facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

पहला Bharat Bond ETF हुआ मैच्योर, मिला 6.5 फीसदी सालाना रिटर्न

Advertisement
Last Updated- April 20, 2023 | 10:34 PM IST
ETF

पहला टार्गेट मैच्योरिटी फंड (भारत बॉन्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड-ईटीएफ, अप्रैल 2023) परिपक्व हो गया है और उसका रिटर्न वाईटीएम और बेंचमार्क इंडेक्स (निफ्टी भारत बॉन्ड इंडेक्स) के मुकाबले थोड़ा कम रहा है।

31 मार्च 2023 को ईटीएफ ने 6.54 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया जबकि बेंचमार्क इंडेक्स की सालाना वृद्धि‍ दर 6.61 फीसदी रही। शुरुआती दौर में वाईटीएम (भविष्य के रिटर्न का संकेतक) 6.69 फीसदी था और यह जानकारी एडलवाइस म्युचुअल फंड की तरफ से जारी नोट से मिली।

फंड हाउस ने कहा कि ट्रैकिंग में गलती अलग-अलग प्रतिफल पर कूपन के पुनर्निवेश का नतीजा था। फंड हाउस ने कहा, इसकी वजह यह रही कि शुरुआती कूपन पुनर्निवेश कोविड के चलते कम प्रतिफल वाले माहौल में हुआ, वहीं हालिया पुनर्निवेश उच्च प्रतिफल वाले माहौल में हुआ, जब ब्याज दरें बढ़ रही थी।

एडलवाइस एमएफ ने 17 अप्रैल को परिपक्वता के बाद ईटीएफ का विलय भारत बॉन्ड ईटीएफ 2025 में कर दिया।

अपनी तरह की पहली योजना की शुरुआत 2020 में इस लक्ष्य के साथ हुई थी कि भारतीय बॉन्ड बाजार को खुदरा निवेशकों की पहुंच के लिहाज से बेहतर बनाया जाएगा। इस योजना की अवधारणा निवेश व परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने तय की थी और इसका प्रबंधन एडलवाइस एमएफ को दिया गया।

तीन साल में प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां करीब 2 लाख करोड़ रुपये हो गई और कई फंड हाउस इसमें प्रवेश कर गए। पैसिव डेट योजनाएं इसलिए लोकप्रिय हुई क्योंकि इनमें तय रिटर्न देने की क्षमता है, अगर इसमें परिपक्वता तक निवेशित रहा जाए। साथ ही इसके साथ न्यूनकम क्रेडिट व ब्याज दर जोखिम होता है। हालांकि योजना अब कर के अवरोध का सामना कर रहा है।

सरकार ने डेट एमएफ को मिलने वाला कर लाभ वापस ले लिया है, जो उसे सावधि जमाओं व इससे जुड़े अन्य निवेश विकल्पों के मुकाबले मिलता था। कराधान में बदलाव से निवेश पर असर पड़ने की आशंका है।

Advertisement
First Published - April 20, 2023 | 10:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement