सेक्टर में बड़ा जोर दे रही है। रक्षा बजट भी काफी बढ़ा है और लक्ष्य रखा गया है कि 2029 तक भारत 6 अरब डॉलर का रक्षा निर्यात करे।
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रिपोर्ट में यह भी साफ कहा गया है कि पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत को अभी समय लगेगा। खासकर हाई-टेक क्षेत्रों जैसे सेमीकंडक्टर, सेंसर, चिप्स और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स में अभी भी विदेशों पर निर्भरता है।
इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत को विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर काम करना होगा। यानी ‘मेक इन इंडिया’ के साथ ‘मेक विद ग्लोबल पार्टनर्स’ भी जरूरी होगा। ब्रह्मोस मिसाइल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो भारत और रूस की साझेदारी से बनी है।
इस पूरी कहानी में निवेशकों के लिए भी बड़ा मौका छिपा है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में वही कंपनियां आगे बढ़ेंगी जिनके पास खुद की टेक्नोलॉजी (IP) है और जो ज्यादा आयात पर निर्भर नहीं हैं। ब्रोकरेज की नजर में BEL (भारत इलेक्ट्रॉनिक्स) सबसे मजबूत कंपनी है और इसे टॉप पिक माना गया है। यह कंपनी डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स में मजबूत पकड़ रखती है और सरकार के कई बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ी है।
इसके अलावा Data Patterns और Solar Industries (SOIL) में भी मीडियम टर्म में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है, क्योंकि ये कंपनियां एडवांस टेक्नोलॉजी और डिफेंस सिस्टम्स पर काम कर रही हैं।
वहीं HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स) को लेकर ब्रोकरेज का कहना है कि इसमें गिरावट का खतरा कम है, लेकिन शेयर में तेजी इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपने प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से पूरा करती है।
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आने वाले समय में डिफेंस सेक्टर में जबरदस्त बदलाव देखने को मिलेगा। टेक्नोलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन सबसे बड़ा रोल निभाएंगे। ड्रोन, AI, साइबर सिक्योरिटी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर तेजी से बढ़ेंगे। साथ ही, भारत सरकार की नीतियां और बढ़ता बजट इस सेक्टर को और मजबूत बनाएंगे। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी रहेंगी जैसे हाई-टेक कंपोनेंट्स में विदेशों पर निर्भरता और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़े नियम।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)