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Defence Stocks: रक्षा निर्यात 63% बढ़ने के बाद डिफेंस शेयरों पर बुलिश हुए एक्सपर्ट्स, ये 2 शेयर बने टॉप पिक

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रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी, रिकॉर्ड रक्षा निर्यात, ड्रोन और मिसाइल सिस्टम की बढ़ती मांग के बीच भारतीय डिफेंस सेक्टर में तेजी की उम्मीद बढ़ी है

Last Updated- May 08, 2026 | 8:41 AM IST
Defence Sector Stocks

भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रैल 2026 में इस सेक्टर में कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिले। देश ने तीसरी परमाणु ताकत से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS अरिधमन को शामिल किया। साथ ही लंबी दूरी तक हमला करने वाले स्वदेशी ड्रोन प्लेटफॉर्म “प्रोजेक्ट KAL” को भी पेश किया गया। रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी, हथियारों की तेज खरीद और बढ़ते निर्यात की वजह से आने वाले समय में इस सेक्टर में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद जताई जा रही है।

ब्रोकरेज हाउस ICICI Securities का मानना है कि भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए माहौल काफी मजबूत बना हुआ है। रिपोर्ट में HAL और Solar Industries को सबसे पसंदीदा शेयर बताया गया है।

सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत बजट का पूरा इस्तेमाल किया। यह बजट करीब 1.86 लाख करोड़ रुपये का था। इसके अलावा रक्षा खरीद बोर्ड ने MR-SAM मिसाइल सिस्टम की दो रेजिमेंट खरीदने को मंजूरी भी दी।

रक्षा निर्यात में बड़ी छलांग

भारत का रक्षा निर्यात पिछले वित्त वर्ष में 63 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 3.84 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे पहले यह आंकड़ा 2.36 लाख करोड़ रुपये था। दिलचस्प बात यह रही कि सरकारी कंपनियों के साथ-साथ निजी कंपनियों का योगदान भी तेजी से बढ़ रहा है। कुल निर्यात में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत और निजी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत रही।

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HAL, BEL और Solar Industries को मिले बड़े ऑर्डर

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL को 570 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले हैं। वहीं Solar Industries की सहयोगी कंपनी ने भारतीय सेना को 60 किलोमीटर तक मार करने वाला पिनाका मार्क-1 सिस्टम भेजा है। HAL ने ध्रुव मार्क-3 हेलीकॉप्टर की सप्लाई शुरू कर दी है। कंपनी ने तेजस मार्क-1A लड़ाकू विमान के इंजन की सप्लाई में देरी को लेकर अमेरिकी कंपनी GE पर जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा HAL को रूस से सुखोई-30 विमान के 12 किट मिले हैं, जिनकी कीमत करीब 13,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

शिपबिल्डिंग कंपनियों में भी तेजी

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने भारतीय तटरक्षक बल के लिए चौथे फास्ट पेट्रोल वेसल का काम शुरू किया है। कंपनी ने श्रीलंका की Colombo Dockyard में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीदी है। कोचीन शिपयार्ड ने भारतीय नौसेना को एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटरक्राफ्ट सौंपा है। वहीं गोवा शिपयार्ड ने नौसेना के लिए नई पीढ़ी का ऑफशोर पेट्रोल वेसल लॉन्च किया है।

ड्रोन और हथियार बनाने वाली कंपनियों पर फोकस

रक्षा क्षेत्र में ड्रोन और हथियार बनाने वाली कंपनियों की गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। HoverIT उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे में नया प्लांट लगा रही है, जहां Divyastra Mk2 ड्रोन बनाए जाएंगे। InsideFPV Drones ने रक्षा मंत्रालय को 100 करोड़ रुपये के ड्रोन भेजे हैं। वहीं Sun Inox Metal Forge ने सालाना 1 लाख तोप के गोले बनाने वाला प्लांट शुरू किया है।

क्यों मजबूत दिख रहा है रक्षा सेक्टर?

रिपोर्ट के मुताबिक सरकार 2029 तक रक्षा पूंजीगत खर्च को 3 लाख करोड़ रुपये तक ले जाना चाहती है। इसके साथ ही नया Defence Procurement Manual 2025 आने से हथियार खरीदने की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से दुनिया भर में रक्षा खर्च बढ़ रहा है। इसका फायदा भारतीय कंपनियों को भी मिल सकता है, खासकर मिसाइल, ड्रोन, रडार और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियों को। इसी वजह से ब्रोकरेज हाउस HAL और Solar Industries को इस सेक्टर में सबसे मजबूत दांव मान रहा है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

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First Published - May 8, 2026 | 8:30 AM IST

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