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FDI का खेल उल्टा पड़ा! जितना पैसा आया, उससे ज्यादा बाहर क्यों गया?

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विदेशी निवेश बढ़ने के बावजूद भारत से तेजी से निकल रहा पैसा, नेट FDI लगातार दबाव में

Last Updated- April 03, 2026 | 2:22 PM IST
FDI

भारत की अर्थव्यवस्था में एक दिलचस्प लेकिन चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। एक तरफ विदेशी निवेश तेजी से आ रहा है, तो दूसरी तरफ वही निवेशक अपना पैसा तेजी से वापस भी ले जा रहे हैं। यही वजह है कि जनवरी महीने में लगातार छठे महीने देश का नेट विदेशी निवेश निगेटिव रहा, यानी कुल मिलाकर पैसा बाहर ज्यादा गया।

जनवरी में विदेशी निवेशकों ने डिविडेंड और ब्याज के रूप में बड़ी मात्रा में पैसा वापस लिया। इसके साथ ही भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किया गया निवेश भी जुड़ गया, जिससे कुल मिलाकर निवेश का संतुलन बिगड़ गया और नेट आउटफ्लो की स्थिति बन गई। पिछले 13 महीनों में जहां भारत से बाहर जाने वाला निवेश लगभग स्थिर रहा, वहीं निवेशकों द्वारा पैसा वापस ले जाने की रफ्तार दोगुनी से ज्यादा हो गई है।

कुल निवेश बढ़ा, लेकिन असर कम

सरकार के आंकड़े बताते हैं कि भारत में कुल विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। FY13 में जहां 34 अरब डॉलर का निवेश आया था, वहीं FY25 में यह बढ़कर 80 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। FY26 के पहले 9 महीनों में भी 73.7 अरब डॉलर का निवेश आया, जो पिछले साल के मुकाबले 16 प्रतिशत ज्यादा है। लेकिन इसके बावजूद अगस्त 2025 से लगातार नेट FDI निगेटिव बना हुआ है, क्योंकि जितना पैसा आ रहा है, उससे ज्यादा वापस जा रहा है।

कमजोर होती नेट FDI की तस्वीर

महीना कुल विदेशी निवेश (Gross FDI Inflows) पैसा वापसी / डिसइन्वेस्टमेंट विदेश में भारतीय निवेश (Outward FDI) शुद्ध FDI (Net FDI)
जनवरी 2025 5.78 2.07 2.8 0.91
फरवरी 2025 5.0 3.5 2.2 -1.23
मार्च 2025 5.5 4.0 2.1 -1.09
अप्रैल 2025 8.4 1.2 3.94 3.94
मई 2025 6.8 1.8 1.7 0.04
जून 2025 9.0 2.0 5.3 1.08
जुलाई 2025 10.5 3.5 5.04 5.04
अगस्त 2025 5.6 4.5 1.5 -0.62
सितंबर 2025 6.6 4.2 3.6 -1.66
अक्टूबर 2025 6.1 4.6 2.7 -1.55
नवंबर 2025 6.0 5.0 1.2 -0.48
दिसंबर 2025 8.1 5.6 2.6 -0.49
जनवरी 2026 5.67 4.92 2.14 -1.39

जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच 13 महीनों में से 8 महीनों में निवेश का संतुलन निगेटिव रहा। खास बात यह है कि जनवरी 2025 में जहां 2.07 अरब डॉलर वापस गया था, वहीं जनवरी 2026 में यह बढ़कर 4.92 अरब डॉलर हो गया। सिर्फ जुलाई 2025 में थोड़ी राहत मिली थी, जब कम पैसा बाहर जाने के कारण नेट FDI 5 अरब डॉलर रहा, लेकिन यह एक अपवाद ही साबित हुआ।

पिछले कुछ वर्षों में विदेशी निवेश का रुझान भी बदल रहा है। पहले जहां टेक्नोलॉजी सेक्टर सबसे बड़ा आकर्षण था, अब निवेश सेवाओं और ऊर्जा क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है।

वर्ष सेवा क्षेत्र कंप्यूटर सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर ट्रेडिंग कंस्ट्रक्शन (इंफ्रास्ट्रक्चर)  ऊर्जा
FY20 16% 15% 9% 4% 3%
FY21 8% 44% 5% 13% 2%
FY22 12% 24% 8% 6% 3%
FY23 19% 20% 10% 4% 6%
FY24 15% 18% 9% 10% 9%
FY25 19% 14% 9% 5% 7%

कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का हिस्सा FY21 के 44 प्रतिशत से घटकर FY25 में 14 प्रतिशत रह गया, जबकि सर्विस सेक्टर का हिस्सा बढ़कर 19 प्रतिशत हो गया। वहीं, नॉन-कन्वेंशनल एनर्जी में भी निवेश तेजी से बढ़ा है। दूसरी ओर बैंकिंग सेक्टर में निवेश में भारी गिरावट देखी गई है।

विदेशों में भारतीय निवेश का फोकस

वर्ष सिंगापुर अमेरिका मॉरीशस यूएई नीदरलैंड्स यूके
FY20 28.33% 15.4% 8.19% 3.36% 9.36% 10.09%
FY21 19.5% 33.0% 8.0% 3.8% 7.0% 4.5%
FY22 23.2% 18.5% 8.3% 1.5% 4.5% 11.5%
FY23 15.3% 14.2% 7.0% 8.5% 6.2% 19.0%
FY24 26.5% 17.5% 2.5% 8.2% 6.8% 8.5%
FY25 24.0% 13.5% 9.0% 9.8% 5.5% 5.0%
FY26* 30.4% 17.24% 12.52% 10.5% 5.84% 5.71%

भारत से बाहर जाने वाला निवेश कुछ चुनिंदा देशों में ज्यादा केंद्रित है। सिंगापुर में सबसे ज्यादा निवेश जा रहा है, जहां FY26 में इसका हिस्सा 30 प्रतिशत रहा। मॉरीशस और यूएई का हिस्सा भी तेजी से बढ़ा है, जो भारत के इन देशों के साथ मजबूत होते व्यापारिक संबंधों को दिखाता है।

अब असली चुनौती क्या है?

इस पूरी तस्वीर से एक साफ संदेश मिलता है। सिर्फ नए निवेशकों को आकर्षित करना ही काफी नहीं है, बल्कि जो निवेशक पहले से भारत में हैं, उन्हें बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। जब तक यह नहीं समझा जाएगा कि विदेशी निवेशक अपना पैसा क्यों वापस ले रहे हैं, तब तक भारत की निवेश कहानी अधूरी ही रहेगी।

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First Published - April 3, 2026 | 2:22 PM IST

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