facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

गर्मी में ज्यादा पानी पीना भी पड़ सकता है भारी! रिसर्च में सामने आया बड़ा कारण

Advertisement

भीषण गर्मी के कारण कामकाजी लोगों में डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, मैग्नीशियम की कमी और किडनी संबंधी जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं।

Last Updated- June 11, 2026 | 8:22 AM IST
Heatwave
Representative image

भारत में जारी भीषण गर्मी के प्रकोप का असर अब स्वस्थ कामकाजी लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। प्लम द्वारा किए गए एक नए विश्लेषण के अनुसार अत्यधिक गर्मी के कारण निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन), इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और किडनी पर तनाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

यह अध्ययन 22,000 से अधिक लोगों के नियमित स्वास्थ्य जांच रिकॉर्ड पर आधारित है। इस अध्ययन में मार्च से मई के भीषण गर्मियों के महीनों के बायोमार्कर (जैविक संकेतक) डेटा की तुलना नवंबर से फरवरी के ठंडे महीनों के डेटा से की गई। इसमें पाया गया कि गर्मी और डिहाइड्रेशन के कारण क्लिनिकली असामान्य रीडिंग्स में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

अध्ययन में डिहाइड्रेशन का सबसे स्पष्ट संकेत गाढ़ा मूत्र पाया गया, जो शरीर में पानी की कमी का सीधा संकेतक है। गर्मियों में यह समस्या 25 प्रतिशत अधिक देखी गई और लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति इससे प्रभावित पाया गया। वहीं, अम्लीय (एसिडिक) मूत्र के मामले भी 28 प्रतिशत बढ़ गए, जो डिहाइड्रेशन के कारण किडनी पर बढ़ते दबाव का संकेत माने जाते हैं। सबसे चौंकाने वाले निष्कर्षों में से एक यह था कि गर्मी के महीनों में सोडियम का स्तर कम होने के मामलों में 59 फीसदी वृद्धि हुई।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रवृत्ति न केवल पसीने से सोडियम के नुकसान का संकेत देती है, बल्कि यह इलेक्ट्रोलाइट्स के पर्याप्त प्रतिस्थापन के बिना केवल सादे पानी के अत्यधिक सेवन के कारण रक्त सोडियम के स्तर में कमी का भी संकेत है। विश्लेषण में कहा गया है कि इसका समाधान केवल अधिक पानी पीना नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स लेना भी है।

सभी बायोमार्कर में मैग्नीशियम की कमी में सबसे तेज वृद्धि देखी गई, जिसके मामले गर्मी के महीनों में तीन गुना से अधिक हो गए। मैग्नीशियम पसीने के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है और इसे केवल पानी से फिर से भरा नहीं जा सकता है। इस वजह से लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से थकान, ऐंठन और अनियमित दिल की धड़कन की समस्या हो सकती है। विश्लेषण में यह भी देखा गया कि गर्मियों में डिहाइड्रेशन के कारण कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है। जिससे किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) का खतरा बढ़ता है। यह सर्दियों की तुलना में गर्मियों में लगभग दो गुना ज्यादा पाया गया, हालांकि कुल मामलों की संख्या ज्यादा नहीं थी।

गर्मी की लहरों के महीनों के दौरान रक्त से संबंधित बायोमार्कर में भी बदलाव देखे गए। गर्मी में हीमोग्लोबिन का निम्न स्तर 18 फीसदी अधिक था, जबकि हेमेटोक्रिट और आयरन का निम्न स्तर क्रमशः 13 और 17 फीसदी तक बढ़ गया। शोधकर्ताओं के अनुसार ये बदलाव शरीर की उस प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसके जरिए वह खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता है।

Advertisement
First Published - June 11, 2026 | 8:22 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement