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Dixon, Kaynes, Syrma या Avalon? किन EMS Stocks पर सबसे ज्यादा भरोसा जता रहा है मोतीलाल ओसवाल

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AI की बढ़ती मांग से मेमोरी चिप्स महंगी होने और लागत बढ़ने के बावजूद EMS कंपनियों की ऑर्डर बुक 25% बढ़ी, ब्रोकरेज को अगले तीन साल में मजबूत कमाई की उम्मीद

Last Updated- June 16, 2026 | 9:18 AM IST
EMS Stocks

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेक्टर की ग्रोथ फिलहाल मजबूत बनी हुई है। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों को लगातार नए ऑर्डर मिल रहे हैं, जिसकी वजह से उनकी ऑर्डर बुक तेजी से बढ़ रही है। मार्च 2026 तक इस सेक्टर की कुल ऑर्डर बुक करीब 20,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत ज्यादा है। डिफेंस, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और क्लीन एनर्जी जैसे सेक्टरों से अच्छी मांग देखने को मिल रही है, जिससे कंपनियों को आने वाले समय की कमाई को लेकर भरोसा बना हुआ है।

AI की वजह से महंगी हुईं मेमोरी चिप्स

पिछले एक साल में मेमोरी चिप्स की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी मांग का तेजी से बढ़ना है। बड़ी चिप कंपनियां अब AI सर्वर और डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाली हाई बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) बनाने पर ज्यादा फोकस कर रही हैं। इसके चलते सामान्य DRAM और NAND चिप्स की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है और कीमतें ऊपर चली गई हैं।

हालांकि मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट का कहना है कि EMS कंपनियों पर इसका असर बहुत ज्यादा नहीं होगा। वजह यह है कि ज्यादातर इंडस्ट्रियल, ऑटो या डिफेंस उत्पादों में मेमोरी चिप की हिस्सेदारी सीमित होती है। इसके अलावा कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा ग्राहकों से वसूलने में सक्षम हैं।

लागत बढ़ी, लेकिन कंपनियों ने निकाला रास्ता

मेमोरी चिप्स ही नहीं, बल्कि धातुओं, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, माल ढुलाई और मजदूरी की लागत भी बढ़ी है। इसके अलावा दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों ने भी कंपनियों पर दबाव बढ़ाया है। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी कंपनियों को सबसे ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वहां मांग कमजोर है और कीमतें बढ़ाने की गुंजाइश कम है। इसके बावजूद ज्यादातर EMS कंपनियों ने लागत बढ़ने के असर को ग्राहकों तक पहुंचाकर, खरीद प्रक्रिया बेहतर बनाकर और परिचालन दक्षता बढ़ाकर अपने मार्जिन को काफी हद तक बचाए रखा है।

कई कंपनियों की ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर

रिपोर्ट के मुताबिक, सेक्टर की ज्यादातर कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है। Kaynes Technology की ऑर्डर बुक करीब 8,370 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। Syrma SGS की ऑर्डर बुक 6,600 करोड़ रुपये, Avalon Technologies की 3,440 करोड़ रुपये और Cyient DLM की 2,420 करोड़ रुपये रही। वहीं Data Patterns के पास भी मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन मौजूद है। रिपोर्ट का कहना है कि नए ग्राहक जुड़ने, बड़े ऑर्डर मिलने और कई नए सेक्टरों में कारोबार बढ़ने की वजह से आने वाले समय में भी ऑर्डर फ्लो मजबूत बना रह सकता है।

मार्च तिमाही में कैसी रही तस्वीर

मार्च 2026 तिमाही में EMS सेक्टर की कुल आय सालाना आधार पर करीब 8 प्रतिशत बढ़ी। Syrma SGS, Avalon Technologies, Kaynes Technology और Amber Enterprises ने अच्छी ग्रोथ दिखाई। वहीं Dixon Technologies, Cyient DLM और Data Patterns का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। हालांकि बढ़ती लागत, कुछ ऑर्डरों में देरी और सप्लाई चेन की चुनौतियों की वजह से कई कंपनियों के मुनाफे पर दबाव भी देखने को मिला। इसके बावजूद सेक्टर की कुल ग्रोथ बरकरार रही।

आगे और बेहतर हो सकती है कमाई

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में EMS कंपनियों की कमाई और बेहतर हो सकती है। इसकी वजह यह है कि डिफेंस, ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हाई मार्जिन वाले कारोबार का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही उत्पादन बढ़ने और नई फैक्ट्रियों के शुरू होने से परिचालन लागत पर भी बेहतर नियंत्रण मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट का अनुमान है कि FY26 से FY28 के बीच उसकी कवरेज वाली EMS कंपनियों की आय 31 प्रतिशत, EBITDA 35 प्रतिशत और समायोजित मुनाफा 44 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ सकता है।

ब्रोकरेज को किन शेयरों पर भरोसा

मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि मजबूत ऑर्डर बुक, बढ़ती मांग और क्षमता विस्तार के दम पर EMS सेक्टर आने वाले वर्षों में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने Kaynes Technology, Avalon Technologies, Cyient DLM, Syrma SGS, Dixon Technologies और Amber Enterprises पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। वहीं Data Patterns पर ‘Neutral’ रुख रखा गया है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय एक्सपर्ट की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

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First Published - June 16, 2026 | 9:12 AM IST

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