FII Shareholding: विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पिछले कुछ समय से भारतीय शेयर बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। सेबी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 और 2026 के दौरान FIIs ने कुल मिलाकर करीब 3.28 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इस लगातार बिकवाली के बीच FIIs ने ऐसे 11 शेयरों में लगातार 8 तिमाहियों तक अपनी हिस्सेदारी घटाई, यानी जून 2024 तिमाही से लेकर मार्च 2026 तिमाही तक हर तिमाही में इन कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम की।
इन 11 शेयरों में निफ्टी 50 की दो बड़ी कंपनियां Eternal और डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज भी शामिल हैं। Eternal में FIIs की हिस्सेदारी मार्च 2024 के 56 फीसदी से घटकर मार्च 2026 में 33.3 फीसदी रह गई। वहीं डॉ. रेड्डीज में उनकी हिस्सेदारी 30.2 फीसदी से घटकर 22.1 फीसदी पर आ गई।
सबसे बड़ी कटौती PNB Housing Finance में देखने को मिली। यहां FIIs की हिस्सेदारी 58 फीसदी से घटकर सिर्फ 17.2 फीसदी रह गई। इसके अलावा Cyient और KPIT Technologies में भी विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर हिस्सेदारी बेची।
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान का मानना है कि Cyient और KPIT Technologies दोनों की कमाई आने वाले समय में कमजोर रह सकती है। Cyient के मामले में कंपनी की आय उम्मीद से कम रही है और मांग को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने अपने मुनाफे के अनुमान घटा दिए हैं। वहीं KPIT Technologies ने संकेत दिया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कारोबार की रफ्तार धीमी रह सकती है। इसके पीछे कंपनी के दो बड़े प्रोजेक्ट्स का कमजोर होना बड़ी वजह है।
SBI सिक्योरिटीज के फंडामेंटल रिसर्च प्रमुख सनी अग्रवाल के मुताबिक, सिर्फ Cyient और KPIT ही नहीं, बल्कि पूरा IT सेक्टर दबाव में है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते असर से पारंपरिक IT सर्विस कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर दबाव बन रहा है। यही वजह है कि विदेशी निवेशक IT शेयरों से पैसा निकालकर AI से जुड़ी कंपनियों की तरफ रुख कर रहे हैं।
मार्च 2024 के बाद से Cyient और KPIT Technologies के शेयर करीब 50 फीसदी तक टूट चुके हैं। वहीं Container Corporation of India और Godrej Consumer Products में भी 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। हालांकि सभी शेयरों का प्रदर्शन कमजोर नहीं रहा। PNB Housing Finance का शेयर इस दौरान करीब 58 फीसदी चढ़ा है। दिलचस्प बात यह है कि जहां FIIs ने इस शेयर में हिस्सेदारी घटाई, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने अपनी हिस्सेदारी 6.88 फीसदी से बढ़ाकर 44.1 फीसदी कर ली।
सनी अग्रवाल के मुताबिक, Amara Raja की कमाई पिछले तीन सालों से लगभग स्थिर रही है। साथ ही बैटरी उद्योग धीरे-धीरे लेड-एसिड बैटरी से लिथियम बैटरी की तरफ बढ़ रहा है। कंपनी नए ऊर्जा कारोबार में बड़ा निवेश कर रही है, लेकिन उससे होने वाली कमाई अभी धीरे-धीरे बढ़ रही है। भारी निवेश और कम ग्रोथ की वजह से आने वाले कुछ वर्षों तक कंपनी के मुनाफे और रिटर्न पर दबाव रह सकता है। यही वजह है कि विदेशी निवेशकों ने इस शेयर में अपनी हिस्सेदारी घटाई है।
| कंपनी का नाम | मार्च 2026 में FII हिस्सेदारी (%) | मार्च 2024 के मुकाबले बदलाव (%) |
|---|---|---|
| PNB हाउसिंग फाइनेंस | 17.2 | -70.4 |
| बर्जर पेंट्स इंडिया | 5.0 | -54.6 |
| कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया | 8.6 | -49.0 |
| सोभा | 6.8 | -45.0 |
| साइएंट (Cyient) | 19.8 | -44.9 |
| इटरनल (Eternal) | 33.3 | -40.6 |
| KPIT टेक्नोलॉजीज | 15.2 | -40.4 |
| गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स | 14.5 | -36.9 |
| डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज | 22.1 | -27.0 |
| अमारा राजा एनर्जी एंड मोबिलिटी | 20.1 | -26.3 |
| एल्गी इक्विपमेंट्स | 23.5 | -23.0 |