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EV से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक… इन तेजी से बढ़ते सेक्टरों से बैंकों को मिल सकता है बड़ा फायदा

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EV, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी में बढ़ते निवेश से बैंकों को मिलेगा बड़ा फायदा, रिपोर्ट में दिखी मजबूत ग्रोथ की उम्मीद

Last Updated- June 16, 2026 | 11:20 AM IST
Banking Sector Outlook

Banking Sector को लेकर अक्सर यह चिंता जताई जाती है कि बैंकों में जमा (डिपॉजिट) की रफ्तार धीमी पड़ रही है और मुनाफे की ग्रोथ भी पहले जैसी नहीं रही। लेकिन हालात उतने कमजोर नहीं हैं, जितने दिखते हैं। बैंकों की बैलेंस शीट पहले के मुकाबले काफी मजबूत है, बैड लोन कम हुआ है और नए-नए सेक्टरों से कर्ज की मांग बढ़ रही है। ऐसे में बैंकिंग सेक्टर आगे की ग्रोथ के लिए अच्छी स्थिति में नजर आ रहा है।

कर्ज की मांग बनी रहेगी मजबूत

मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था के बढ़ने के साथ कई ऐसे सेक्टर उभर रहे हैं जहां आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर कर्ज की जरूरत होगी। इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रिन्यूएबल एनर्जी, सेमीकंडक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की उम्मीद है। इसका फायदा बैंकों को मिलेगा क्योंकि इन क्षेत्रों को फंडिंग की जरूरत होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि छोटे कारोबारियों और MSME सेक्टर में भी कर्ज की मांग अच्छी बनी हुई है।

डिपॉजिट की चिंता पर क्या कहती है रिपोर्ट?

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग सिस्टम का क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो करीब 82.7 फीसदी है। हालांकि इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक सिर्फ डिपॉजिट के भरोसे नहीं चलते। उनके पास बाजार से पैसा जुटाने, बॉन्ड जारी करने और सिक्योरिटाइजेशन जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। यही वजह है कि कर्ज की ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है।

Banking Sector Outlook: डिजिटल बैंकिंग से बढ़ रही पहुंच

रिपोर्ट के मुताबिक, UPI और डिजिटल पेमेंट ने बैंकिंग सेक्टर की पहुंच को काफी बढ़ाया है। आज हर महीने करीब 24 अरब UPI ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 29 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इससे ज्यादा लोग बैंकिंग सिस्टम से जुड़ रहे हैं और बैंकों को नए ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिल रहा है।

यह पढ़ें: Banking sector: तेज भाग रही बैंकिंग इंडस्ट्री, लेकिन अंदर ही अंदर क्यों बढ़ रहा खतरा?

गोल्ड लोन पर भी सकारात्मक नजरिया

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में गोल्ड लोन को भी बैंकों के लिए आकर्षक कारोबार बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर बैंक सोने की कीमत के मुकाबले 50-70 फीसदी तक ही कर्ज देते हैं, जिससे जोखिम सीमित रहता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल से गोल्ड लोन ग्राहकों तक पहुंचाना भी आसान हो रहा है।

Banking Sector Outlook: बैड लोन का दबाव पहले से कम

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में बैंकों की एसेट क्वालिटी में बड़ा सुधार आया है। अब बैंक पहले की तुलना में ज्यादा सावधानी से कर्ज दे रहे हैं। बेहतर डेटा और मजबूत जांच प्रक्रिया की वजह से बैड लोन का जोखिम काफी कम हुआ है। हालांकि साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी को बैंकिंग सेक्टर के लिए नई चुनौती बताया गया है।

ECL नियमों का असर सीमित रहेगा

मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि Expected Credit Loss (ECL) नियम लागू होने के बाद भी बैंकों पर ज्यादा दबाव नहीं आएगा। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर बैंकों के पास पहले से ही पर्याप्त प्रावधान मौजूद हैं, जो किसी भी अतिरिक्त बोझ को संभालने में मदद करेंगे।

Banking Sector पर क्या है राय?

इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अतुल कुमार गोयल के साथ चर्चा के बाद मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर अगले ग्रोथ फेज में मजबूत स्थिति से प्रवेश कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों की बैलेंस शीट स्वस्थ है, बैड लोन का दबाव कम है और EV, रिन्यूएबल एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर तथा MSME जैसे क्षेत्रों से कर्ज की मांग बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में बैंकिंग सेक्टर आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के साथ-साथ अच्छी कमाई भी कर सकता है।

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First Published - June 16, 2026 | 11:01 AM IST

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